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Health Risk: 60 की उम्र के बाद शरीर में दिखें ये लक्षण तो समझ लें मंडरा रहा इस बड़ी बीमारी का खतरा

Tue, 19 May 2026 12:09 PM IST
Shruti Gaur हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Blood Clotting Symptoms: 60 की उम्र के बाद अक्सर शरीर में कुछ न कुछ दिक्कतें होती हैं। ऐसे में अपने शरीर में दिखने वाले इन संकेतों को कभी भी नजरअंदाज न करें। 
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बुजुर्गों में दिखे ये लक्षण तो समझें खतरे की घंटी - फोटो : AI
Blood Clotting Symptoms: 60 की उम्र के बाद शरीर में ब्लड क्लॉट यानी खून के थक्के बनने का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। यह स्थिति तब होती है जब नसों या धमनियों में खून जमने लगता है और ब्लड फ्लो प्रभावित हो जाता है। ब्लड क्लॉट शरीर के किसी भी हिस्से में बन सकता है, लेकिन पैरों, फेफड़ों और दिल में इसका खतरा सबसे ज्यादा होता है। 

अगर समय रहते इसके संकेतों को पहचान लिया जाए, तो गंभीर परेशानियों से बचा जा सकता है। कई लोग पैरों में सूजन, दर्द या सांस फूलने जैसे लक्षणों को सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही संकेत ब्लड क्लॉट की ओर इशारा कर सकते हैं। 

यह समस्या आगे चलकर हार्ट अटैक, स्ट्रोक और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है। इसलिए खासकर बुजुर्गों को ब्लड क्लॉट के लक्षणों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।
 
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बुजुर्गों में दिखे ये लक्षण तो समझें खतरे की घंटी - फोटो : Adobe stock
ब्लड क्लॉट के प्रमुख लक्षण

1. पैरों में सूजन और दर्द

ब्लड क्लॉट का सबसे आम लक्षण पैरों में दिखाई देता है। अगर एक पैर में अचानक सूजन आ जाए, दर्द महसूस हो या चलते समय भारीपन लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार मरीज को पैर में ऐंठन या खिंचाव जैसा दर्द भी महसूस होता है। यह स्थिति डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) का संकेत हो सकती है, जिसमें नसों के अंदर खून का थक्का जमने लगता है।

 
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बुजुर्गों में दिखे ये लक्षण तो समझें खतरे की घंटी - फोटो : AI
 2. त्वचा का रंग बदलना

जिस हिस्से में ब्लड क्लॉट बनता है, वहां की त्वचा का रंग बदल सकता है। त्वचा लाल, नीली या बैंगनी दिखाई देने लगती है और छूने पर सामान्य से ज्यादा गर्म महसूस हो सकती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि खून का प्रवाह प्रभावित होने लगता है। अगर यह लक्षण लगातार दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

 

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बुजुर्गों में दिखे ये लक्षण तो समझें खतरे की घंटी - फोटो : AI
3. अचानक सांस फूलना

अगर बिना ज्यादा मेहनत किए सांस लेने में दिक्कत होने लगे या अचानक सांस फूलने लगे, तो यह गंभीर संकेत हो सकता है। कई बार ब्लड क्लॉट फेफड़ों तक पहुंच जाता है, जिसे पल्मोनरी एम्बोलिज्म कहा जाता है। यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है और इसमें तुरंत इलाज की जरूरत पड़ती है।

 
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बुजुर्गों में दिखे ये लक्षण तो समझें खतरे की घंटी - फोटो : Adobe Stock Photo
4. सीने में दर्द

ब्लड क्लॉट की वजह से सीने में तेज दर्द, जकड़न या दबाव महसूस हो सकता है। यह दर्द सांस लेने या खांसने पर बढ़ सकता है। कई लोग इसे गैस या सामान्य दर्द समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह हार्ट या फेफड़ों से जुड़ी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।

 
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बुजुर्गों में दिखे ये लक्षण तो समझें खतरे की घंटी - फोटो : AI
5. चक्कर और कमजोरी

जब शरीर में ब्लड फ्लो सही तरीके से नहीं हो पाता, तो ऑक्सीजन की सप्लाई प्रभावित होने लगती है। इसकी वजह से व्यक्ति को बार-बार चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कई बार मरीज को अचानक बेहोशी जैसा भी महसूस होता है।

 
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बुजुर्गों में दिखे ये लक्षण तो समझें खतरे की घंटी - फोटो : Adobe Stock Images
 6. दिल की धड़कन तेज होना

ब्लड क्लॉट बनने पर शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। ऐसे में हार्टबीट तेज हो सकती है, घबराहट महसूस हो सकती है और बेचैनी बढ़ सकती है। अगर यह समस्या अचानक और बार-बार हो रही है, तो तुरंत मेडिकल जांच करानी चाहिए।

 

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बुजुर्गों में दिखे ये लक्षण तो समझें खतरे की घंटी - फोटो : Adobe Stock
ब्लड क्लॉट का खतरा किन लोगों में ज्यादा?
 
  •  60 साल से ज्यादा उम्र के लोग
  • हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज के मरीज
  •  लंबे समय तक बैठे रहने वाले लोग
  •  मोटापे से परेशान लोग
  • धूम्रपान करने वाले

 
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ब्लड क्लॉट से बचाव के तरीके
 
  •  रोजाना हल्की एक्सरसाइज करें
  •  लंबे समय तक लगातार न बैठें
  • भरपूर पानी पिएं
  •  हेल्दी डाइट लें
  • वजन कंट्रोल में रखें
  •  नियमित हेल्थ चेकअप कराएं
 
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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