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Cat Que Virus: कोरोना महामारी के बीच चीन के एक और वायरस 'कैट क्यू' का खतरा, जानें पूरी अपडेट

Tue, 29 Sep 2020 03:13 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कैट क्यू वायरस का खतरा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
दुनिभार में कोरोना वायरस संक्रमण का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। चीन से फैले कोरोना वायरस से दुनिया उबर नहीं पाई है कि एक और चीनी वायरस के फैलने का खतरा मंडराता नजर आ रहा है। भारतीय वैज्ञानिकों ने चीन के एक और वायरस से फैलने वाले खतरे के प्रति आगाह किया है। कोरोना महामारी से जंग के बीच चीन के इस वायरस से देश में बीमारी होने की संभावना है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के वैज्ञानिकों ने एक और चीनी वायरस की खोज की है, जिससे देश में बीमारी फैल सकती है। इसका नाम कैट क्यू वायरस (CQV) है। एक तरफ तमाम प्रयासों के बावजूद कोरोना महामारी पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं हो पा रहा है और ऐसे में बीमारी पैदा करने की क्षमता रखने वाला नया वायरस चिंता बढ़ा सकता है।


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सूअरों में पाया जाने वाला वायरस एक और महामारी का कारण बन सकता है - फोटो : पेक्सेल्स
आईसीएमआर (ICMR) के वैज्ञानिकों ने कैट क्यू वायरस(CQV) नामक जिस वायरस की खोज की है, वह देश में बीमारी फैलाने की क्षमता रखता है। ये वायरस आर्थ्रोपोड-जनित वायरस की श्रेणी में आते हैं। ये क्यूलेक्स नामक मच्छरों के अलावा सूअर में भी पाए जाते हैं। खबरों के मुताबिक, चीन और वियतनाम में बड़े पैमाने पर लोग इस CQV वायरस से ग्रसित पाए जा रहे हैं। भारत में भी सीक्यूवी(CQV) से होने वाली बीमारी फैलने की संभावना है। 
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इस वायरस का संक्रमण फैला तो सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट हो सकता है - फोटो : Amar Ujala
भारत में दो लोगों के सिरम सैंपलों में एंटी-सीक्यूवी आईजीजी एंटीबॉडी (IGG Antibodies) मिली है। आईसीएमआर की मेडिकल पत्रिका आईजेएमआर के अनुसार, ये दोनों सैंपल कर्नाटक में साल 2014 और साल 2017 में लिए गए थे। आईसीएमआर के वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि इस वायरस का संक्रमण फैला तो सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट खड़ा हो सकता है। 

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भारतीय मच्छरों में CQV के व्यवहार को समझना जरूरी - फोटो : File
मच्छरों में सीक्यूवी(CQV)
दोनों व्यक्ति के सिरम सैंपल में एंटी सीसीक्यू आईजीजी एंटीबॉडी मिलने पर मच्छरों में सीक्यूवी(CQV) के रेप्लिकेशन यानी संख्या बढ़ाने की क्षमता की जांच की गई थी। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इससे संकेत मिलता है कि भारत में सीक्यूवी जनित बीमारी फैलने की संभावना है। ऐसे में रक्षात्मक कदम उठाया जाना जरूरी है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
वायरस के प्रसार के बारे में जानने के लिए अधिक से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग और सिरम सैंपलों की जांच की आवश्यकता है। आईसीएमआर के वैज्ञानिकों का कहना है कि सीक्यूवी वायरस का प्राथमिक होस्ट सूअर है और इसे फैलाने वाले मच्छरों का होना ध्यान दिलाता है कि भारत में ऑर्थोबुन्या वायरस से गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकता है। 
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भारतीय मच्छरों में इसके व्यवहार को समझना जरूरी - फोटो : File
आईसीएमआर ने कहा कि ह्यूमन सीरम के नमूनों में एंटी-सीवीसी मिलने के बाद भारतीय मच्छरों में इसके व्यवहार को समझने के लिए उनकी तीन अलग-अलग प्रजातियों की जांच की गई। इस जांच में पता चला कि भारत में पाए जाने वाले मच्छर वायरस के प्रति संवेदनशील हैं और आसानी से संक्रमित हो सकते हैं। ये मच्छर अन्य सूअर और मानवों में भी संक्रमण फैला सकते हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे में सीक्यूवी के लिए मॉलिक्यूलर और सेरोलॉजिकल जांच विकसित करने की जरूरत है। साथ ही लोगों के अलावा सूअरों की भी स्क्रीनिंग करने और मच्छरों में इसके रेप्लिकेशन की जांच की जरुरत महसूस की जा रही है। ऐसा इसलिए कि संकट गंभीर होने से पहले ही जरूरी तैयारियां की जा सके। 
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