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Study: कोरोनावायरस नहीं 99% मौतें इस वजह से, नए वैरिएंट्स से बचाव के लिए एक और बूस्टर डोज देने की तैयारी

Tue, 29 Aug 2023 12:12 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना और मौत के मामले - फोटो : istock
कोरोनावायरस वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिकों के लिए गंभीर चिंता का कारण बना हुआ है। नए वैरिएंट्स के कारण कई देशों में तेजी से संक्रमण के मामले बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जा रहे हैं। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक एरिस वैरिएंट के मामले 55 से अधिक देशों में रिपोर्ट किए जा चुके हैं, वहीं BA.2.86 वैरिएंट में अतिरिक्त म्यूटेशन देखे गए हैं जो इसे ओमिक्रॉन का अब तक का सबसे संक्रामक वैरिएंट बनाती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अस्पतालों में हाल के दिनों में तेजी से मरीजों की संख्या भी बढ़ी है, हालांकि गंभीर रोग के मामले कम देखे जा रहे हैं।

इस बीच एक हालिया रिपोर्ट में सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने बड़ा दावा किया है। सीडीसी विशेषज्ञों के मुताबिक हर सप्ताह रिपोर्ट की जाने वाली लगभग 99 प्रतिशत 'कोविड मौतें' मुख्यरूप से वायरस के कारण नहीं हो रही हैं। कोविड डैशबोर्ड से पता चलता है कि 19 अगस्त को समाप्त सप्ताह में दर्ज की गई 324 कोविड मौतों में से केवल 1.7 प्रतिशत ही मौतों का प्राथमिक कारण कोरोनोवायरस था।

अगर वायरस मौत का कारण नहीं तो इसके पीछे की मुख्य वजह क्या है, आइए इस बार में जानते हैं। 
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कोरोना के कारण गंभीर रोग विकसित होने का खतरा - फोटो : istock
मृत्यु का कारण वायरस नहीं तो क्या?

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कोविड-19 रोगियों में मृत्यु का प्राथमिक या अंतर्निहित कारण संक्रमण में होने वाली जटिलताओं को पाया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक जिन लोगों को पहले से ही कोई स्वास्थ्य समस्या जैसे हृदय रोग आदि है, उनमें वायरस का संक्रमण बहुत अधिक दबाव और तनाव बढ़ा सकता है।

यूके जैसे देशों में रिपोर्ट किए जा रहे मौत के ज्यादातर मामलों में ऐसे लोगों में कोरोनावायरस को मौत का सेकेंडरी कारण, जबकि मौजूद हृदय रोग को प्राथमिक कारण माना गया है। 
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नए वैरिएंट्स के जोखिम कारक - फोटो : PTI
महिलाओं में मृत्युदर अधिक

रिपोर्ट के मुताबिक 19 अगस्त को समाप्त सप्ताह में कोविड से होने वाली मौतों का प्रतिशत, पिछले सप्ताह की तुलना में थोड़ी बढ़ी है। पिछले पांच सप्ताह से मौत के आंकड़ों के बढ़ने के ये ट्रेंड जारी है। कोरोना संक्रमण के कारण हो रही मौतों को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि जिस प्रकार से मौजूदा वायरस की प्रकृति है, यह गंभीर रोग का कारण बनते हुए कम देखी जा रही है, पर पहले से ही कोमोरबिडिटी के शिकार या फिर जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है उनमें रोग के गंभीर रूप लेने और मौत का खतरा अधिक हो सकता है। 

आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में मृत्यु दर थोड़ी अधिक है। 75 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोग भी संक्रमण का स्थिति में मौत के शिकार अधिक हो रहे हैं।

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कोरोना के नए वैरिएंट्स के कारण बढ़ता खतरा - फोटो : Pixabay
तेजी से बढ़ रहे हैं नए वैरिएंट्स के मामले

सीडीसी की रिपोर्ट के मुताबिक कई देशों में कोरोना के नए वैरिएंट EG.5 और BA.2.86 के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अस्पतालों में बढ़ती संक्रमितों की भीड़ को देखते हुए अमेरिका के कुछ स्टेट्स में दोबारा कोरोना से संबंधित कुछ प्रतिबंधों और मास्क को जरूरी कर दी गई है।

अध्यनकर्ताओं ने बताया कि ये नए वैरिएंट अत्यधिक म्यूटेटेड हैं और टीके तथा प्राकृतिक प्रतिरक्षा को बेहतर तरीके से चकमा देने में सफल हो रहे हैं, ऐसे में इनसे संक्रमण का खतरा सभी लोगों को हो सकता है। इस स्थिति में बचाव के उपायों को लेकर प्रयास करते रहना बहुत आवश्यक हो जाता है। 
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नए वैरिएंट्स के लक्षित करने वाली बूस्टर खुराक - फोटो : Istock
एक और बूस्टर डोज देने की तैयारी

नए वैरिएंट्स के बढ़ते जोखिमों को देखते हुए अमेरिकी सरकार आने वाले हफ्तों में लोगों को एक और बूस्टर डोज लेने की सिफारिश कर सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि जिस तरह से कोरोना के नए वैरिएंट्स के कारण खतरा बढ़ता जा रहा है और ये वैरिएंट्स प्रतिरक्षा को आसानी से चकमा देने में सफल हो रहे हैं ऐसे में प्रशासन आने वाले हफ्तों में अमेरिकियों को एक और कोविड बूस्टर वैक्सीन प्राप्त करने की कर सकता है।

हालांकि बूस्टर वैक्सीन के लिए कौन से टीके दिए जाएंगे इसको लेकर कोई जानकारी साझा नहीं की गई है। 



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स्रोत और संदर्भ
August 19, Covid was primary cause in just 1.7% of virus deaths

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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