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Air Pollution: जहरीली हवा में आपके फेफड़े हो रहे हैं खराब, वायु प्रदूषण से होती है ये बीमारियां

Sat, 02 Nov 2024 09:22 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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वायु प्रदूषण का फेफड़ों पर असर - फोटो : Adobe stock
राजधानी दिल्ली-एनसीआर एक बार फिर से वायु प्रदूषण की चपेट में है। आमतौर पर हर साल दीपावली के बाद बढ़ने वाला प्रदूषण, इस बार पहले से ही लोगों को परेशान करने लगा है। दीपावली के पहले ही धुंध और धुएं जैसे स्थिति दिखने लगी है, आने वाले दिनों में इसके और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। 

राष्ट्रीय राजधानी में शनिवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 344 पर पहुंच गया है, इसे 'बहुत खराब' श्रेणी वाला माना जा रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, 'खराब' एक्यूआई के लंबे समय तक संपर्क में रहने से सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। इतना ही नहीं इसके दीर्घकालिक दुष्प्रभावों में मस्तिष्क, हृदय स्वास्थ्य और तंत्रिकाओं पर भी नकारात्मक असर होने का खतरा रहता है। 

वायु प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर फेफड़ों पर देखा जाता रहा है। कई लोगों में ये क्रोनिक ऑबस्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) और अस्थमा जैसी बीमारियों को बढ़ाने या ट्रिगर करने वाली समस्या भी हो सकती है। आइए जानते हैं कि वायु प्रदूषण किस प्रकार से हमारे फेफड़ों के लिए नुकसानदायक है और इससे सुरक्षित रहने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं?
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वायु प्रदूषण का बढ़ता स्तर - फोटो : Adobe stock
वायु गुणवत्ता के पैमाने

वायु गुणवत्ता खराब होने के बारे में आप भी सुनते आ रहे होंगे। यहां समझना जरूरी है कि कितना एक्यूआई होना किस बात का संकेत है?

0-50 को 'अच्छा', 51-100 को 'संतोषजनक', 101-200 को 'मध्यम', 201-300 को 'खराब', 301-400 को 'बहुत खराब' और 401-500 को 'गंभीर' एक्यूआई मानी जाती है। फिलहाल दिल्ली की एक्यूआई बहुत खराब स्थिति में बनी हुई है। इस तरह की वायु गुणवत्ता को श्वसन तंत्र के लिए काफी हानिकारक माना जाता है।
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फेफड़ों की बीमारियां - फोटो : Adobe stock
अस्थमा और सीओपीडी जैसी बीमारियों का खतरा

अमेरिकन लंग्स एसोसिएशन के विशेषज्ञों के मुताबिक लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने से अस्थमा और सीओपीडी सहित फेफड़ों की कई बीमारियां हो सकती हैं। अगर आप गर्भवती होने के दौरान उच्च स्तर के प्रदूषण के संपर्क में आती हैं, तो चाहे आपको अस्थमा हो या न हो, आपके बच्चे को अस्थमा होने की आशंका अधिक हो सकती है।

वायु प्रदूषण के कारण ब्रोंकाइटिस और निमोनिया जैसे फेफड़ों के संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। कुछ अध्ययनों से ये भी पता चलता है कि पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) जैसे सूक्ष्म कण सांस के माध्यम से फेफड़ों में पहुंचकर फेफड़ों के कैंसर का खतरा भी बढ़ा सकते हैं। 

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प्रदूषण के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Freepik.com
वायु प्रदूषण के कारण हो सकती हैं इस तरह की दिक्कतें

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को निरंतर वायु प्रदूषण से बचाव के लिए प्रयास करते रहना जरूरी है, विशेषतौर पर जिन स्थानों पर एक्यूआई खराब स्तर की है, वहां पर सभी लोगों को और अधिक सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। वायु प्रदूषण के संपर्क में आने के कारण आपको कई तरह की दिक्कतें होने लगती हैं। प्रदूषण के कारण सबसे पहले आपको सांस लेने में कठिनाई महसूस हो सकती है। कुछ अन्य लक्षणों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
  • बहुत अधिक खांसी आना और घरघराहट की समस्या।
  • नाक और गले में जलन होने की दिक्कत।
  • सांस लेते समय दर्द महसूस होना।
  • बाहर गतिविधि करते समय आपको अधिक सांस फूलने की समस्या होना।
  • अस्थमा अटैक या सीओपीडी के लक्षण बढ़ने की समस्या होना।
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वायु प्रदूषण से करें बचाव - फोटो : Adobe stock
कैसे करें प्रदूषण से बचाव?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, प्रदूषित हवा में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 जैसे सूक्ष्म कणों की मौजूदगी के कारण अल्पकालिक और दीर्घकालिक कई तरह की समस्याओं का खतरा हो सकता है। वायु प्रदूषण और इसके कारण होने वाले जोखिमों से बचाव के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
  • जिन स्थानों पर एक्यूआई बहुत खराब स्तर की है वहां पर बाहर व्यायाम करने से बचें।
  • लकड़ी या कचरा न जलाएं।
  • वायु प्रदूषण से बचाव के लिए मास्क पहनना सबसे जरूरी है। अच्छी क्वालिटी के मास्क आपको प्रदूषित हवा से बचा सकते हैं।
  • जिन लोगों को पहले से ही अस्थमा या सीओपीडी जैसी समस्या रही है उन्हें हमेशा अपने साथ इनहेलर रखना चाहिए।


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स्रोत और संदर्भ
Air pollution and chronic airway diseases: what should people know and do?

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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