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World No Tobacco Day 2021: मुंह के इन लक्षणों को यदि किया नजरअंदाज तो जा सकती है जान

Mon, 31 May 2021 02:05 PM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मुंह के कैंसर के रोगियों के जीवन को बहुत प्रभावित किया है - फोटो : Social Media

Medically Reviewed by Dr. Vikas Goswami
डॉ विकास गोस्वामी, ओनकोलॉजिस्ट
मैक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, वैशाली, गाजियाबाद
डिग्री- एमबीबीएस, एमडी, डीएनबी
अनुभव- 10 वर्ष से अधिक
कोविड-19 महामारी के कारण एक अभूतपूर्व वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट पैदा हो गया है। महामारी के कारण फैले संक्रमण को काबू में करने के लिए सरकारों द्वारा सख्त उपायों को लागू करने की वजह से कहीं न कहीं क्लीनिकल गतिविधियां बहुत कम हो रही हैं। एक अध्ययन के अनुसार, भारत में कोविड-19 के कारण निवारक दंत चिकित्सा उपचार में 63.7 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसने भारत में मुंह के कैंसर के रोगियों के जीवन को बहुत प्रभावित किया है। अगली स्लाइड्स से जानिए मुंह के कैंसर से जुड़ी विस्तृत जानकारी। 

 







 

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महिलाओं में 4.8 फीसदी है - फोटो : Pixabay

तंबाकू से होता है मुंह का कैंसर
ओरल कैंसर आज हमारे देश में स्वास्थ्य संबंधी एक बहुत बड़ी समस्या है, क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक इस समस्या से ग्रस्त हैं- पुरुषों में यह संख्या 16.1 प्रतिशत और महिलाओं में 4.8 फीसदी है। तंबाकू का अत्यधिक उपयोग, सुपारी चबाना, शराब का उपयोग, ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी-टाइप 16), यूवी विकिरण और कुछ आनुवंशिक स्थितियां मुंह के कैंसर को जन्म देती हैं।

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ऐसे लक्षण बहुत आम हैं - फोटो : iStock

ये लक्षण आते हैं नजर
अधिकांश रोगियों में प्रारंभिक अवस्था में रोग के लक्षण भी नजर नहीं आते हैं और इसलिए वे किसी प्रकार की चिकित्सा सहायता नहीं लेते हैं। मुंह के कैंसर के रोगियों में जो शुरुआती लक्षण नजर आते हैं, उनमें प्रमुख हैं- मुंह के छाले या मुंह का अल्सर, दांतों का हिलना, भोजन निगलने में कठिनाई, वजन कम होना और मसूड़ों में रक्तस्राव इत्यादि। ऐसे लक्षण बहुत आम हैं और इस महामारी के दौरान कोविड -19 प्रोटोकॉल के बावजूद इनमें से किसी लक्षण को कभी भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

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जीवित रहने की दर कुल मिलाकर 5 साल यानी 40 प्रतिशत तक है - फोटो : सोशल मीडिया

जीवित रहने की संभावनाएं हैं कम 
मुंह के कैंसर की रोग निदान दर भी बहुत खराब है और जीवित रहने की दर कुल मिलाकर 5 साल यानी 40 प्रतिशत तक है। यदि प्रारंभिक अवस्था (स्टेज1 और स्टेज 2) में निदान किया जाता है, तो जीवित रहने की दर 80 प्रतिशत से अधिक हो सकती है। 50 प्रतिशत तक मुंह के कैंसर का निदान केवल एक उन्नत चरण (स्टेज 3 और स्टेज 4) में किया जाता है।

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मौखिक कैंसर की जांच माध्यमिक रोकथाम का एक महत्वपूर्ण पहलू है - फोटो : social media

समय पर जांच है जरूरी
चिकित्सक के अनुसार, मौखिक कैंसर की जांच माध्यमिक रोकथाम का एक महत्वपूर्ण पहलू है और संभावित रूप से प्रारंभिक अवस्था में रोग के बढ़ने की गति को धीमा करने या रोकने में मदद कर सकता है। ओरल कैंसर का निदान निस्संदेह ओरल मेडिसिन के संदर्भ में एक जरूरी प्रक्रिया है, भले ही निदान में देरी रोगी की तरफ से हो या चिकित्सक से संबंधित हो। ओरल केविटी के गहन नैदानिक निरीक्षण के जरिये 99 प्रतिशत तक ओरल कैंसर का पता लगाया जा सकता है।

नोट- यह लेख मैक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के ओनकोलॉजिस्ट डॉक्टर विकास गोस्वामी से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉक्टर विकास गोस्वामी पिछले दस सालों से प्रैक्टिस कर रहे हैं। उन्होंने अपनी डिग्री मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, गांधी मेडिकल कॉलेज और राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर से ली है।

अस्वीकरण- अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

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