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क्या सामान्य जुकाम-बुखार से बनी एंटीबॉडी भी कोरोना से बचाव करने में है कारगर? इस शोध अध्ययन ने चौंकाया

Tue, 10 Nov 2020 03:00 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Coronavirus Antibodies - फोटो : Amar Ujala/Pixabay
देश और दुनियाभर में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं। दुनियाभर के लोगों को कोरोना की एक सुरक्षित और कारगर वैक्सीन का इंतजार है, जो लोगों में वायरस से मुकाबला करने वाली एंटीबॉडीज पैदा कर सके और लंबे समय तक इस महामारी से बचाए रखे। दुनियाभर के कई देशों में वैक्सीन पर शोध हो रहे हैं और वैज्ञानिक कामयाबी के काफी करी हैं। हालांकि व्यापक टीकाकरण के लिए कोई वैक्सीन अबतक उपलब्ध नहीं हो पाई है। ऐसे में मास्क का इस्तेमाल करने, सोशल डिस्टेंसिंग और साफ-सफाई के जरिए इस वायरस से बचा जा सकता है। इस बीच एक शोध में यह बात सामने आई है कि सामान्य जुकाम और बुखार से बनी एंटीबॉडीज भी कोरोना से प्रतिरक्षा दे सकती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
दरअसल, लंदन के शोधकर्ताओं द्वारा शोध अध्ययन में ये नई बात सामने आई है, जिसके मुताबिक कई लोग ऐसे हैं जो कोरोना से संक्रमित नहीं हुए, लेकिन उनके अंदर की प्रतिरक्षा प्रणाली कोरोना से लड़ने में पूरी तरह से सक्षम है। फ्रांसिस क्रिक इंस्टीट्यूट और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन ने कोरोना से संबंधित प्रतिरक्षा प्रणाली पर यह शोध किया है। इस शोध के मुताबिक कुछ लोगों में सामान्य जुखाम बुखार वाले वायरस से जो एंटीबॉडीज बनी थी, उनमें SARS-CoV-2 से बचाने में मदद करने की क्षमता थी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
हेल्थ रिसर्च जर्नल 'साइंस' में छह नवंबर को प्रकाशित इस शोध पर ज्यादा जानकारी के लिए वैज्ञानिक अग्रेतर अध्ययन में लगे हुए हैं। शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया कि कुछ लोग, खासकर बच्चों में ऐसी एंटीबॉडीज हो सकती है जो SARS-CoV-2 के खिलाफ प्रतिक्रियाशील होते हैं। ये एंटीबॉडीज तब बनी होगी, जब इंसान सामान्य जुखाम, वायरल फीवर (बुखार) आदि से संक्रमित हुआ होगा और ठीक हुआ होगा। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
शोधकर्ताओं ने इसकी पुष्टि के लिए साल 2011 से 2018 तक इकट्ठा किए गए 300 से ज्यादा नमूनों का विश्लेषण किया, जिसमें सामान्य ठंड वाले वायरस से बचाव करने वाली एंटीबॉडीज थी। इसमें 20 में से एक वयस्क में वह एंटीबॉडी भी थी, जो SARS-CoV-2 के हमले के दौरान प्रतिक्रिया करती है। शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि 6-16 साल की उम्र के बच्चों से लिए गए ब्लड सैंपल में क्रॉस-रिएक्टिव एंटीबॉडी अधिक बार पाए गए।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
दरअसल, SARS-CoV-2 के स्पाइक प्रोटीन में दो सब यूनिट S1 और S2 होते हैं। इनमें से S1 वायरस को शरीर में कोशिकाओं पर लॉक करने देता है, वहीं S2 वायरस को कोशिकाओं में जाने देता है। ये S2 सबयूनिट सामान्य सर्दी-बुखार वाले वायरल में भी सामान्यत: पाया जाता है। यानी जो एंटीबॉडी जुखाम-बुखार से लड़ने के लिए पहले बनी थी, वो कोरोना के हमले को भी रोक सकती है। 
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Coronavirus Survive - फोटो : Pixabay
हालांकि शोधकर्ताओं को 100 फीसदी इस बात के सबूत नहीं मिले कि जुखाम-बुखार वाले वायरस कोविड-19 से बचाव कर सकते हैं। फिलहाल इसे महज अनुमान माना जा रहा है। शोधकर्ताओं के मुताबिक जिन लोगों को हाल ही में जुकाम-बुखार हुआ था, उन्हें ये नहीं सोचना चाहिए कि उनके अंदर कोविड-19 से लड़ने के लिए एंटीबॉडी मौजूद है। उन्हें भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए और तमाम एहतियात बरतने चाहिए।
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