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Alert: जुलाई-अगस्त में जिस संक्रामक रोग ने मचाई थी तबाही फिर बढ़ने लगा उसका खतरा, भारत में भी देखे गए थे मामले

Sat, 02 Nov 2024 12:29 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इस साल 14 अगस्त को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मंकीपॉक्स को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया था। यूके में इसके मामले फिर से देखे जा रहे हैं।
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मंकीपॉक्स के मामले - फोटो : freepik.com
दुनिया के कई देश इन दिनों एक बार फिर से गंभीर संक्रामक रोग की चपेट में देखे जा रहे हैं। कोविड-19 के अब भी जारी जोखिमों के बीच यूके में फिर से मंकीपॉक्स (एमपॉक्स) संक्रमण के मामले बढ़ने की खबर हैं।

यूके हेल्थ सेक्योरिटी एजेंसी (यूकेएचएसए) ने एक हालिया रिपोर्ट में बताया है कि ब्रिटेन में एमपॉक्स के नए और अधिक खतरनाक स्ट्रेन क्लेड 1बी से संक्रमण का पहला मामला सामने आया है। ये वही स्ट्रेन है जिसके कारण इसी साल जुलाई-सितंबर के बीच कई देशों में तबाही देखी गई थी। भारत में भी इससे संक्रमित मरीज पाया गया था। 

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यूके में जिस व्यक्ति को मंकीपॉक्स से संक्रमित पाया गया है वह हाल ही में अफ्रीका से लौटा था। उसमें फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दिए, जिसके बाद शरीर पर चकत्ते और अन्य स्वास्थ्य जटिलताएं भी बढ़ने लगीं। टेस्ट में उसे मंकीपॉक्स के नए स्ट्रेन का शिकार पाया गया है। रोगी को फिलहाल आइसोलेशन यूनिट में रखा गया है और उसके संपर्क में आए करीब 10 लोगों की भी निगरानी की जा रही है। 
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मंकीपॉक्स का संक्रमण - फोटो : freepik.com
अभी भी नियंत्रण में नहीं है मंकीपॉक्स का प्रकोप

मंकीपॉक्स का प्रकोप अफ्रीकी देश कांगों में सबसे ज्यादा देखा जाता रहा है। अफ्रीकी संघ के स्वास्थ्य निगरानीकर्ता ने चेतावनी दी है कि एमपॉक्स का प्रकोप अभी भी नियंत्रण में नहीं है। कोविड-19 की तुलना में ये 'अधिक गंभीर' महामारी का कारण बन सकता है, इसके जोखिमों को देखते हुए सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है।

ब्रिटेन में मंकीपॉक्स या एमपॉक्स वायरस के सुपर स्प्रेडर वैरिएंट का पता चलने के बाद स्वास्थ्य विभाग और भी अलर्ट हो गया है। 
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मंकीपॉक्स के बारे में जानिए - फोटो : freepik.com
घोषित हो चुका है वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल

इस वायरस को 14 अगस्त को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया गया था। एमपॉक्स ने इस साल अफ्रीका में 1,000 से अधिक लोगों की जान ले ली है। कांगों के साथ-साथ बुरुंडी, रवांडा, युगांडा, केन्या, स्वीडन, भारत और जर्मनी में एमपॉक्स क्लेड आईबी के मामले सामने आ चुके हैं।

वायरस का यह प्रकार (क्लेड 1बी) तेजी से फैलने और अधिक गंभीर बीमारी का कारण बनने वाला माना जा रहा है। यह संक्रमण मुख्यरूप से संक्रमितों के निकट संपर्क जैसे कि संभोग, त्वचा से त्वचा का संपर्क और संक्रमितों के शरीर के तरल पदार्थ या ड्रॉप लेट्स के संपर्क में आने के कारण फैल सकता है।

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मंकीपॉक्स और इसका जोखिम - फोटो : freepik.com
भारत में भी रिपोर्ट किए गए थे मंकीपॉक्स के मामले

23 सितंबर को केरल के मलप्पुरम जिले में 38 वर्षीय युवक को भी एमपॉक्स संक्रमित पाया गया था, उसमें खतरनाक क्लैड 1बी स्ट्रेन पाया गया था। युवक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से लौटा था। इस साल मंकीपॉक्स के दो सबसे खतरनाक वैरिएंट्स क्लेड 1बी और क्लेड 2 को बढ़ता देखा गया था। 

क्लेड 2 स्ट्रेन के विपरीत 'क्लेड 1' को कई मामलों में अधिक खतरनाक पाया गया है। इसके लक्षणों में एन्सेफलाइटिस, निमोनिया और श्वसन समस्याओं के साथ त्वचा और अधिक गंभीर घाव-छाले होने जैसी जटिलताएं होती हैं। इसका एक से दूसरे व्यक्ति में फैलने की दर भी अधिक बताई जाती है।
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मंकीपॉक्स से बचाव करते रहना जरूरी - फोटो : freepik.com
मंकीपॉक्स के खतरे को लेकर अलर्ट

स्वास्थ्य संगठनों ने सभी देशों को मंकीपॉक्स को लेकर निरंतर सावधानी बरतते रहनी की सलाह दी है। विशेषतौर पर प्रभावित देशों से लौटने वाली लोगों की जांच और निगरानी पर विशेष जोर दिया जा रहा है जिससे संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके।

डब्ल्यूएचओ ने कहा, कांगो सहित दुनिया के कई देशों में नए क्लेड 1बी के मामले सामने आने जारी हैं। एमपॉक्स प्रकोपों की जांच करना, नियंत्रण के प्रयासों को बढ़ाना और लोगों को इसके बारे में सही जानकारी उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।


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स्रोत और संदर्भ
Monkeypox cases surge over 500 per cent in Africa, affecting 19 countries: Africa CDC


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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