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Study: इस थेरेपी से गंजेपन में पा सकते हैं लाभ, बालों की समस्या से परेशान लोगों के लिए डॉक्टर ने बताए उपाय

Thu, 13 Jul 2023 02:22 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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गंजेपन को कैसे ठीक करें? - फोटो : iStock
कुछ दशकों पहले तक जहां बालों की समस्या को उम्र से संबंधित माना जाता था, वहीं वर्तमान में युवा आबादी में इसका जोखिम काफी तेजी से बढ़ता देखा जा रहा है। नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) की एक रिपोर्ट के मुताबिक करीब 25 फीसदी युवा आबादी मेल पैटर्न बाल्डनेस (एमपीबी) का शिकार है, इसमें 20-25 की आयु तक पहुंचते-पहुंचते बालों के झड़ने और घनत्व कम होने की समस्या होने लग जाती है।

50 की आयु तक लगभग 50% पुरुषों को यह प्रभावित करता है। गौरतलब है कि सिर्फ पुरुष ही नहीं बड़ी संख्या में महिलाएं भी बालों की समस्या से परेशान हैं। अमेरिका में 50 फीसदी महिलाओं में बालों के झड़ने की समस्या का अनुमान है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, कम उम्र में बढ़ती बालों की समस्या-गंजेपन के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें लाइफस्टाइल-आहार में गड़बड़ी, अधिक तनाव, वातावरणीय समस्याएं प्रमुख हैं। गंजेपन की समस्या से परेशान लोग इसके लिए कई तरह के प्रयास करते रहते हैं, पर लाभ नहीं मिल पाता है। अध्ययन में शोधकर्ताओं ने मॉलिक्यूलर थेरपी के बारे में बताया है जिसे कारगर प्रभावों वाला माना जा रहा है।
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गंजेपन में किन थेरेपी से मिल सकता है लाभ - फोटो : istock

अध्ययन में क्या पता चला?

गंजेपन को किस प्रकार से ठीक किया जा सकता है, इसमें कौन सी थेरपी कारगर हो सकती है, इस बारे में समझने के लिए कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अध्ययन किया। इसमें टीम ने पाया कि बोटोक्स जैसी तकनीक वाली मॉलिक्यूलर थेरपी के माध्यम से गंजेपन में लाभ पाया जा सकता है। सबसे खास बात माइक्रोनिडलिंग की इस प्रक्रिया को अपेक्षाकृत दर्द रहित माना जाता है।
 
नेचर ट्रस्टेड जर्नल में प्रकाशित इस शोध में वैज्ञानिकों ने बताया कि त्वचा पर होने वाले मस्से, बालों की समस्याओं के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं और इन्हीं के माध्यम से गंजेपन को ठीक भी किया जा सकता है।
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बालों की समस्या और इलाज - फोटो : istock
चूहों पर किया गया अध्ययन

शोध के लिए वैज्ञानिकों ने चूहों को शामिल किया। इनमें पाया गया कि त्वचा की पिगमेंट कोशिकाएं उच्च मात्रा में ऑस्टियोपॉन्टिन प्रोटीन का उत्पादन करती हैं जो बालों की स्टेम सेल्स के पास होती हैं। अगर थेरेपी के माध्यम से इसे लक्षित किया जाता है तो बालों के विकास को बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

निडिल के माध्यम से त्वचा की ऊपरी कोशिकाओं में अगर मॉलिक्यूल्स डाले जाएं तो बालों के विकास को बढ़ाया जा सकता है। हालांकि इसकी प्रभाविकता को जानने के लिए अब भी शोध जारी है।

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बालों की समस्या के इलाज के दौरान बरतें सावधानी - फोटो : istock
पीआरपी थेरेपी भी रही है काफी चर्चा में

अमर उजाला से बातचीत में दिल्ली स्थित त्वचा रोग विशेषज्ञ और कॉस्मेटिक सर्जन डॉ समीर भारद्वाज बताते हैं, गंजेपन के इलाज के लिए हेयर ट्रांसप्लांट से लेकर पीआरपी, कपिंग थेरपी जैसे कई उपाय काफी चर्चा में रहे हैं, पर ये कितने प्रभावी होंगे, किस स्तर के प्रशिक्षित लोग इसे कर रहे हैं, बहुत कुछ इन बातों पर निर्भर करता है। गलत तरीके से किए गए हेयर ट्रांसप्लांट के कारण मौत के भी मामले सामने आए हैं।

प्लेटलेट रिच प्लाज्मा (पीआरपी) थेरपी इंजेक्शन भी काफी चर्चा में रही है। इसमें मुख्यरूप से  थ्रोम्बोसाइटोपेनिया के इलाज पर ध्यान दिया जाता है जो रक्त में प्लेटलेट का स्तर बहुत कम कर देती है। इससे भी लोगों को लाभ मिला है, लेकिन ये थेरपी 'वन साइज डज नॉट फिट फॉर ऑल' जैसी है। किसी भी थेरपी से पहले त्वचा की जांच और गंजेपन के कारणों को समझना जरूरी होता है।
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बालों के लिए सही इलाज क्या है? - फोटो : iStock
कपिंग थेरपी से मिल सकता है बालों को बढ़ावा

लखनऊ में कपिंग थेरपी एक्सपर्ट डॉ जोहैब काजी बताते हैं, बालों के झड़ने की शुरुआती स्थिति में, जहां रोमछिद्र बंद नहीं होते हैं इसमें कपिंग थेरेपी के माध्यम से गंदे रक्त को बाहर निकालकर नए खून के संचार को बढ़ावा दिया जाता है, जो तेजी से नए बालों के विकास में मदद कर सकती है। पर यहां भी जरूरी है कि पहले गंजेपन के असली कारणों का सही ढंग से इलाज किया जाए। थेरपिस्ट का प्रशिक्षित होना बहुत आवश्यक है, वरना इससे फायदे की जगह नुकसान हो सकता है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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