मोटापा अब सिर्फ शरीर का वजन बढ़ने की बात नहीं रह गया है। यह धीरे-धीरे ऐसी स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है, जिसकी चिंता पूरी दुनिया कर रही है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। खराब जीवनशैली, घंटों बैठे रहना, जंक फूड्स और कोल्ड ड्रिंक के अलावा शारीरिक गतिविधि की कमी ने लोगों में वजन बढ़ने के साथ कई बीमारियों का खतरा भी बढ़ा दिया है।
भारत में मोटापे की तस्वीर कितनी तेजी से बदल रही है, इसका अंदाजा आंकड़ों से लगाया जा सकता है।
साल 2022 में प्रकाशित लैंसेट के एक अध्ययन के मुताबिक, भारत में करीब 4.4 करोड़ महिलाएं और 2.6 करोड़ पुरुष मोटापे की समस्या से जूझ रहे थे। चिंता की बात यह है कि मोटापे की मौजूदा रफ्तार अगर इसी तरह जारी रही तो आने वाले वर्षों में यह संख्या और तेजी से बढ़ सकती है।
मोटापे की समस्या अब सिर्फ बड़ों तक सीमित नहीं है। बच्चे और किशोर भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। मेडिकल रिपोर्टों के मुताबिक, मोटापे से प्रभावित बच्चों की संख्या के मामले में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर है। अनुमान है कि देश में करीब 8.4 प्रतिशत बच्चे मोटापे से प्रभावित हैं। बचपन में बढ़ता वजन आगे चलकर डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है।