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Monsoon Season: इस मौसम में इन चार बीमारियों का रहता है खतरा, आखिरी वाली बीमारी हो सकती है जानलेवा

Thu, 20 Jul 2023 09:35 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मानसून में होने वाली बीमारियां - फोटो : iStock
मई-जून के महीने में भीषण गर्मी के बाद मानसून का समय राहत वाला तो होता है पर अपने साथ कई तरह की बीमारियां भी लेकर आता है। बरसात के साथ कई प्रकार की संक्रामक बीमारियां बढ़ने लगती हैं, मच्छर जनित रोगों के कारण हर साल हजारों लोगों की मौत हो जाती है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को इस मौसम में सेहत को लेकर विशेष सावधानियां बरतते रहने की सलाह देते हैं।

डॉक्टर्स बताते हैं, मानसून के समय में कई कारणों से हमारा इम्यून सिस्टम भी कमजोर हो जाता है, जिसके कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा अधिक हो सकता है। विशेषकर बच्चों और अधिक उम्र के लोगों के लिए यह मौसम काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

आइए मानसून में होने वाली ऐसी ही कुछ समस्याओं और उनसे बचाव के बारे में जानते हैं।
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सर्दी-जुकाम के लक्षणों पर ध्यान दें - फोटो : istock
फ्लू (सर्दी और बुखार) की समस्या

बरसात के मौसम में तापमान में भारी उतार-चढ़ाव, शरीर को बैक्टीरिया या वायरल संक्रमण के प्रति संवेदनशील बनाता है, जिसके परिणामस्वरूप सर्दी और फ्लू हो सकता है। किसी भी मौसम में बदलाव के साथ फ्लू होना बहुत सामान्य है। जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है उनमें संक्रामक रोगों का खतरा अधिक हो सकता है।

फ्लू से बचाव के लिए साफ-सफाई का ध्यान रखना और इम्युनिटी बढ़ाने वाली चीजों का सेवन करना फायदेमंद माना जाता है। 
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डेंगू संक्रमण का खतरा - फोटो : istock
मच्छर जनित रोगों का खतरा

मानसून के मौसम में कई प्रकार की मच्छर जनित बीमारियों का खतरा भी काफी बढ़ जाता है- मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया उनमें से एक हैं।  बारिश में पानी जमा होने से मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल माहौल मिल जाता है, जिसके कारण इन रोगों का खतरा रहता है। जल जमाव वाले क्षेत्रों को साफ रखकर मलेरिया के प्रसार को रोका जा सकता है। इसी प्रकार डेंगू बुखार भी बहुत खतरनाक और जानलेवा हो सकती है।

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टाइफाइड में उल्टी की समस्या - फोटो : iStock
टाइफाइड का बढ़ जाता है खतरा

टाइफाइड बुखार दूषित भोजन और पानी के कारण होता है, जोकि मानसून में काफी सामान्य है। यह साल्मोनेला टाइफी नामक बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण है। टाइफाइड में तेज बुखार के साथ पाचन स्वास्थ्य की समस्याएं हो सकती है जिसमें उचित स्वच्छता और साफ-सफाई बनाए रखने और साथ ही साफ पानी पीने की सलाह दी जाती है। बच्चों में यह समस्या अधिक देखी जाती रही है।
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कालरा की समस्या के बारे में जानिए - फोटो : Pixabay
कालरा हो सकती है जानलेवा

कालरा, दूषित पानी के कारण होने वाला संक्रमण है जिसे जानलेवा दुष्प्रभावों वाला भी माना जाता है। यह आंतों में होने वाला संक्रमण है, बैक्टीरिया से दूषित जल-भोजन के कारण कालरा हो सकता है जिसमें बार-बार दस्त आने और डिहाइड्रेशन की समस्या होती है। यह बच्चों में मृत्यु का प्रमुख जोखिम कारक माना जाता रहा है।

कालरा किसी को भी हो सकता है, इससे बचाव के लिए साफ-उबालकर पानी पीने और भोजन की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देते रहने की सलाह दी जाती है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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