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Myths and Facts: लिवर की सेहत से जुड़े इन मिथ्स को कहीं आप भी तो नहीं मानते हैं सच? जानिए क्या है हकीकत

Sun, 24 Apr 2022 08:54 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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लिवर रोगों का बढ़ता खतरा - फोटो : iStock
लिवर को शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक माना जाता है। भोजन के पाचन से लेकर रक्त में रसायनों के संतुलन और कई प्रकार को हार्मोन्स के उत्पादन में इस अंग की बड़ी विशेष भूमिका होती है। हालांकि दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि पिछले कुछ समय से वैश्विक स्तर पर लिवर रोग के मामले तेजी से बढे़ हुए रिपोर्ट किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लिवर की समस्याओं के लिए हमारी जीवनशैली और आहार संबंधी गड़बड़ी को मुख्य कारक मानते हैं। अध्ययन भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि अगर हम सभी अपनी जीवनशैली को ही ठीक कर ले तो लिवर सहित शरीर के कई अन्य अंगों से संबंधित बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लिवर को कैसे स्वस्थ रखना है इसको लेकर भी लोगों में कई तरह के भ्रम देखने को मिलते हैं। क्या खाना चाहिए-क्या नहीं? कितना व्यायाम जरूरी है, किन लक्षणों को लेकर सावधानी जरूरी है, ऐसे कई सवाल लोगों के मन में लगातार बने रहते हैं। इन सबके बीच हमारे समाज और सोशल मीडिया पर लिवर की सेहत को लेकर फैली गलत जानकारियों के कारण भी लोगों की इस संबंध में स्पष्टता कम है। लिवर से संबंधित कई मिथ्स को तो हम वर्षों से सही मानते आ रहे हैं, आइए आगे इसी बारे में विस्तार से जानते हैं। इनमें से कई मिथ्स को आप भी अब तक सही मानते आ रहे होंगे।
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लिवर की बीमारियों के बारे में जानिए - फोटो : iStock
मिथ- केवल मोटे लोगों में ही होती हैं लिवर की बीमारियां।

इसमें कोई दो राय नहीं है कि मोटापा को लिवर की बीमारियों के प्रमुख कारकों में से एक माना जाता है, हालांकि यह पूरी तरह से सही नहीं है कि सिर्फ मोटापा ग्रस्त लोगों में ही इससे संबंधित बीमारियों का जोखिम होता है। कम वजन या दुबले लोगों में भी लिवर की समस्याएं हो सकती हैं। चीनी का अधिक सेवन, ओवर-द-काउंटर दवाओं का अधिक उपयोग, खान-पान में गड़बड़ी जैसे आनुवंशिक कारक किसी को भी इऩ बीमारियों का शिकार बना सकते हैं।
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लिवर को स्वस्थ रखने के तरीके - फोटो : Pixabay
मिथ- लिवर की बीमारियां बढ़ते उम्र की समस्या है

कई लोगों में यह धारणा देखी गई है कि लिवर की समस्याएं उम्र बढ़ने के साथ होती है, हालांकि यह एक बड़ा भ्रम है। कम उम्र के लोगों में भी पिछले कुछ वर्षों में तेजी से फैटी लिवर डिजीज, सिरोसिस और लिवर फेलियर के मामले देखे गए हैं। अगर आप अपने खान-पान और दिनचर्या को स्वस्थ रखते हैं तो बुढ़ापे तक इन बीमारियों से बचाव कर सकते हैं, वरना युवाओं में बढ़ती लिवर की समस्या, स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बड़ी चिंता का कारण बनी हुई है।

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शराब से लिवर की सेहत को खतरा - फोटो : Pixabay
मिथ- शराब का थोड़ा सेवन ठीक है, इससे कोई नुकसान नहीं होता

शराब को लिवर की सेहत का सबसे बड़ा दुश्मन माना जाता है, अधिक मात्रा में शराब का सेवन लिवर फेलियर जैसी जानलेवा स्थितियों का कारण बन सकता है। पर ऐसा भी नहीं है कि आप अगर कम मात्रा में इसका सेवन करते हैं तो इसे स्वस्थ माना जा सकता है। अल्कोहल की थोड़ी मात्रा भी लिवर रोगों का कारण बन सकती है। जिन लोगों को पहले से ही लिवर की बीमारियां हैं या आपमें इसका आनुवांशिक जोखिम है, तो शराब से बिल्कुल परहेज करें। यह आदत आपके लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है।
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लिवर को लेकर रहें सावधान - फोटो : Pixabay
मिथ: एक बार लिवर की बीमारी हो गई तो इसे ठीक नहीं किया जा सकता है।

यह सही है कि लिवर की कुछ बीमारियों को पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है, पर ज्यादातर स्थितियों में दवाइयों और परहेज के साथ बीमारियों से राहत पाई जा सकती है। लिवर में सूजन, फैटी लिवर या सिरोसिस जैसी समस्याओं पर अगर समय रहते ध्यान देकर सही से उपचार और परहेज किया जाए तो इसे काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। रोग के ठीक होने की संभावना, रोग की स्थिति पर निर्भर करती है, यही कारण है कि सभी लोगों को लिवर रोगों के लक्षणों पर ध्यान देते रहने की सलाह दी जाती है। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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