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Multiple Sclerosis:इस बीमारी में ब्रेन-स्पाइन से लेकर तंत्रिकाएं तक हो जाती हैं प्रभावित, लक्षणों पर दें ध्यान

Fri, 19 May 2023 04:14 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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तंत्रिकाओं में होने वाली समस्याएं - फोटो : istock
हमारा शरीर, प्राकृतिक रूप से कई बीमारियों को स्वत: ही ठीक कर देता है, इसमें मुख्य योगदान होता है हमारी इम्युनिटी का। हालांकि कुछ मामलों में ये प्रक्रिया हमारे शरीर को ही क्षति पहुंचाना शुरू कर देती है। इसे ऑटोइम्यूमन डिजीज के रूप में जाना जाता है जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम, हमारी ही शरीर की स्वास्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगती है, जिसके कारण कई तरह की बीमारियों के विकास का खतरा हो सकता है। मल्टीपल स्क्लेरोसिस, ऐसी ही एक बीमारी है जो ब्रेन-स्पाइन से लेकर आंखों की तंत्रिकाओं तक के लिए समस्याकारक हो सकती है।

मल्टीपल स्केलेरोसिस (एमएस) तब होता है जब हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली माइलिन (तंत्रिका कोशिकाओं के आसपास की परत) पर अटैक करने लगती है। इस बाहरी आवरण के बिना, आपकी नसें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं जिससे मस्तिष्क और आपके शरीर के बाकी हिस्सों के बीच संचार की समस्याएं पैदा होने लगती हैं।

एमएस एक क्रोनिक यानी लंबे समय तक चलने वाली बीमारी है जिसमें आपको मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और आंखों में ऑप्टिक नसों तक की समस्या हो सकती है। आइए इस समस्या के बारे में जानते हैं।
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मल्टीपल स्केलेरोसिस की दिक्कत - फोटो : istock
मल्टीपल स्केलेरोसिस (एमएस) के बारे में जानिए

मल्टीपल स्केलेरोसिस (एमएस) मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी (केंद्रीय तंत्रिका तंत्र) की प्रभावित करने वाली बीमारी है। किस व्यक्ति में मल्टीपल स्केलेरोसिस का खतरा हो सकता है, या फिर यह शरीर को किस प्रकार से प्रभावित करेगी इसका अनुमान लगाना कठिन हो सकता है।

नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर एंड स्ट्रोक (एनआईएनडीएस) के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका में ढाई से साढ़े तीन लाख लोग एमएस के साथ जी रहे हैं। कुछ लोगों में इसके केवल हल्के लक्षण होते हैं। जब मस्तिष्क और शरीर के अन्य भागों के बीच संचार बाधित हो जाता है तो इसके कारण रोगी देखने, लिखने, बोलने या चलने की क्षमता खो सकते हैं।
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सुई जैसी चुभन महसूस होना - फोटो : iStock
कैसे होते हैं इसके लक्षण?

एमएस के लक्षण अक्सर अप्रत्याशित होते हैं। प्रभावित तंत्रिका तंत्र के क्षेत्र के आधार पर रोगी में कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं। 
  • तंत्रिका क्षति के कारण मांसपेशियों में कमजोरी हो सकती है। 
  • सुई जैसी चुभन महसूस होना एमएस के शुरुआती लक्षणों में से एक है। यह चेहरे, हाथ और पैरों को प्रभावित कर सकता है।
  • गर्दन को हिलाने पर बिजली के झटके जैसी सनसनी का अनुभव हो सकता है, जिसे लेर्मिट के संकेत के रूप में जाना जाता है।
  • ब्लैडर को खाली करने में कठिनाई या बार-बार या अचानक पेशाब करने की आवश्यकता होना।

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मल्टीपल स्केलेरोसिस के लिए वातावरणीय-जेनेटिक कारक - फोटो : istock
क्यों होती है ये दिक्कत

वैज्ञानिक अभी तक यह समझ नहीं सके हैं कि एमएस किन कारणों से होता है। अधिकांश लोगों को 20- 40 वर्ष की आयु के बीच इसका निदान होता है। शोध के मुताबिक पुरुषों की तुलना में महिलाओं में इसका जोखिम दोगुना हो सकता है। जो लोग धूम्रपान करते हैं उनमें एमएस विकसित होने की आशंका अधिक होती है। इसके अलावा कुछ अन्य कारणों पर भी ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।
  • ऑटोइम्यून विकार
  • संक्रामक एजेंट जैसे वायरस का बार-बार संक्रमण
  • वातावरणीय-जेनेटिक कारक
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धुम्रपान से कई प्रकार के रोगों का खतरा - फोटो : Pixabay
मल्टीपल स्केलेरोसिस का इलाज और बचाव

एमएस के लिए कोई पुख्ता इलाज नहीं है, लेकिन सहायक उपचार के माध्यम से रोग की प्रगति को धीमा किया जा सकता है। इसमें रोगी की स्थिति के आधार पर दवाइयों से लेकर थेरेपी तक की आवश्यकता हो सकती है।

वैसे तो एमएस से बचाव नहीं किया जा सकता है लेकिन अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि धूम्रपान छोड़ना, शरीर के वजन को नियंत्रित बनाए रखना और आहार-धूप के संपर्क से पर्याप्त विटामिन-डी प्राप्त करने से आपके जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। शारीरिक रूप से सक्रिय रहना, तनाव के स्तर को कम करना और एक स्वस्थ जीवनशैली का पालन करके आप जोखिमों को कम कर सकते हैं। 

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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