फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

New Coronavirus Test: फूंक मारते ही पता चलेगा- आपको कोरोना है या नहीं, 90 फीसदी सटीक परिणाम का दावा

Wed, 21 Oct 2020 06:34 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
New Coronavirus Test - फोटो : Twitter@NUS
कोरोना वायरस से जारी जंग में शुरुआत से ही सबसे बड़ी चुनौती या सबसे बड़ा कदम 'इसकी ज्यादा से ज्यादा जांच किया जाना' बताया जाता रहा है। महामारी के शुरुआती महीनों में इसके जांच के लिए ज्यादा विकल्प मौजूद नहीं थे और सरकारों को कोरोना किट की कमी से भी जूझना पड़ा था। वहीं, अब कोरोना की जांच के लिए नए से नए तरीके और नई मशीनें सामने आ रही हैं। ऐसी ही एक नई तकनीक सिंगापुर में विकसित की गई है, जिसके जरिए कोरोना की जांच फूंक मारकर भी हो सकेगी। बताया जा रहा है कि इसके जरिए सांस में मौजूद ऑर्गेनिक कम्पाउंड से कोरोना वायरस की मौजूदगी का पता चल सकेगा। इस जांच में एक मिनट से भी कम समय लगेगा और इस टेस्ट का रिजल्ट भी 90 फीसदी सटीक होने का दावा किया जा रहा है। 
विज्ञापन

2 of 5
Coronavirus Test - फोटो : Twitter@NUS
खबरों के मुताबिक, सिंगापुर में ऐसा कोविड-19 टेस्ट विकसित किया गया है, जिसके जरिए संदिग्ध व्यक्ति के फूंक मारने के बाद उसके कोरोना पॉजिटिव या निगेटिव होने का पता लगाया जा सकेगा। सिंगापुर की नेशनल यूनिवर्सिटी के मुताबिक कोरोना जांच की यह नई तकनीक एक मिनट के अंदर सांस के जरिए कोरोना वायरस का पता लगाता है। जांच के दौरान, व्यक्ति की सांस में मौजूद वाष्पशील ऑर्गेनिक कम्पाउंड का पता लगाया जाता है, जो बताते हैं उसमें वायरस है या नहीं।
विज्ञापन

3 of 5
Coronavirus Test - फोटो : ANI
इस नए तरीके में कोविड पॉजिटिव या निगेटिव का पता लगाने के लिए संदिग्ध व्यक्ति को ब्रीथ सैंपलर में केवल फूंक मारनी होती है। जब व्यक्ति ब्रीथ सैंपलर में अपने मुंह से हवा डालता है तो यह हवा मास स्पेक्ट्रोमीटर में जमा हो जाती है। इसमें हवा में मौजूद कणों का विश्लेषण किया जाता है और एक मिनट के अंदर पता चल जाता है कि व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव है या निगेटिव। 

4 of 5
कोरोना वायरस - फोटो : Amar Ujala
इस नई तकनीक पर शोध करने वाली नेशनल यूनिवर्सिटी का दावा है कि इस नए तरीके से 180 मरीजों की जांच की जा चुकी है और यह 90 फीसदी से ज्यादा सटीक परिणाम बताता है। इस स्टार्टअप के सीईओ डू फैंग कहते हैं, ब्रीथ सैम्पलर में लगा माउथपीस डिस्पोजेबल है। यह एकतरफा काम करता है। एक बार इसमें फूंक मारने पर मुंह से निकली हवा वापस मुंह में नहीं जाती। और न ही इसमें से लार मुंह में वापस आती है क्योंकि मशीन में वन-वे वाल्व और सेलाइवा ट्रैप लगा हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI

जांच की नई तकनीक विकसित करने वाले स्टार्टअप ब्रीथॉनिकस की सीईओ डॉ. जिया झूनान के मुताबिक, अलग-अलग बीमारियां होने पर सांस में अलग-अलग बदलाव होते हैं। इसलिए मुंह से छोड़ी गई हवा में पाए जाने वाले वाष्पशील आर्गेनिक कम्पाउंड्स में होने वाले बदलाव से कोरोना वायरस का पता लगाया जा रहा है। उनके मुताबिक, कोरोना वायरस की जांच के लिए यह बढ़िया तकनीक है। 

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें