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कोहनी और घुटने पड़ गए हैं काले तो करा लें ब्लड शुगर की जांच, हो सकता है डायबिटीज का खतरा

Wed, 05 Aug 2020 01:09 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डायबिटीज: नहीं चेते तो होगी मुश्किल - फोटो : अमर उजाला
डायबिटीज या मधुमेह एक ऐसी बीमारी हैं, जिसकी वजह से खून में शुगर (चीनी/शर्करा) की मात्रा बढ़ जाती है। कुछ दशक पहले तक देश में यह बीमारी उम्र के साथ बढ़ती थी। लेकिन अब यह हमारी जीवनशैली जनित बीमारी का रूप ले चुकी है और अब बच्चे और युवा भी इसका शिकार हो रहे हैं। यह जानकर आपको जानकर आश्चर्य होग सकता है कि देश में इस बीमारी से पीड़ित आधे लोगों को यह पता ही नहीं है कि उन्हें यह बीमारी है। जिन्हें पता है, उनमें से भी आधे यानि कुल पीड़ितों में से एक-चौथाई लोगों को ही इसका इलाज मिल पाता है। कई बार इसकी समय से पहचान नहीं हो पाती है। एक नए अध्ययन में इसके बारे में नई जानकारी सामने आई है। 
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elbow - फोटो : instagram
  • क्या आपने गौर किया है कि आपकी कोहनी या घुटने काले पड़ गए हैं? अगर कोहनी और घुटने काले पड़ गए हैं तो एक बार ब्लड शुगर की जांच जरूर करवा लें। संभावना है कि आप या तो टाइप-2 डायबिटीज के शिकार हो चुके हों या फिर उसकी जद में जा रहे हों। ‘द मेयो क्लीनिक, अमेरिका’ के हालिया अध्ययन में ऐसी आशंका जताई गई है।
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black elbow - फोटो : Social Media
  • इस अध्ययन में शोधकर्ताओं का कहना है कि ब्लड में ग्लूकोज का स्तर बढ़ने पर त्वचा कड़ी होने लगती है। इसके साथ ही नसों में खून का खक्का जमने का खतरा भी बढ़ जाता है। इस वजह से कोहनी और घुटने की त्वचा काली पड़ने लगती है। इसके अलावा गर्दन के पिछले हिस्से में धब्बे भी उभर सकते हैं। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
  • इस शोध अध्ययन के मुख्य शोधकर्ता रीव कीव्स के मुताबिक, टाइप-2 डायबिटीज में अग्नाशय  पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन पैदा नहीं कर पाता या उसके इस्तेमाल की शरीर की क्षमता कमजोर पड़ सकती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, ठीक से नींद नहीं लेना, योग-व्यायाम नहीं करना, फास्टफूड का ज्यादा सेवन आदि इसकी मुख्य वजहें हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
  • शोधकर्ताओं का कहना है कि डायबिटीज दस्तक दे, इससे पहले कई संकेत देती है। व्यक्ति अगर इन्हें समय रहते भांप ले और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने लगे तो वह डायबिटीज से दूरी बनाए रख सकता है। 
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मुंह की बदबू - फोटो : Pixabay
  • पूर्व में आए एक अन्य अध्ययन में मुंह के दुर्गंध को भी नजरअंदाज नहीं किए जाने की सलाह दी जा चुकी है। इस संबंध में 'आईओेएसार जर्नल ऑफ डेंटल एंड मेडिकल साइंसेज' में छपे अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया था कि डायबिटीज से जूझ रहे मरीजों के न सिर्फ खून, बल्कि मुंह में भी ग्लूकोज का स्तर ज्यादा हो सकता है। 
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मधुमेह - फोटो : social media
  • मुंह में जमा ग्लूकोज को कीटाणु अपने भोजन के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। दांतों और मंसूड़ों के बीच के हिस्से में घर बनाने लगते हैं, जिस वजह से दांत-मंसूड़ों में सड़न के साथ मुंह से बदबू आने लगती है। बार-बार ब्रश करने पर भी यह बदबू दूर नहीं होती। शोधकर्ता सलाह देते हैं कि मुंह की बदबू की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।
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