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Covid-19: BF.7 से खतरे के बीच 'अतिसंक्रामक' XBB वैरिएंट ने बढ़ाई चिंता, भारत में इन दोनों की हो चुकी है पुष्टि

Sun, 25 Dec 2022 01:03 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना के नए वैरिएंट्स ने बढ़ाई मुश्किलें - फोटो : Pixabay
चीन में कोरोना की मौजूदा लहर के कारण बिगड़े हालात, पूरी दुनिया के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक यहां रोजाना लाखों लोगों में संक्रमण की पुष्टि की जा रही है, आश्चर्यजनक रूप से मृतकों की संख्या भी काफी अधिक है। हालांकि चीन सरकार पर, एजेंसियां डेटा छिपाने की का आरोप लगा रही हैं।

शोधकर्ताओं ने पाया कि चीन में फिलहाल ज्यादातर मामले ओमिक्रॉन के सब-वैरिएंट BF.7 के पाए जा रहे हैं , जिसे अध्ययनों में अधिक संक्रामकता वाला पाया गया है। इस बीच अमेरिका से मिल रही जानकारियों के मुताबिक यहां ''अति-संक्रामक XBB वैरिएंट'' के कारण संक्रमण बढ़ने की खबरें हैं।
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कोरोना के XBB वैरिएंट से खतरा - फोटो : Pixabay

सीडीसी ने XBB वैरिएंट को लेकर किया आगाह

यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने अपने हालिया रिपोर्ट में बताया कि संयुक्त राज्य अमेरिका में XBB वैरिएंट के कारण संक्रमण के मामलों में 18 फीसदी जबकि पूर्वोत्तर में 50 प्रतिशत मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। सीडीसी के अनुसार, 24 दिसंबर को समाप्त हुए सप्ताह में संयुक्त राज्य अमेरिका में XBB के 18.3% संक्रमितों का अनुमान है, जो पिछले सप्ताह में 11.2% था।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जिस प्रकार से अध्ययनों में कोरोना के इस वैरिएंट की प्रकृति के बारे में देखा गया है, उसे ध्यान में रखते हुए लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्कता है, यह वैरिएंट तेजी से लोगों में संक्रमण का कारण बन सकता है।
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अधिक संक्रामक हो सकता है XBB वैरिएंट - फोटो : Pixabay

XBB वैरिएंट की प्रकृति अधिक संक्रामक

शोधकर्ताओं ने बताया, XBB कोरोना के BA.5 का एक सब-वैरिएंट है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) में कोविड तकनीकी प्रमुख मारिया वान केरखोव ने एक रिपोर्ट में बताया था कि यह BA.2.75 और BA.2.10.1 के पुनः संयोजन से उत्पन्न वैरिएंट है। इसकी संक्रामकता दर और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में गंभीर रोग के जोखिमों को लेकर लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है। कोरोना के इस वैरिएंट के जोखिम को देखते हुए पिछले महीनों में अमेरिकी वैज्ञानिकों ने फाइजर/मॉडर्ना के उन बूस्टर शॉट्स पर जोर दिया था जो खास तौर पर इन वैरिएंट्स को लक्षित कर सके। 

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नए वैरिएंट में वैक्सीन स्केप की क्षमता - फोटो : iStock

XBB के कारण रि-इंफेक्शन का जोखिम

डब्ल्यूएचओ ने एक रिपोर्ट में बताया था कि शुरुआती अध्ययनों के मुताबिक ओमिक्रॉन के अन्य सब-वैरिएंट्स की तुलना में XBB के कारण रि-इंफेक्शन का जोखिम भी अधिक हो सकता है। इस वैरिएंट की वैक्सीन स्केप क्षमता भी अधिक पाई गई है, जो इसे शरीर में बनी प्रतिरक्षा प्रणाली को आसानी से चकमा देते हुए लोगों में संक्रमण का कारण बनने के योग्य बनाती है।

शोधकर्ताओ का मानना है कि इन नए सब-वैरिएंट्स में प्रतिरक्षा को आसानी से चकमा देने वाले म्यूटेशन देखे गए हैं, जिसके कारण फिलहाल सभी लोगों में खतरा बना हुआ है। 
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वैरिएंट्स की संक्रामकता दर को लेकर अलर्ट - फोटो : Pixabay
ये वैरिएंट्स भारत के लिए भी बन सकते हैं खतरा

दुनियाभर में मौजूदा समय में कोरोना के बढ़ते मामलों के लिए जिन दो वैरिएंट्स BF.7 और XBB को प्रमुख पाया गया है, इन दोनों की भारत में भी पुष्टि हो चुकी है। हाल ही में देश में BF.7 से संक्रमित चार लोगों की पुष्टि हुई थी, वहीं अक्तूबर में अकेले महाराष्ट्र में XBB वैरिएंट से 18 लोगों को संक्रमित पाया गया था।


स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, नए वैरिएंट्स मे तेजी से संक्रमण फैलाने की जो प्रकृति है वह काफी चिंताजनक है, सभी लोगों को इस जोखिम को ध्यान में रखते हुए बचाव के उपाय करते रहने चाहिए।
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संक्रमण से बचाव के उपाय करते रहना जरूरी - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं शोधकर्ता?

सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी) के निदेशक विनय.के.नंदीकूरी ने एक रिपोर्ट में कहा, वैक्सीनेशन की रफ्तार और प्राकृतिक संक्रमण के कारण भारत में 'हर्ड इम्युनिटी' विकसित हो चुकी है, ऐसे में BF.7 वैरिएंट के कारण यहां चीन जैसे गंभीर हालात बनने की आशंका नहीं है। यह वैरिएंट निश्चित ही उन लोगों को भी संक्रमित करता देखा जा रहा है जिनका वैक्सीनेशन हो चुका है पर संक्रमण की गंभीरता उतनी नहीं है, जितनी डेल्टा के साथ हुआ करती थी।

नए वैरिएंट्स की प्रकृति और संक्रामकता दर थोड़ी चिंता जरूर बढ़ाती है, पर अगर कोविड से बचाव के उपायों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए तो संक्रमण के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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