फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विशेषज्ञों का दावा: सिर्फ कोरोनावायरस ही नहीं, चमगादड़ों से इन गंभीर बीमारियों का भी होता है खतरा, कई हो सकते हैं घातक

Sat, 09 Apr 2022 06:32 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
चमगादड़ों से फैलने वाले संक्रमण - फोटो : Pixabay
पिछले दो साल से अधिक समय से वैश्विक स्तर पर जारी कोरोना संक्रमण के कारण लोगों को कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान होना पड़ा है। कोरोना के सामने आए कई वैरिएंट्स को सेहत के लिहाज से बेहद संक्रामक और घातक माना जा रहा है। साल 2019 के आखिरी महीनों में सबसे पहले चीन के वुहान शहर में नोवेल कोरोनावायरस संक्रमण की पहचान की गई थी। शोध में पता चला कि यह वायरस चमगादड़ों से इंसानों में फैला है। 

मेडिकल की भाषा में जानवरों से मनुष्यों में संचारित होने वाले वायरस को जूनोटिक वायरस कहा जाता है। ये वायरस जूनोसिस नामक संक्रामक रोग पैदा करते हैं। बैक्टीरिया जैसे अन्य रोगजनक भी जूनोसिस का कारण बन सकते हैं। मनुष्यों में होने वाले लगभग 75% संक्रामक रोग जूनोटिक प्रकृति के होते हैं। जानवरों से इंसानों में होने वाले संक्रमण और बीमारियों का यह कोई पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी कई अन्य जानवरों के माध्मय से इंसानों में बीमारियों के मामले रिपोर्ट किए जाते रहे हैं। इतना ही नहीं कोरोनावायरस के अलावा चमगादड़ों से ही कई अन्य गंभीर बीमारियों के मामले सामने आते रहे हैं। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
विज्ञापन

2 of 5
चमगादड़ और कोरोनावायरस - फोटो : Pixabay
जानवरों से इंसानों में संक्रमण
शोधकर्ता बताते हैं, कई प्रकार से जानवरों के माध्यम से इंसानों में संक्रमण होने का खतरा हो सकता है। वायरस या बैक्टीरिया से संक्रमित जानवरों के काटने या उनके घाव या रक्त के संपर्क में आने के कारण  रोगजनक मनुष्यों तक पहुंच सकते हैं। इसके अलावा जानवरों के दूषित मांस को भी रोगजनकों के संचरण का एक माध्यम माना जाता रहा है। चमगादड़ों के माध्यम से कोरोना के पहले भी कई वायरस इंसानों को प्रभावित कर चुके हैं।
विज्ञापन

3 of 5
चमगादड़ों से फैला कोरोनावायरस - फोटो : PIB
कोरोनावायरस की उत्पत्ति
शोध में पता चलता है कि चमगादड़, कई प्रकार के वायरस और बैक्टीरिया के लिए एक प्राकृतिक रूप से अनुकूल स्थान हो सकते हैं। कोरोना की उत्पत्ति को लेकर हुए कुछ अध्ययनों में दावा किया जाता रहा है कि चीन से इस संक्रमण के उभरने का कारण यह है कि इन जानवरों को इन स्थानों पर एक स्वादिष्ट व्यंजन माना जाता है और ये पारंपरिक चिकित्सा का एक स्रोत भी हैं। हालांकि इसे ही वास्तविक कारण के रूप में मानने के लिए पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं।

4 of 5
चमगादड़ों से तमाम तरह के संक्रमण का खतरा - फोटो : Pixabay
इन संक्रमणों का भी कारण माने जाते रहे हैं चमगादड़
कोरोना वायरस से पहले भी इंसानों में होने वाले कई प्रकार के संक्रमण और बीमारियों के लिए चमगादड़ों को जिम्मेदार माना जाता रहा है। निपाह वायरस, हेंड्रा वायरस, इबोला वायरस और सार्स कोरोनावायरस भी चमगादड़ों से इंसानों में फैले थे। कीड़े, पिस्सू जैसे परजीवी भी संक्रामक रोगजनकों को चमगादड़ से मनुष्यों तक पहुंचा सकते हैं। अध्ययनकर्ताओं का मानना है कि जहां पर चमगादड़ अधिक पाए जाते हैं, उन स्थानों पर संक्रामक रोगों का जोखिम भी अधिक हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
चमगादड़ों में मौजूद होते हैं संक्रामक एजेंट - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता?
शोधकर्ता कहते हैं कि चमगादड़ों को कई संक्रामक एजेंटों जैसे बैक्टीरिया, वायरस, कवक और अन्य परजीवियों का भंडार कहना गलत नहीं होगा। अध्ययनों में पाया गया है कि अन्य जानवरों और पक्षियों के मुकाबले चमगादड़ों के जूनोटिक वायरस से संक्रमित होने की अधिक संभावना होती है। चमगादड़ से जुड़े प्राथमिक जूनोटिक रोग हिस्टोप्लाज्मोसिस, साल्मोनेलोसिस, यर्सिनीओसिस जैसे मामले देखे जाते रहे हैं। 


---------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें