रोटावायरस वैक्सीन से डायरिया का कम होता है खतरा
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स्वस्थ आदतों का मिल रहा परिणाम
मंत्रालय ने इस सुधार का श्रेय नेशनल हेल्थ मिशन के तहत किए गए प्रयासों को दिया, जिसमें यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम और स्टॉप डायरिया कैंपेन भी शामिल हैं। इस अभियान के तहत, आशा, एएनएम और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता लोगों को जागरूक करती हैं।
दस्त के मामलों में कमी लाने को लेकर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस) और जिंक सप्लीमेंट के उपयोग, स्तनपान, साबुन से हाथ धोने, पोषण जागरूकता और बीमारी के शुरुआती लक्षणों पर ही इलाज कराने की आदत को बढ़ावा दिया है।
स्वच्छ पीने के पानी ने दूर किया खतरा
मंत्रालय ने कहा, जागरूकता बढ़ाने को लेकर किए जाए रहे इन लगातार प्रयासों ने दस्त की रोकथाम को सामुदायिक स्तर पर मजबूत किया है, खासकर ग्रामीण और उन क्षेत्रों में जहां स्वास्थ्य सेवाएं कम उपलब्ध हैं।
- मंत्रालय ने ग्रामीण भारत में सुरक्षित पेयजल तक पहुंच बेहतर बनाने में 'जल जीवन मिशन' की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
- आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में घरों में नल के पानी की सुविधा (टैप कनेक्शन) की पहुंच 2019 के 17 प्रतिशत से बढ़कर 81 प्रतिशत हो गई है।
- इससे 15.85 करोड़ घरों और 5.91 लाख से अधिक गांवों को लाभ पहुंचा है।
- मंत्रालय ने कहा कि टीकाकरण, दस्त प्रबंधन, स्वच्छता को बढ़ावा, पोषण, साफ-सफाई और सुरक्षित पेयजल को मिलाकर बनाया गया एकीकृत दृष्टिकोण भारत को बाल स्वास्थ्य से जुड़े सतत विकास लक्ष्य के लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ने में मदद कर रहा है।