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Children vaccination: देश में बच्चों के टीकाकरण को लेकर सामने आई चौंकाने वाली रिपोर्ट, WHO ने जताई चिंता

Tue, 16 Jul 2024 07:35 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बच्चों का टीकाकरण - फोटो : freepik.com
जीवनभर कई गंभीर बीमारियों और संक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए सभी बच्चों का टीकाकरण कराना जरूरी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पहले दो वर्षों के दौरान बच्चों को अधिकांश टीकों की पहली खुराक मिलनी चाहिए। भारत में 'इंडियाज यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोगाम' के तहत सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली के माध्यम से बच्चों को 12 अलग-अलग टीके निःशुल्क प्रदान किए जाते हैं। इसमें  बीसीजी, ओपीवी, हेपेटाइटिस बी, पेंटावेलेंट, रोटावायरस वैक्सीन, डीपीटी और टीटी जैसे टीके शामिल हैं। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में देश में बच्चों के टीकाकरण की रफ्तार में काफी कमी देखी जा रही है।

इसी से संबंधित यूनिसेफ और डब्ल्यूएचओ की हालिया रिपोर्ट चिंता बढ़ाने वाली है। इसके मुताबिक भारत में साल 2023 में कोई भी टीका न लगवाने वाले बच्चों की संख्या करीब 16 लाख है। नाइजीरिया के बाद भारत दूसरा ऐसा देश है जहां 2023 में सबसे ज्यादा बच्चों को कोई भी टीका नहीं लगा। साल 2023 में नाइजीरिया में सबसे ज्यादा  21 लाख बच्चे ऐसे थे जिनका कोई भी वैक्सीनेशन नहीं हुआ था।
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बच्चों का टीकाकरण - फोटो : freepik.com
16 लाख बच्चों का नहीं हो पाया टीकाकरण

यूनिसेफ और डब्ल्यूएचओ की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक साल 2021 की तुलना में 2023 में टीकाकरण में सुधार तो हुआ है पर ये अब भी गंभीर विषय है। साल 2021 में 27.3 लाख बच्चों को एक भी टीका नहीं लगा था जोकि 2023 में घटकर 16 लाख रह गया है। भारत के बाद अन्य देश जहां 2023 में जीरो-डोज वैक्सीन के मामले रिकॉर्ड किए गए हैं उनमें इथियोपिया, कांगो, सूडान और इंडोनेशिया शामिल हैं।

गौरतलब है कि चीन शीर्ष 20 शून्य-खुराक वाले देशों की सूची में 18वें स्थान पर है, जबकि पाकिस्तान 10वें स्थान पर है।
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बच्चों का टीकाकरण - फोटो : freepik.com
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जताई चिंता

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मंगलवार को दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के देशों से सभी स्तरों पर प्रयासों को और मजबूत करने का आह्वान किया है जिससे ऐसे बच्चों की पहचान करके उनका टीकाकरण कराया जा सके। विशेषज्ञों ने कहा, टीकाकरण से वंचित और कम टीकाकरण वाले बच्चों की बढ़ती संख्या पर तत्काल और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता है। हमें यह पता लगाने की आवश्यकता है कि ये बच्चे कहां और क्यों छूट गए हैं। जल्द से जल्द उन तक पहुंचने को प्राथमिकता देनी चाहिए।

डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय निदेशक साइमा वाजेद ने कहा, घातक बीमारियों से बचाने के लिए सुरक्षित और प्रभावी टीके मौजूद हैं, बच्चों को जीवनभर के लिए सुरक्षित रखने के लिए वैक्सीनेशन जरूरी है।
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बच्चों का टीकाकरण - फोटो : ANI (File)
खसरा से वंचित रह गए लाखों बच्चे 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चों को शुरुआती टीके न मिलने से भविष्य में उनमें कई संक्रामक बीमारियों का जोखिम हो सकता है। इस साल की शुरुआत में आई कई रिपोर्टस में चिंता जताई जा रही थी कि कोरोना  महामारी के दौरान बढ़े स्वास्थ्य दबाव के चलते बच्चों में टीकाकरण काफी प्रभावित हुआ था, जिसके कारण भारत, अमेरिका सहित कई देशों में बच्चों में खसरा रोग के मामले काफी तेजी से बढ़ते जा रहे हैं।

डब्ल्यूएचओ और यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023 में भारत में खसरा-नियंत्रित टीके की पहली खुराक (एमसीवी1) न लगवाने वाले बच्चों की संख्या 16 लाख के करीब थी। इससे पहले 2022 में भारत में अनुमानित 11 लाख बच्चे खसरे के टीके की अपनी महत्वपूर्ण पहली खुराक लेने से चूक गए। यह भारत को उन 10 देशों में शामिल करता है जहां ऐसे बच्चों की संख्या सबसे अधिक है जिन्हें पहला टीका नहीं मिला। 



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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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