मानसून का यह मौसम कई प्रकार की संक्रामक बीमारियों के जोखिमों वाला हो सकता है। वातावरण में आर्द्रता की स्थिति के चलते बैक्टीरिया और वायरस बढ़ने लगते हैं, यही कारण है कि इस मौसम में सामान्य फ्लू, त्वचा की बीमारियों, पेट के संक्रमण और कंजंक्टिवाइटिस का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। मौसम में होने वाले बदलाव के कारण गले में संक्रमण और सर्दी-जुकाम का जोखिम भी अधिक रहता है।
सामान्य सर्दी और फ्लू जैसे वायरल संक्रमण मानसून के मौसम में गले में खराश का कारण बनते हैं। इसके अलावा मानसून की हवा में अत्यधिक नमी के कारण होने वाली एलर्जी भी गले में जलन का कारण बन सकती है। मानसून की नमी बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा देती है जिससे इस प्रकार की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
सामान्यतौर पर ये समस्याएं कुछ दवाओं से ठीक किए जा सकते हैं। गले के संक्रमण और दर्द से राहत पाने में कुछ घरेलू उपायों को भी कारगर पाया गया है।