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MonkeyPox vs Tomato flu: दोनों के ज्यादातर लक्षण एक जैसे, फिर कैसे जानें यह मंकीपॉक्स है या टोमैटो फ्लू?

Sun, 28 Aug 2022 02:48 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मंकीपॉक्स और टोमैटो फ्लू में कैसे अंतर करें? - फोटो : istock
कोरोना महामारी के साथ देश में पिछले कुछ महीनों से कई प्रकार की और भी संक्रामक बीमारियों के मामले रिपोर्ट किए गए हैं। मंकीपॉक्स और टोमैटो फीवर जैसे संक्रामक रोग चिंता बढ़ाने वाले हैं। हालिया रिपोर्टस के मुताबिक देश में टोमैटो फ्लू के बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने एडवाइजरी जारी की है। इसमें हैंड फुट एंड माउथ डिजीज (एचएफएमडी) के रूप में टोमैटो फ्लू से बचाव के उपाय करते रहने की सलाह दी गई है। केरल, तमिलनाडु, ओडिशा और हरियाणा से अब तक 100 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं।

वहीं दूसरी ओर मंकीपॉक्स के मामले भी चिंता बढ़ा रहे हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी), पुणे द्वारा किए गए एक प्रारंभिक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने मुख्यत: समलैंगिक यौन संबंधों के कारण फैल रहे इस संक्रमण को लेकर लोगों को अलर्ट रहने की सलाह दी है। दिल्ली में दर्ज किए गए पांच में से तीन मंकीपॉक्स के मामलों में विषमलिंगी संक्रमण प्रसार रिपोर्ट किया गया है, जिसका मतलब है कि यह संक्रमण सिर्फ दो पुरुषों ही नहीं विपरीत लिंग के संक्रमित के साथ संबंध रखने से भी फैल सकता है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से देश में इन दोनों प्रकार के संक्रमण के मामले रिपोर्ट किए जा रहे हैं, ऐसे में सभी लोगों को इन संक्रमण से बचाव के उपाय करते रहना चाहिए। 
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मंकीपॉक्स और टोमैटो फ्लू में अंतर - फोटो : Pixabay
मंकीपॉक्स और टोमैटो फ्लू

अध्ययनों से पता चलता है कि मंकीपॉक्स और टोमैटो फ्लू दोनों के कई लक्षणों के बीच समानता हो सकती है। दोनों ही प्रकार के संक्रमण की स्थिति में त्वचा पर छाले निकलने की समस्या और बुखार देखा जा रहा है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि इसकी पहचान कैसे की जाए कि व्यक्ति मंकीपॉक्स से संक्रमित है या फिर टोमैटो फ्लू का शिकार है? आइए इसके अंतरों को समझने की कोशिश करते हैं।
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मंकीपॉक्स में होने वाली समस्याओं के बारे में जानिए - फोटो : iStock
मंकीपॉक्स और टोमैटो फ्लू के बारे में जानिए

अध्ययनों से पता चलता है कि मंकीपॉक्स एक वायरल जूनोटिक बीमारी है जो मंकीपॉक्स वायरस से संक्रमण के कारण होती है। हालांकि टोमैटो फ्लू वायरल डिजीज है जिसे हाथ, पैर और मुंह की बीमारी (एचएफएमडी) के रूप में भी जाना जाता है।

मंकीपॉक्स संक्रमण के मामले कुछ वर्षों पहले तक अफ्रीकी जंगली क्षेत्रों में अधिक देखे जाते रहे थे हालांकि इस साल की शुरुआत से कई यूरोपीय देशों के बाद अब इसके मामले भारत में भी बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। मंकीपॉक्स और टोमैटो फ्लू दोनों ही बीमारियों को दुलर्भ बीमारियों के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

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मंकीपॉक्स के लक्षण कैसे होते हैं? - फोटो : Pixabay
ज्यादातर लक्षण होते हैं समान

मंकीपॉक्स और टोमैटो फ्लू  के ज्यादातर लक्षण समान ही देखे जाते रहे हैं। सीडीसी के अनुसार मंकीपॉक्स संक्रमण की स्थिति में बुखार, ठंड लगना, सूजन लिम्फ नोड्स, थकावट, मांसपेशियों और पीठ में दर्द के साथ शरीर पर चकत्ते या पानी भरे छाले हो जाते हैं। इसी तरह  टोमैटो फ्लू की स्थिति में भी बुखार, जोड़ों में दर्द और सूजन, शरीर में दर्द और थकान जैसे लक्षण देखे जा सकते हैं। हालांकि गौर करने वाली बात यह है कि टोमैटो फ्लू में शरीर पर निकलने वाले दाने टमाटर की तरह लाल होते हैं, जबकि मंकीपॉक्स में लाल दाने होना जरूरी नहीं है।  
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शरीर में लाल दाने और संक्रमण की स्थिति - फोटो : Pixabay
दोनों में कैसे किया जाए अंतर?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वैसे तो लक्षणों को देखकर स्थिति का सही निदान कर पाना कठिन हो सकता है पर कुछ बातें हैं जो दोनों को अलग बनाती हैं। मंकीपॉक्स में होने वाली त्वचा की समस्या के पहले चरणों में त्वचा पर पपड़ी या फुंसी-फफोले जैसी समस्या नजर आती हैं। हालांकि टोमैटो फ्लू में त्वचा पर दिखने वाले लक्षण यानी कि छाले लाल टमाटर के जैसे होते हैं। हाथों, पैरों और शरीर के अन्य हिस्सों पर इस तरह के लक्षण दे सकते हैं। टोमैटो फ्लू ज्यादातर बच्चों में संक्रमण का कारण बन रहा है जबकि मंकीपॉक्स का संक्रमण किसी भी उम्र में हो सकता है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आपको त्वचा पर छालों के साथ बुखार और अन्य लक्षण दिख रहे हैं तो इस बारे में किसी विशेषज्ञ से सलाह लें। रोग के शुरुआती स्थिति में पता चलने और इलाज मिलने से इसके ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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