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NFHS-6: बच्चों की मौत की बड़ी वजह पर लगा कंट्रोल, सरकार ने साझा किए ताजा आंकड़े

Fri, 29 May 2026 08:02 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पांच साल से कम उम्र के बच्चों में गंभीर दस्त की घटनाएं एनएफएचएस-5 में 0.7 प्रतिशत से घटकर एनएफएचएस-6 में 0.5 प्रतिशत हो गईं। गंभीर दस्त विश्व स्तर पर 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में मौत का तीसरा सबसे बड़ा कारण रहा है।
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डायरिया से बच्चों में मौत का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
डायरिया यानी दस्त की समस्या छोटे बच्चों में काफी आम है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक ये दुनियाभर में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में मौत का एक बड़ा कारण है। हर साल लगभग 3.70 लाख से 4.46 लाख बच्चों की जान डायरिया की वजह से चली जाती है। गंभीर दस्त के दौरान शरीर से अत्यधिक तरल पदार्थ निकल जाने की वजह से होने वाला गंभीर डिहाइड्रेशन और कुपोषण इसका बड़ा कारण है। अच्छी बात यह है कि कुछ बुनियादी उपायों से इन मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

भारत ने इस दिशा में बड़ी सफलता पाई है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 (एनएफएचएस-6) के अनुसार, भारत में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में गंभीर दस्त के मामलों में कमी दर्ज की गई है। टीकाकरण में सुधार और घरों तक सुरक्षित पेयजल की बढ़ती पहुंच ने बच्चों के स्वास्थ्य सुधार में योगदान दिया है। 

इसे बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है। इस सुधार ने बच्चों की मृत्युदर को भी कम करने में मदद की है।
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बच्चों में दस्त के मामलों में कमी - फोटो : Freepik.com
गंभीर दस्त के मामलों और मृत्युदर में कमी 

स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों में गंभीर दस्त की घटनाएं एनएफएचएस-5 में 0.7 प्रतिशत से घटकर एनएफएचएस-6 में 0.5 प्रतिशत हो गईं। वहीं, 12-23 माह के बच्चों में रोटावायरस वैक्सीन की तीनों खुराक का कवरेज 36.4 प्रतिशत से बढ़कर 85.4 प्रतिशत हो गया।

गौरतलब है कि रोटावायरस शिशुओं और छोटे बच्चों में गंभीर दस्त और डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) के प्रमुख कारणों में से एक है। वैक्सीनेशन की मदद से इसके संक्रमण को कम किया जा सकता है।
 
  • मंत्रालय ने आगे बताया कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में भी 38 प्रतिशत की कमी आई है। 
  • यह 2014 में प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 45 से घटकर 2024 में प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 28 हो गई है। 
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रोटावायरस वैक्सीन से डायरिया का कम होता है खतरा - फोटो : Freepik.com
स्वस्थ आदतों का मिल रहा परिणाम

मंत्रालय ने इस सुधार का श्रेय नेशनल हेल्थ मिशन के तहत किए गए प्रयासों को दिया, जिसमें यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम और स्टॉप डायरिया कैंपेन भी शामिल हैं। इस अभियान के तहत, आशा, एएनएम और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता लोगों को जागरूक करती हैं।

दस्त के मामलों में कमी लाने को लेकर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस) और जिंक सप्लीमेंट के उपयोग, स्तनपान, साबुन से हाथ धोने, पोषण जागरूकता और बीमारी के शुरुआती लक्षणों पर ही इलाज कराने की आदत को बढ़ावा दिया है। 


स्वच्छ पीने के पानी ने दूर किया खतरा

मंत्रालय ने कहा, जागरूकता बढ़ाने को लेकर किए जाए रहे इन लगातार प्रयासों ने दस्त की रोकथाम को सामुदायिक स्तर पर मजबूत किया है, खासकर ग्रामीण और उन क्षेत्रों में जहां स्वास्थ्य सेवाएं कम उपलब्ध हैं।
 
  • मंत्रालय ने ग्रामीण भारत में सुरक्षित पेयजल तक पहुंच बेहतर बनाने में 'जल जीवन मिशन' की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। 
  • आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में घरों में नल के पानी की सुविधा (टैप कनेक्शन) की पहुंच 2019 के 17 प्रतिशत से बढ़कर 81 प्रतिशत हो गई है।
  •  इससे 15.85 करोड़ घरों और 5.91 लाख से अधिक गांवों को लाभ पहुंचा है। 
  • मंत्रालय ने कहा कि टीकाकरण, दस्त प्रबंधन, स्वच्छता को बढ़ावा, पोषण, साफ-सफाई और सुरक्षित पेयजल को मिलाकर बनाया गया एकीकृत दृष्टिकोण भारत को बाल स्वास्थ्य से जुड़े सतत विकास लक्ष्य के लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ने में मदद कर रहा है।
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डायरिया से बचाव के लिए हाथों की साफ सफाई जरूरी - फोटो : Freepik.com
बच्चों को डायरिया से बचाने के लिए क्या करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, साफ-सफाई और सुरक्षित खानपान की मदद से डायरिया से बचाव किया जा सकता है। 
 
  • हाथ धोने की आदत बच्चों में डायरिया के खतरे को काफी कम कर सकती है। 
  • खाना खाने से पहले, टॉयलेट के बाद और बच्चे को खाना खिलाने से पहले साबुन से हाथ धोना बेहद जरूरी है।
  • साफ और उबला हुआ पानी बच्चों को देना चाहिए। 
  • खुले में रखा खाना, कटा हुआ फल और गंदे बर्तनों में रखा भोजन संक्रमण का खतरा बढ़ा सकता है। 
  • रोटावायरस वैक्सीन को बच्चों में गंभीर डायरिया से बचाव के लिए काफी प्रभावी माना जाता है। भारत के यूनिवर्सल इम्युनाइजेशन प्रोग्राम में भी यह वैक्सीन लगाई जाती है। 
  • इससे गंभीर दस्त के जोखिमों और अस्पताल में भर्ती होने के खतरे को रोका जा सकता है।


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स्रोत: 
union Health Ministry Releases National Family Health Survey – 6


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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