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Stress Eating: बिना सोचे-समझे खाने की है आदत तो इस रोग से हैं परेशान, जानें इसके नुकसान

Wed, 02 Aug 2023 02:54 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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क्या है स्ट्रेस ईटिंग - फोटो : istock
सुमन अग्रवाल

Stress Eating: क्या बहुत ही तनावपूर्ण या व्यस्त दिन गुजरने के बाद आप का कुछ मीठा या जंक फूड खाने का दिल करता है? घबराइए मत, आप अकेली नहीं हैं। ऐसे लोगों की लिस्ट काफी लंबी है, जो ओवर ईटिंग कर रहे हैं। मनोविज्ञान की भाषा में इसे स्ट्रेस ईटिंग कहते हैं। कई लोग दुख और चिंता कम करने के लिए ओवर ईटिंग करते हैं, लेकिन यह उन्हें मोटापा, अपच, मेटाबॉलिज्म कमजोर करने जैसी कई बीमारियां दे सकती है।

नोएडा की रुचि बताती हैं कि वह जॉब में नहीं हैं और चिंता कम करने के लिए खाली समय में कुछ न कुछ खाती रहती हैं। उनका मीठा या कुछ स्नैक्स खाने का मन करता है। कुछ लोग तनाव कम करने के लिए गाना सुनते हैं, वॉक पर जाते हैं या टीवी देखते हैं। लेकिन अमेरिका की हॉवर्ड यूनिवर्सिटी का एक अध्ययन बताता है कि महिलाएं तनाव में ज्यादातर खाने का रास्ता चुनती हैं। भोजन के साथ हमारा मनोवैज्ञानिक संबंध भी होता है। कई लोग, खासकर महिलाएं तनाव में ज्यादा खाती हैं, जिससे बाद में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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स्ट्रेस ईटिंग की वजह - फोटो : istock
स्ट्रेस ईटिंग के कारण

यह तो खाने के साथ तनाव का भावनात्मक संबंध हो गया, लेकिन इसका बायोलॉजिकल यानी जैविक संपर्क भी है। लंबे समय तक दिमाग में तनाव बने रहने से शरीर के अंदर कॉर्टिसोल नाम का हार्मोन अधिक तेजी से रिलीज होने लगता है, जो भूख को और बढ़ा देता है। मोटापे की शिकार महिलाओं में यह हार्मोन ज्यादा पाया जाता है।

सबसे बड़ी बात है कि इस दौरान खाने पर नियंत्रण नहीं होता। आप क्या खा रही हैं, वह हेल्दी है या नहीं, इसकी कोई चिंता नहीं होती। बस खाने पर आप का जोर चलता है और आप किसी भी समय कुछ भी खा लेती हैं। कई बार पेट भर जाता है, लेकिन मन नहीं भरता। यह भी तनाव का लक्षण है, क्योंकि एक भूख आपके पेट से जुड़ी होती है और दूसरी आपकी भावनाओं से, जो कभी पूरी नहीं होती। ऐसे में आप मन को खुश और शांत रखने के लिए खाती जाती हैं। फिनलैंड में 5 हजार पुरुष और महिलाओं पर एक साथ अध्ययन किया गया, जिसमें पाया गया कि महिलाओं में स्ट्रेस ईटिंग ज्यादा होती है।
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स्ट्रेस ईटिंग से बचाव - फोटो : istock
उपाय भी जान लें

कुछ भी खाने से पहले सोचें कि आप क्यों और क्या खा रही हैं। क्या आपको सच में भूख है या बस मन को ठीक करने के लिए खा रही हैं। जो आप खा रही हैं, उससे आपके शरीर को कुछ फायदा मिलेगा या नहीं, या बस ऐसे ही खा रही हैं। दिन भर में जब भी खाएं तो उसे डायरी में लिख लें। इससे आपको पता चलेगा कि आपने कब और क्या खाया। डायरी में खाने का चार्ट रखें। हेल्दी और अनहेल्दी खाने की सूची बनाएं। बाजार जाएं तो हेल्दी चीजें, जैसे कि फल-सब्जी, ड्राई फ्रूट्स, नेचुरल फूड्स आदि ही खरीदें।

इसके अलावा तनाव कम करने के लिए आप कई अन्य विकल्प भी चुन सकती हैं। मेडिटेशन, एक्सरसाइज, योगासन कर सकती हैं। सुबह-शाम थोड़ा समय इनमें देने से आपका तनाव कम होगा और मन भी खाने से दूर रहेगा। आपकी पाचन क्रिया अच्छी होगी और हार्मोन्स का संतुलन बना रहेगा। अगर बहुत ज्यादा तलब होती है तो खाने के कुछ ऐसे विकल्प चुनें, जो हेल्दी हों। घर में कुछ स्नैक्स बना सकती हैं, कम कैलोरी वाले फूड्स खा सकती हैं। इसके साथ ही अपने आहार विशेषज्ञ से बात करें। अगर जरूरत पड़े तो अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लें, जिससे आप एक सही रूटीन फॉलो कर सकें।

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स्ट्रेस ईटिंग के नुकसान - फोटो : pixa
बिगड़ जाता है भोजन तंत्र

 दिल्ली स्थित मानव व्यवहार और संबद्ध विज्ञान संस्थान के मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. ओम प्रकाश के मुताबिक, स्ट्रेस ईटिंग के पीछे कई मेडिकल वजहें भी होती हैं। तनाव में कई बार लोग ओवर ईटिंग करते हैं तो कई बार अंडर ईटिंग। दोनों ही सूरत में यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। भोजन का जो तंत्र है, वह कई हार्मोन्स पर निर्भर करता है। भूख और शरीर की ग्रंथियों का एक गहरा रिश्ता होता है। जब आप ज्यादा तनाव लेती हैं तो कई हार्मोन प्रभावित होने लगते हैं, जिससे आपके खाने का तंत्र पूरी तरह से बिगड़ जाता है और आप कब क्या खाती हैं, ज्यादा या कम, उसकी समझ नहीं होती।
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Stress Eating - फोटो : istock
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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