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कोरोना संकट: लैम्बडा और डेल्टा से भी संक्रामक है ओमिक्रॉन वैरिएंट, जानिए इसके लक्षण और बचाव के तरीके

Sat, 27 Nov 2021 04:59 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट ने बढ़ाई मुश्किलें - फोटो : Amar Ujala
दुनिया के तमाम देशों में कोरोना संक्रमण के मामले एक बार फिर से रफ्तार पकड़ रहे हैं। हाल ही में सामने आए कोरोना के नए और सबसे खतरनाक माने जा रहे साउथ अफ्रीकन वैरिएंट बी.1.1.1.529 ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। इस नए वैरिएंट को 'ओमिक्रॉन' नाम दिया गया है। वैसे तो अभी दुनियाभर में ओमिक्रॉन वैरिएंट के केस काफी कम हैं, हालांकि अध्ययनों के आधार पर वैज्ञानिकों का कहना है कि यह वैरिएंट कोरोना का अब तक का सबसे संक्रामक और घातक वैरिएंट हो सकता है। रिपोर्टस के मुताबिक कोरोना के इस नए वैरिएंट में करीब 32 म्यूटेशन देखे गए हैं जो इसे बेहद खतरनाक बनाते हैं। इससे पहले कोरोना के लैम्बडा वैरिएंट में सबसे अधिक 7 म्यूटेशनों के बारे में पता चला था।

ओमिक्रॉन वैरिएंट को लेकर अब तक हुए अध्ययनों में दावा किया जा रहा है कि यह अब तक के सबसे खतरनाक डेल्टा वैरिएंट से भी घातक हो सकता है। इसके अलावा चूंकि इसके म्यूटेशनों में वैक्सीन से बनी प्रतिरक्षा को भेदने की क्षमता है, ऐसे में यह टीकाकरण करा चुके लोगों के लिए भी समस्या का कारण बन सकता है। आइए आगे की स्लाइडों में जानते है कि ओमिक्रॉन वैरिएंट, कोरोना के अब तक के सबसे घातक डेल्टा और लैम्बडा वैरिएंट्स से कितना अलग है? साथ ही इससे बचाव कैसे करें?
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साउथ अफ्रीकन वैरिएंट ने बढ़ाई मुश्किलें - फोटो : Pixabay
ओमिक्रॉन वैरिएंट  बी.1.1.1.529
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक सबसे पहले साउथ अफ्रीका के बोत्सवाना में सामने आए इस वैरिएंट के मामले तीन और देशों में सामने आ चुके हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस वैरिएंट की प्रकृति ऐसी है जो संक्रमितों में गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है। सबसे गंभीर बात इसमें देखे गए 32 म्यूटेशन हैं, विशेषज्ञों का कहना है कि किसी वैरिएंट में जितने अधिक म्यूटेशन होते हैं, वायरस के प्रतिरक्षा से बचने की आशंका भी उतनी ही बढ़ जाती है। ओमिक्रॉन वैरिएंट में K417N, E484A, P681H और N679K जैसे म्यूटेशनों का पता चला है जो इसे आसानी से प्रतिरक्षा को चकमा देने के योग्य बनाते हैं। 

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कोरोना वायरस ने बढ़ाई चिंता - फोटो : पिक्साबे
लैम्बडा वैरिएंट में देखे गए थे 7 म्यूटेशन
ओमिक्रॉन वैरिएंट से पहले कोरोना के लैम्बडा वैरिएंट में सबसे अधिक सात म्यूटेशनों के बारे में पता चला था। सबसे पहले पेरू में सामने आए कोरोना के इस वैरिएंट में सामने आए सात म्यूटेशनों ने वैज्ञानिकों के होश उड़ा दिए थे। वैज्ञानिकों का कहना था कि लैम्बडा वैरिएंट में देखे गए सात म्यूटेशन इसे डेल्टा वैरिएंट से भी घातक बनाते हैं। म्यूटेशनों की अधिक संख्या किसी भी वायरस की संक्रमकता दर को भी काफी बढ़ा देती है। 

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कोरोनावायरस डेल्टा वैरिएंट माना जाता है सबसे संक्रामक - फोटो : PIB
डेल्टा वैरिएंट की तबाही
ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामले सामने आने से पहले कोरोना के डेल्टा वैरिएंट को सबसे घातक और संक्रामक माना जा रहा था। भारत में कोरोना की दूसरी लहर में मची तबाही के लिए भी कोरोना के इसी वैरिएंट को जिम्मेदार माना जा रहा है। कोरोना का डेल्टा वैरिएंट (बी.1.617.2) के मामले भारत सहित दुनिया के तमाम देशों में देखने को मिले। अध्ययनों के मुताबिक यह वैरिएंट संक्रमितों के फेफड़ों को गंभीर क्षति पहुंचाता है, यही कारण है कि इससे संक्रमित लोगों में मृत्युदर भी काफी अधिक देखने को मिला था।
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कोरोना के नए वैरिएंट्स - फोटो : istock
कोरोना का म्यू वैरिएंट
सितंबर के महीने में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अपने साप्ताहिक महामारी बुलेटिन में कोरोना के म्यू वैरिएंट के बारे बताया था। इस वैरिएंट को लेकर हुए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि यह वैक्सीन से शरीर में बनी प्रतिरक्षा को आसानी से चकमा देने में सफल हो सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना का म्यू वैरिएंट, वैक्सीनेटेड लोगों में भी संक्रमण का कारण बन सकता है।
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कोरोना के लक्षणों से रहें सावधान - फोटो : iStock
ओमिक्रॉन, लैम्बडा और डेल्टा वैरिएंट के लक्षण
हाल ही में सामने आए कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रीय संचारी रोग संस्थान (एनआईसीडी) का कहना है कि "वर्तमान में बी.1.1.1.529 वैरिएंट से संक्रमण के बाद कोई असामान्य लक्षणों के बारे में पता नहीं चला है। इसमें भी रोगियों में वैसे ही लक्षण देखे जा सकते हैं जैसे कि कोरोना के डेल्टा और अन्य वैरिएंट से संक्रमण में हो सकते हैं। कोरोना के तमाम वैरिएंट्स से संक्रमण में लोगों को सांस लेने में तकलीफ, स्वाद और गंध न आने, खांसी, गले में खराश और बुखार जैसे लक्षण देखने को मिल रहे हैं।
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कोरोना से बचाव के करते रहें उपाय - फोटो : pixabay
कोरोना के वैरिएंट्स से कैसे रहें सुरक्षित?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना संक्रमण से सुरक्षित रहने के लिए बचाव के उपायों को हमेशा प्रयोग में लाते रहना सबसे आवश्यक होता है। इसके लिए मास्क लगाना, हाथों की स्वच्छता बनाए रखने के साथ सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करते रहना सबसे आवश्यक माना जाता है। इसके अलावा कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीनेशन सबसे आवश्यक है, वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके लोगों में गंभीर संक्रमण और इससे होने वाली मौत का जोखिम कम होता है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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