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सावधान: कोरोना से ठीक हो रहे रोगियों में बढ़ा इस गंभीर बीमारी का खतरा, ऐसे लक्षणों को न करें नजरअंदाज

Mon, 03 May 2021 06:07 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला
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रोगियों मं दिख रहे हैं पोस्ट कोविड के मामले - फोटो : iStock
कोरोना वायरस की दूसरी लहर की शुरुआत से ही लोगों को तमाम तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वायरस की दूसरी लहर में लक्षणों में बदलाव के साथ लोगों को सांस लेने में तकलीफ और फेफड़ों में संक्रमण की समस्या हो रही है। देश अभी कोरोना से जूझ ही रहा है कि विशेषज्ञों ने एक और मुसीबत को लेकर लोगों को आगाह किया है। एक हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि कोरोना से ठीक हो चुके या अस्पताल में भर्ती मरीजों में एक गंभीर बीमारी देखने को मिल रही है।
आइए जानते हैं कि कोरोना अब कौन सी नई मुसीबत लेकर आया है?
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फंगल संक्रमण है म्यूकोरमाइकोसिस - फोटो : Pixabay
हालिया रिपोर्टंस में विशेषज्ञों ने बताया है कि कोरोना संक्रमण से ठीक हो रहे लोगों में म्यूकोरमाइकोसिस नामक बीमारी के लक्षण देखे जा रहे हैं। म्यूकोरमाइकोसिस एक प्रकार का गंभीर फंगल संक्रमण होता है। आमतौर पर यह बीमारी उन लोगों में ज्यादा होती है जो ऐसी दवाइयों का सेवन करते हैं जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देती हैं। इसी वजह से शरीर कीटाणुओं और वायरस से मुकाबला नहीं कर पाता है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर यह समस्या कोरोना से ठीक हो रहे लोगों को क्यों हो रही है?

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कमजोर प्रतिरक्षा वाले रोगियों को ज्यादा खतरा - फोटो : Pixabay
म्यूकोरमाइकोसिस और कोविड-19
विशेषज्ञों के मुताबिक सार्स-सीओवी-2 वायरस शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देता है, ऐसे में कोविड-19 वाले रोगियों में यह समस्या देखने को मिल रही है। इसके अलावा डॉक्टरों का कहना है कि कोविड-19 के कई रोगियों को उच्च शक्ति वाली एंटीवायरल और स्टेरॉयड दवाएं भी दी जा रही हैं जिसकी वजह से रोगियों की प्रतिरक्षा प्रणाली में कमजोरी आ जाती है। इसके अलावा जिन लोगों को पहले से ही मधुमेह की समस्या है उनमें स्टेरॉयड, ब्लड शुगर के स्तर को प्रभावित कर सकता है। इन्हीं कारणों के चलते ऐसे रोगियों में म्यूकोरमाइकोसिस जैसे फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

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डायबिटीज रोगी रहें सावधान - फोटो : iStock
किन्हें इसका खतरा ज्यादा होता है?
डॉक्टरों के मुताबिक डायबिटीज या कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले रोगियों को म्यूकोरमाइकोसिस का खतरा अधिक होता है। इसके अलावा कोरोना संक्रमित जिन रोगियों को स्टेरॉयड और अन्य दवाइयां दी जा रही हैं, उनमें भी इस गंभीर फंगल संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। 
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चेहरे और आंखों में सूजन दिखे तो हो जाएं सावधान - फोटो : pixabay
कैसे करें इसकी पहचान?
डॉक्टरों के मुताबिक म्यूकोरमाइकोसिस का प्रभाव आमतौर पर नाक, आंख, मस्तिष्क और साइनस जैसे क्षेत्रों में देखा जा सकता है। कोविड से ठीक हो रहे रोगियों में अगर ऐसे लक्षण दिखें तो उन्हें सतर्क हो जाना चाहिए।
  • चेहरे और आंखों में सूजन
  • दर्द और सुन्नता का अनुभव होना।
  • नाक से असामान्य रूप से खून या काला-भूरा रंग का तरल आना।
  • पल्मोनरी म्यूकोरमाइकोसिस से पीड़ित लोगों में बुखार, खांसी, सीने में दर्द और सांस की तकलीफ जैसे लक्षणों का भी अनुभव हो सकता है।
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पोस्ट कोविड मामलों को लेकर रहें अलर्ट - फोटो : Social media
ऐसे रोगियों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों के मुताबिक जिन रोगियों को बताए गए लक्षण महसूस हो रहे हों उन्हें तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। एंटीफंगल दवाओं से इसे ठीक किया जा सकता है। जिन लोगों में यह स्थिति गंभीर हो जाती है उनमें प्रभावित मृत ऊतकों को हटाने के लिए सर्जरी की भी आवश्यकता  हो सकती है। ध्यान रहे ऐसी दिक्कतों में बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए।

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नोट: यह लेख मीडिया रिपोर्टस और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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