टीकाकरण को लेकर देश में रखी गई इस तरह की शर्त ने एक तरह की सामाजिक दुविधा पैदा कर दी है। एक तरफ जहां सुरक्षा के नजरिए को इस तरह के अभ्यास को अच्छा कदम माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विशेषज्ञ आपसी संबंधों के लिए इसे सही नहीं मानते हैं। सामाजिक घटनाओं पर नजर रखने वाले जानकारों का कहना है कि यह उन लोगों में अधीरता की भावना पैदा कर रही है जिनका अब तक टीकाकरण नहीं हो सका है।