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Nipah Virus: केरल में फिर से निपाह की दस्तक, मृत्युदर 70% से अधिक; जानिए इसके लक्षण और बचाव के तरीके

Sun, 21 Jul 2024 07:12 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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निपाह वायरस - फोटो : freepik.com
केरल में एक बार फिर से गंभीर निपाह संक्रमण का जोखिम बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक कोझिकोड मेडिकल कॉलेज में संक्रमण का इलाज करा रहे 14 वर्षीय एक लड़के की रविवार को मौत हो गई, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी पुणे ने इसकी पुष्टि की है। उसे सांस की दिक्कत के बाद वेंटिलेटर पर रखा गया था। मलप्पुरम निवासी इस बच्चे में शनिवार को संक्रमण की पुष्टि की गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रोगी के संपर्क में आए करीब 246 लोगों को सूचीबद्ध किया गया है, जिनमें से 63 में उच्च जोखिम माना जा रहा है। केरल में इस घातक संक्रामक रोग को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सभी लोगों को अलर्ट रहने और बचाव के उपाय करते रहने की सलाह दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, केरल में प्रकोप की जांच और तकनीकी सहायता के लिए एक टीम तैनात की जाएगी जिससे संक्रमण को नियंत्रित किया जा सके।
 

इससे पहले पिछले साल अगस्त-अक्तूबर के महीने में भी केरल में निपाह संक्रमण के मामले रिपोर्ट किए थे। कोझिकोड जिला इससे सबसे ज्यादा प्रभावित माना जा रहा था। संक्रमण को देखते हुए जिले के शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने के भी आदेश जारी किए गए थे। 

आइए जानते हैं कि निपाह का संक्रमण क्यों खतरनाक माना जाता है, ये कैसे फैलता है और बचाव के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं?
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निपाह वायरस का मामला - फोटो : iStock
स्वास्थ्य अधिकारियों ने किया अलर्ट

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा, संक्रमण का जोखिम बढ़ रहा है, सुरक्षात्मक रूप से सभी लोगों को बचाव के लिए प्रयास करते रहने की आवश्यकता है। निपाह तेजी से बढ़ सकता है इसलिए सावधानी जरूरी है। संक्रमण प्रभावित क्षेत्रों में जाने से बचें।

निपाह वायरस का संक्रमण एक जूनोटिक बीमारी है जो सुअर और चमगादड़ जैसे जानवरों से मनुष्यों में फैलती है। जानवरों से इंसानों में संक्रमण के अलावा संक्रमित व्यक्ति से दूसरे लोगों को भी इसका खतरा हो सकता है। निपाह, बड़ा स्वास्थ्य जोखिम हो सकता है, यह कोरोना से ज्यादा खतरनाक माना जाता है। इसकी मृत्युदर 45-75 फीसदी तक मानी जाती रही है। 
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निपाह का संक्रमण - फोटो : Freepik
निपाह संक्रमण और इसका जोखिम

चमगादड़ों को निपाह वायरस संचार का प्रमुख कारण माना जाता है। चमगादड़ों द्वारा दूषित फलों या अन्य भोजन के माध्यम से ये इंसानों में फैल सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, फलों-सब्जियों को खाने से पहले उसे अच्छी तरह से साफ करें। पक्षियों द्वारा कटा हुआ फल न खाएं।

संक्रमण के शिकार लोगों में एसिम्टोमैटिक (कोई भी लक्षण न होना) से लेकर श्वसन बीमारी और घातक इंसेफेलाइटिस का खतरा हो सकता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, उल्टी और श्वसन संक्रमण शामिल हैं। गंभीर मामलों में दौरे पड़ने और मस्तिष्क की सूजन के कारण कोमा भी हो सकता है। निपाह के लिए कोई टीका नहीं है।

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निपाह के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : istock
निपाह संक्रमण का इलाज

निपाह संक्रमण और इसके जोखिमों में मोनोक्लोनल एंटीबॉडी को प्रभावी माना जाता रहा है। पिछले साल भारत सरकार ने ऑस्ट्रेलिया से  मोनोक्लोनल एंटीबॉडी मंगाई थी। इसे अब केरल में दिया जाएगा। फिलहाल निपाह वायरस के खिलाफ कोई टीका उपलब्ध नहीं है। निपाह वायरस से संक्रमित लोगों के साथ शारीरिक संपर्क से ये एक से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। ऐसे लोगों से दूरी बनाकर रखने की सलाह दी जाती है।
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निपाह से बचाव के तरीके - फोटो : istock
कैसे करें बचाव?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक अगर किसी को 3-5 दिनों से संक्रमण के लक्षणों का अनुभव हो रहा है और ये सामान्य उपचार से ठीक नहीं हो रहा है तो इसपर गंभीरता से ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। चूंकि इससे बचाव के लिए कोई टीका नहीं है ऐसे में संक्रमण को कम करने के बारे में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है।

हाथों की नियमित सफाई, फलों-सब्जियों को अच्छे से साफ करना, प्रभावित इलाकों की यात्रा से बचना निपाह के खतरे को कम करने का तरीका हो सकता है। केरल के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों को भी अलर्ट रहने की जरूरत है।


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स्रोत और संदर्भ
Nipah virus infection in humans causes a range of clinical presentations


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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