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Nautapa & Heatwave: गर्मी और ह्यूमिडिटी का सेहत पर डबल अटैक, दो वरिष्ठ डॉक्टरों ने दी जरूरी सलाह

Sat, 30 May 2026 07:39 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली-एनसीआर में जारी भीषण गर्मी के बीच ओपीडी में बुखार, लो बीपी और हीट स्ट्रोक के लक्षण वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। डॉक्टर कहते हैं, गर्मी के साथ बढ़ती ह्यूमिडिटी सेहत के लिए और भी मुश्किलें बढ़ाती जा रही है। इसपर देश के जाने-माने डॉक्टरों ने जरूरी सलाह दी है।
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हीट स्ट्रोक का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में नौतपा का असर लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। कई इलाकों में तापमान पहले ही 45 डिग्री सेल्सियस को पार कर चुका है। गुरुवार को दिल्ली-नोएडा सहित कई स्थानों पर हुई बारिश के चलते तापमान में थोड़ी गिरावट जरूर आई है, पर 2 जून तक रहने वाले नौतपा और भीषण गर्मी का खतरा लगातार बना हुआ है।

दिल्ली के अस्पतालों से मिल रही जानकारियों के मुताबिक ओपीडी में बुखार, लो बीपी और हीट स्ट्रोक के लक्षण वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। खासकर बुजुर्ग, बच्चे, गर्भवती महिलाएं, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज के मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक तापमान बढ़ने की स्थिति में शरीर का प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम यानी पसीना के जरिए शरीर को ठंडा रखने की प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है, जिससे शरीर के भीतर तापमान बढ़ने लगता है। इसका कई अंगों पर नकारात्मक असर हो सकता है।

डॉक्टर कहते हैं, लंबे समय तक तेज धूप में रहने, पानी कम पीने और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी से  शरीर में ‘हीट लोड’ बढ़ता जाता है। ये स्थिति लिवर-किडनी सहित कई अंगों को नुकसान पहुंचाने वाली हो सकती है। बढ़ती गर्मी और इससे होने वाले खतरों को लेकर देश के दो जाने-माने डॉक्टरों ने जरूरी सलाह दी है, जिसे जानना सभी के लिए बहुत जरूरी है।
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बढ़ती गर्मी और हीट स्ट्रोक का खतरा - फोटो : Adobe stock
ह्यूमिडिटी बढ़ा रही दिक्कतें

इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स में जेरियाट्रिक मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट, डॉ. प्रसून चटर्जी कहते हैं, कई बार तापमान भले ही 35 डिग्री हो, लेकिन लू की वजह से यह 50 डिग्री जैसा महसूस होता है। इसका मुख्य कारण ह्यूमिडिटी है। ये स्थिति पहले इतनी आम नहीं थी, लेकिन अब पर्यावरण में बदलाव के चलते इसका जोखिम अधिक देखा जा रहा है।

 
 
  • जब ह्यूमिडिटी का स्तर ज्यादा होता है, तो भले ही शरीर अंदर से गर्म हो रहा हो फिर से पसीना ठीक से नहीं निकल पाता। 
  • यहां तक कि रात में भी तापमान बहुत ज्यादा रहता है। ऐसे में शरीर को ठंडा होने या अंदर की गर्मी निकालने का मौका ही नहीं मिल पाता। 
  • जब शरीर के अंदर गर्मी बढ़ती जाती है, तो इसका हर अंग पर असर पड़ता है। ये स्थिति जानलेवा समस्याओं का भी कारण बन सकती है।
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गर्मी के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Adobe Stock Photo
ब्लड प्रेशर और किडनी को गंभीर खतरा

ह्यूमिडिटी ज्यादा होने और शरीर की गर्मी बढ़ने का सबसे ज्यादा असर दिमाग पर पड़ता है। आपका दिल, ब्लड प्रेशर और किडनी के लिए भी खतरे बढ़ जाते हैं। 
 
  • बुजुर्गों में एक बड़ी समस्या यह होती है कि उन्हें पसीना कम आता है। जब भी नमी बढ़ती है और पसीना ज्यादा आता है तो ये स्थिति गंभीर रूप से डिहाइड्रेशन का खतरा भी बढ़ा देती है।
  • बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन जानलेवा स्थिति भी बन सकती है। किडनी पर इसका सबसे ज्यादा असर होता है।
  • यही कारण है कि हम किडनी फेलियर के कई मामले देख रहे हैं।

डॉ चटर्जी कहते हैं, इस तरह के खतरों से बचने के लिए खूब तरल पदार्थ लेते रहें। इसके साथ ही आपको सोडियम का भी सेवन करना चाहिए। लोगों को थोड़ा-थोड़ा करके, बार-बार खाना खाना चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि कई खाद्य पदार्थों खासकर फलों में पानी की काफी मात्रा होती है। इससे शरीर में पानी की कमी को रोका जा सकता है।

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भीषण गर्मी सेहत के लिए बढ़ा सकती है मुश्किलें - फोटो : Freepik.com
ओपीडी में बढ़ रहे मरीज, लू से बचने की सलाह

वहीं इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स के सीनियर कंसल्टेंट-गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, डॉ. सुदीप खन्ना कहते हैं बीते हफ्तों बढ़ी गर्मी के कारण अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। 
 
  • थकान, कमजोरी, दस्त, उल्टी, बुखार और पेट दर्द जैसे लक्षणों के साथ कई मरीज इमरजेंसी डिपार्टमेंट और ओपीडी में पहुंच रहे हैं।
  •  लंबे समय तक धूप में रहने वालों में इस तरह का खतरा ज्यादा देखा जा रहा है। 
 


गर्मी और इसके कारण होने वाली समस्याओं से बचने के लिए, दोपहर के समय बाहर जाने से बचें। सुबह जल्दी या देर शाम को बाहर निकलना बेहतर रहेगा। हमेशा अपने साथ पानी रखें और अगर डॉक्टर ने मना न किया हो, तो पानी में नमक और चीनी मिला लें। हल्के कपड़े पहनें और सीधी धूप से बचने के लिए छाते का इस्तेमाल करें। 

गंभीर मामलों में, हीट स्ट्रोक (लू) का खतरा हो सकता है, जिससे भ्रम, बेहोशी और जानलेवा बीमारी की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे मामलों में तुरंत डॉक्टरी मदद लेना बहुत जरूरी हो जाता है।
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गर्मी से बचाव के उपाय करें - फोटो : Adobe stock
थोड़ी सी सावधानी बचा सकती है जान

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं इन दिनों खानपान को लेकर सावधानी बहुत जरूरी है।
 
  • गर्मी में बहुत ज्यादा मसालेदार, तला-भुना और भारी भोजन शरीर की गर्मी बढ़ा सकता है। 
  • इसके बजाय तरबूज, खीरा, खरबूजा, दही, छाछ और मौसमी फलों का सेवन फायदेमंद माना जाता है।
  • ओआरएस, नारियल पानी, नींबू पानी और छाछ जैसी चीजें शरीर में फ्लूइड बैलेंस बनाए रखने में मदद करती हैं।
  • कैफीन और अल्कोहल जैसी चीजें शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकती हैं। इसलिए गर्मी में इनका सेवन सीमित रखना चाहिए। 

अगर किसी व्यक्ति को बहुत ज्यादा पसीना आ रहा हो, त्वचा गर्म लग रही हो और कमजोरी महसूस हो रही हो तो यह शरीर में बढ़ती हीट का संकेत हो सकता है। यह मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है। ऐसे में तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी है। सही खानपान, पर्याप्त पानी और समय रहते सावधानी अपनाकर हीटवेव के गंभीर खतरों से काफी हद तक बचा जा सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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