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Covid-19: इस हफ्ते भी संक्रमण के मामले-मृतकों की संख्या में बढ़ोतरी, टेस्टिंग किट-दवाओं की भी मांग में इजाफा

Sat, 02 Sep 2023 12:01 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना के नए वैरिएंट्स का खतरा - फोटो : istock
कोरोना के नए वैरिएंट्स वैज्ञानिकों के लिए चिंता बढ़ा रहे हैं। ओमिक्रॉन के दो सब-वैरिएंट एरिस (EG.5.1) और पिरोला (BA.2.86) के कारण वैश्विक स्तर पर संक्रमण के मामले बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जा रहे हैं। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन वैरिएंट्स के कारण पिछले कुछ हफ्तों से संक्रमितों में मृत्युदर भी अधिक देखा जा रहा है।

कोरोना के मामलों को लेकर सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) हर हफ्ते आंकड़े जारी करती है। जारी किए गए हालिया आंकड़ों के मुताबिक यूएस में इस सप्ताह कोविड-19 के कारण अस्पताल में भर्ती होने की संख्या में 19% और मृत्यु के मामलों में 21% की वृद्धि हुई है। आधे से अधिक स्टेट्स में कोरोना के कारण संक्रमण की स्थिति में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि कोरोना के नए वैरिएंट्स की प्रकृति कई मामलों में चिंता बढ़ाने वाली है, इसमें अधिक म्यूटेशन देखे जा रहे हैं जो आसानी से उन लोगों में भी संक्रमण के जोखिम को बढ़ाते हुए देखे जा रहे हैं, जिनका टीकाकरण हो चुका है। वैरिएंट के कारण संक्रमण और मृत्यु के मामलों में ये बढ़ोतरी लगातार पांचवे सप्ताह भी जारी रही है।
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कोरोना के जोखिम कारक - फोटो : istock
संक्रमण के मामलों के बढ़ने का कारण

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन फ्रांसिस्को में संक्रामक रोग विशेषज्ञ, पीटर चिन-होंग कहते हैं, फिलहाल संक्रमण के मामलों के बढ़ने के लिए जिन दो कारकों को जिम्मेदार माना जा रहा है उनमें से एक नए म्यूटेटेड वैरिएंट्स की प्रकृति और दूसरी यहां सर्दियों की शुरुआत वाला मौसम है।

यह पिछले तीन वर्षों से पैटर्न रहा है, हर बार गर्मियों में संक्रमण के स्थिति काफी कंट्रोल हो जाती है जबकि सर्दियों में मामलों में बड़ी वृद्धि देखी जाती रही है। इसके अलावा वैरिएंट्स में म्यूटेशन भी बड़ा जोखिम है जिसको लेकर लगातार चिंता जताई जाती रही है। 
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कोरोना के जोखिम कारक - फोटो : istock
नए वैरिएंट्स को लक्षित करने वाले टीके

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ज्यादातर लोगों में वैक्सीनेशन और प्राकृतिक संक्रमण से शरीर में बनी प्रतिरक्षा भी कम हो गई है, पहले के टीके भी कोरोना के मूल वैरिएंट को लक्षित करके बनाया गए थे। अब नए वैरिएंट्स काफी म्यूटेटेड हैं और उनकी प्रकृति भी काफी बदल गई है, इसलिए नए और अपडेटेड टीकों की जरूरत हो रही है।

इस दिशा में कई कंपनियां काम भी कर रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि इस महीने के अंत तक नए वैरिएंट्स को लक्षित करने वाले खास टीके उपलब्ध होंगे। ओमिक्रॉन वैरिएंट्स के नए स्ट्रेनों से मुकाबले के लिए बूस्टर शॉट को सितंबर के अंत तक मंजूरी दी जा सकती है, इसे शुरुआती अध्ययनों में कारगर भी पाया गया है।

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नए वैरिएंट्स बढ़ा रहे हैं खतरा - फोटो : Istock
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

लॉस एंजेलिस काउंटी के सार्वजनिक स्वास्थ्य निदेशक बारबरा फेरर कहते हैं, "पिछले डेढ़ साल में केवल कुछ ही बार ऐसा हुआ है जब हमने कुशल नर्सिंग सुविधाओं के बावजूद संक्रमण की स्थिति में इतनी तेजी से इजाफा हुआ है। न्यूजर्सी के चार में से एक नर्सिंग होम में संक्रमण के मामलों में तेजी से उछाल देखा गया है। आलम ये है कि यहां टेस्टिंग किट्स और दवाओं की मांग भी काफी तेजी से बढ़ रही है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों से लगातार कोरोना से बचाव के लिए अपील कर रहे हैं। संक्रमण का बढ़ना वैरिएंट्स में म्यूटेशन के खतरे को भी बढ़ाने वाला हो सकता है। 
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कोरोना का नए वैरिएंट और उनके मामले - फोटो : istock
नए वैरिएंट्स ने बढ़ा दिया है खतरा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कोरोना के बढ़ते प्रसार के लिए तीन नए वैरिएंट्स ( EG.5, FL.1.5.1 और BA.2.86) को प्रमुख कारण के तौर पर देखा जा रहा है। सीडीसी के विशेषज्ञों के मुताबिक नए मामलों के लिए EG.5 को 21.5%, FL.1.5.1 को 14.5% और बीए.2.86 को 1% जिम्मेदार माना जा रहा है। जिन वैरिएंट्स में अधिक म्यूटेशन हैं उसके कारण संक्रमण की स्थिति और इसके कारण अधिक लोगों के चपेट में आने की आशंका अधिक देखी जा रही है।

कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है, इसके जोखिमों को लेकर सभी लोगों को लगातार सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। 



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स्रोत और संदर्भ
United States COVID-19 Hospitalizations, Deaths, Emergency Department (ED) Visits, and Test Positivity by Geographic Area

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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