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National Cancer Awareness Day 2024: किसी को भी हो सकता है कैंसर, इन तीन कारणों को डॉक्टर्स ने माना जिम्मेदार

Thu, 07 Nov 2024 11:25 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत में कैंसर की रोकथाम, शुरुआती पहचान और उपचार के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 7 नवंबर को राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस मनाता है।आइए उन कारणों के बारे में जानते हैं जिन्हें कैंसर के लिए जिम्मेदार माना जाता रहा है?
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कैंसर से बचाव - फोटो : Freepik.com
कैंसर दुनियाभर में तेजी से बढ़ती समस्या है। हर साल लाखों लोगों की मौत कैंसर के कारण हो जाती है। इनमें से कई कैंसर ऐसे हैं जिन्हें रोका जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इसके लिए कम उम्र से ही निरंतर प्रयास करते रहने की आवश्यकता होती है। जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को कैंसर रहा है उन्हें और भी अलर्ट रहना चाहिए।

भारत में कैंसर की रोकथाम, शुरुआती पहचान और उपचार के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 7 नवंबर को राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस मनाता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2014 में इसकी शुरुआत की थी। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हमारी दिनचर्या और खानपान की कई ऐसी गड़बड़ आदतें हैं जो कैंसर के खतरे को बढ़ाती जा रही हैं। अगर इस बारे में सभी लोगों को जागरूक कर दिया जाए तो कैंसर से बचाव आसान हो सकता है। आइए उन कारणों के बारे में जानते हैं जिन्हें कैंसर के लिए जिम्मेदार माना जाता रहा है?
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बढ़ रहा है कैंसर का खतरा - फोटो : Freepik.com
कैंसर का खतरा

कैंसर रोग विशेषज्ञ कहते हैं, हम अगर अपनी लाइफस्टाइल को ही ठीक कर लें तो भी कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। कुछ अध्ययन बताते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ कैंसर होने का खतरा भी बढ़ जाता है, हालांकि कम उम्र वाले यहां तक कि बच्चे भी इसका शिकार हो सकते हैं। इसके अलावा जीवनशैली के कारक जैसे धूम्रपान, अधिक वजन, आहार में गड़बड़ी, शारीरिक निष्क्रियता के कारण भी जोखिम बढ़ सकता है।
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धूम्रपान से कैंसर का खतरा - फोटो : Freepik.com
तम्बाकू और शराब का सेवन

धूम्रपान को कैंसर का प्रमुख कारण माना जाता है और ये फेफड़ों के कैंसर से होने वाली 80-90% मौतों के लिए जिम्मेदार है। तम्बाकू के धुएं में कार्सिनोजेन्स होते हैं जो कोशिकाओं में डीएनए को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे उत्परिवर्तन और अनियंत्रित कोशिका वृद्धि हो सकती है। इसी तरह से शराब के अधिक या नियमित सेवन से कुछ प्रकार के कैंसर के विकसित होने का जोखिम बढ़ जाता है जिसमें लिवर, एसोफैगल और कोलोरेक्टल कैंसर शामिल हैं।

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खान-पान में करें सुधार - फोटो : Freepik.com
आहार में गड़बड़ी 

कुछ प्रकार के आहार को भी कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाला पाया गया है। विशेषतौर पर रेड और प्रोसेस्ड मीट खाने से कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। इन मांस में नाइट्रेट और नाइट्राइट जैसे कार्सिनोजेनिक यौगिक होते हैं, जो आंत की परत को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

कुछ अध्ययनों ने उच्च वसा वाले आहार को भी हानिकारक बताया गया है। इसी तरह से अधिक चीनी वाले आहार से शरीर में सूजन बढ़ सकती है जो कैंसर सहित कई बीमारियों को बढ़ावा दे सकती है।
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शारीरिक निष्क्रियता खतरनाक - फोटो : Freepik.com
शारीरिक निष्क्रियता से बचें

व्यायाम करना शरीर को स्वस्थ और फिट बनाए रखने के लिए सबसे जरूरी है। व्यायाम न करने या शारीरिक रूप से निष्क्रियता के शिकार लोगों में भी कैंसर का जोखिम बढ़ते हुए देखा जा रहा है। शारीरिक निष्क्रियता वजन बढ़ाने वाली हो सकती है। अध्ययनों में अधिक वजन या मोटापा को कैंसर के जोखिम के लिए जिम्मेदार माना गया है। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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