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COVID-19: क्या प्रतिबंधों को हटाने में हो गई जल्दी? कई देशों में रोजाना सैकड़ों मौतें, घटी लाइफ एक्सपेक्टेंसी

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दुनियाभर में कोविड के मामले - फोटो : iStock
वैश्विक स्तर पर कोरोना संक्रमण की रफ्तार कम हो गई है, इसी को मद्देनजर रखते हुए हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे 'ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी' की सूची से बाहर कर दिया है। पर क्या वास्तव में  कोरोना खत्म हो गया है? यह सवाल इसलिए खड़ा हो रहा है क्योंकि भले ही संक्रमण के मामले कम रिपोर्ट हो रहे हैं पर कई देशों में संक्रमितों के मौत के मामले अब भी डराने वाले हैं।  

विश्व स्वास्थ्य संगठन और अमेरिकी सरकार, दोनों ने हाल ही में कोरोनावायरस सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल को समाप्त कर दिया है, हालांकि सीडीसी के अनुसार कोविड-19 अब भी अमेरिका में हर दिन 100 से अधिक लोगों की मौत का कारण बन रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लोगों ने अब कोविड-19 से बचाव के उपायों का पालन करना भी कम कर दिया है। पर वास्तव में खतरा अभी टला नहीं है। संक्रमण का खतरा अब भी है, इसे हल्के में लेने की भूल करना भविष्य में गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।
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अभी भी खत्म नहीं हुआ कोरोना - फोटो : Istock
विशेषज्ञों की चेतावनी- खत्म नहीं हुआ है संक्रमण

न्यू इंग्लैंड कॉम्प्लेक्स सिस्टम्स इंस्टीट्यूट के प्रेसिडेंट यनीर बमयम कहते हैं, कोई भी बयान जिसमें कहा जा रहा है कि महामारी खत्म हो गई है, यह फिलहाल राजनीतिक बयान ही है। अकेले अमेरिका में साप्ताहिक स्तर पर 1,000 से अधिक मौतें रिपोर्ट की जा रही हैं। जो लोग खुद को संक्रमण, लॉन्ग कोविड और इसके कई दुष्परिणामों से बचाना चाहते हैं, वे सावधानी बरतते रहें। कोविड खत्म नहीं हुआ है, इसकी रफ्तार बस कम हुई है।

एक से अधिक बार संक्रमण की स्थिति शरीर के लिए कई प्रकार से समस्याकारक हो सकती है, ऐसे लोगों की सेहत में लगातार गिरावट साफ नजर आ रही है। दुष्प्रचार के इस युग में एकमात्र चुनौती यह है कि- जो है उसे उसी रूप में पहचाना जाए।
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बना हुआ है कोरोना का खतरा - फोटो : PTI

पोस्ट कोविड समस्याओं को लेकर विशेषज्ञ चिंतित

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सुरक्षात्मक उपायों के कम होते प्रयोग के चलते कोविड-19 के मौजूदा मामले और लॉन्ग कोविड के जोखिमों को पहचानने में भी कठिनाई हो सकती है। अमेरिका में अनुमानित 26 मिलियन लोग फिलहाल  पोस्ट कोविड समस्याओं के शिकार हैं, जिनको विशेष देखभाल की आवश्यकता है।

न्यूयॉर्क शहर स्थित माउंट सिनाई हेल्थ सिस्टम में लॉन्ग कोविड के मरीजों की देखभाल करने वाले डॉ डेविड पुट्रिनो कहते हैं, हमारे भीतर यह स्थापित कर दिया गया है कि मौत ही एकमात्र गंभीर परिणाम है। हमने अभी भी इस बारे में विचार करने के लिए पर्याप्त स्पेस नहीं बनाया है कि लंबे समय तक कोविड का असर होना बहुत गंभीर हो सकता है।

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कोरोना के जोखिम - फोटो : iStock
लाइफ एक्सपेक्टेंसी में भी गिरावट

पिछले तीन वर्षों में 11 लाख से अधिक अमेरिकी लोगों की मृत्यु कोविड से हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि मृत्यु प्रमाण पत्र रिपोर्टिंग में त्रुटियों के कारण आधिकारिक संख्या कम है, पर वास्तिक आंकड़े कहीं अधिक हो सकते हैं। कोविड के कारण हृदय रोग, कैंसर और कई अन्य शारीरिक समस्याओं के चलते जो अप्रत्यक्ष मौतें हो रही हैं उसपर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। 

नैशविले स्थित वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में पल्मोनरी पेशेंट केयर सेंटर की निदेशक, कार्ला सेविन कहती हैं, कोविड को रोका जा सकता है, इसके प्रसार को कम कम किया जा सकता है। पर हम इन सभी चीजों को अपूर्ण रूप से कर रहे हैं। साल 2021 के अंत तक, महामारी से पहले की तुलना में अब अमेरिकी लोग औसतन 3 साल पहले मर रहे हैं, जीवन प्रत्याशा 79 साल से गिरकर 76 साल हो गई थी, जो एक सदी में सबसे बड़ी गिरावट है।
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भारत में कोरोना संक्रमण का खतरा - फोटो : istock
भारत में कैसी है स्थिति

भारत में कोरोना की मौजूदा स्थिति काफी नियंत्रित है। पिछले 24 घंटे में 1000 से कम लोगों में संक्रमण की पुष्टि की गई है, 13 लोगों की मौत संक्रमण के कारण हुई है। मृत्यु का आंकड़ा रोजाना औसत 20-25 बना हुआ है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सभी लोगों को गंभीरता से संक्रमण को लेकर ध्यान देने की आवश्यकता है, कोरोना अभी भी खत्म नहीं हुआ है। हमें कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर पर लगातार ध्यान देते रहने की आवश्यकता है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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