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कोरोना अलर्ट: चमगादड़ नहीं अब हिरणों से नए वैरिएंट्स के संक्रमण का खतरा, अध्ययन में बड़ा खुलासा

Thu, 13 Jul 2023 12:52 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना के नए वैरिएंट्स को लेकर जोखिम - फोटो : Pixabay
कोरोना वायरस पिछले तीन साल से अधिक समय से वैश्विक चिंता का कारण बना हुआ है। दुनियाभर में अब तक यह 69 करोड़ से अधिक लोगों को शिकार बना चुका है। भले ही इन दिनों कोरोना संक्रमण की रफ्तार काफी नियंत्रित है पर वैज्ञानिकों का कहना है कि इसे हल्के में लेने की गलती नहीं की जानी चाहिए, वायरस में लगातार म्यूटेशन हो रहा है जिससे नए वैरिएंट्स का खतरा बना हुआ है।

एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के कुछ स्टेट्स में ओमिक्रॉन के नए सब-वैरिएंट EU.1.1 के बारे में पता चला है जिसको लेकर शोध जारी है।

कोरोना की शुरुआत से ही यह बड़ा सवाल रहा है कि वायरस इंसानों तक कैसे पहुंचा? इसको लेकर वैज्ञानिकों की एक थ्योरी कहती है कि चमगादड़ इसका स्रोत हो सकते हैं। हालांकि अब हालिया शोध ने इस चर्चा को नई दिशा दी है। वैज्ञानिकों ने पाया कि इस बार चमगादड़ नहीं, खतरा हिरण से हो सकता है। वैश्विक स्तर पर बड़ी संख्या में हिरणों की आबादी संक्रमित देखी जा रही है, जिनसे न सिर्फ वायरस में म्यूटेशन का जोखिम है, साथ ही ये इंसानों में संक्रमण के जोखिमों को भी बढ़ाने वाली हो सकती है।
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हिरणों में कोरोना संक्रमण को लेकर जोखिम - फोटो : Pixabay
क्यों हो रहा है वैरिएंट में म्यूटेशन?

वैज्ञानिकों के लिए फिलहाल बड़ा सवाल यह था कि जब वैश्विक स्तर पर कोरोना की रफ्तार कम हो रही है, तो वैरिएंट में म्यूटेशन क्यों हो रहा है? इसे समझने के लिए एक बार फिर से जानवरों की आबादी में कोरोना संक्रमण का पता लगाना शुरू किया गया। इस दौरान अमेरिकी शोधकर्ताओं की टीम ने पाया कि यहां हर 10 में से करीब तीन हिरण कोरोना संक्रमित थे, जिससे स्पष्ट होता है कि वायरस अब इंसानों के साथ जानवरों के माध्यम से खुद को म्यूटेट कर रहा है।
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लगातार म्यूटेट हो रहा है कोरोना वायरस - फोटो : pixabay
हिरणों की बड़ी आबादी में संक्रमण का जोखिम

यहां जानना जरूरी है कि किसी की वायरस को जीवित रहने के लिए लगातार म्यूटेट होते रहना आवश्यक है और इसके लिए किसी स्रोत की जरूरत होती है। चूंकि इंसानों में वैक्सीनेशन और प्राकृतिक प्रतिरक्षा के कारण संक्रमण का जोखिम कम हो गया है, लिहाजा वायरस ने म्यूटेट होने के लिए इस बार हिरणों को अपना स्रोत बनाया है।  

अमेरिकी कृषि विभाग के अनुसार, मनुष्यों के माध्यम से कम से कम 100 बार हिरणों में वायरस फैला है।  नवंबर 2021 से अप्रैल 2022 के बीच अमेरिका के आधे हिस्से में 12,000 से अधिक हिरणों का परीक्षणों किया गया, जिससे पता चलता है कि हिरण लगभग हर वैरिएंट (अल्फा, गामा, डेल्टा सहित सभी प्रमुख वेरिएंट) के संपर्क में थे। अब भी हिरणों में संक्रमण का जोखिम अधिक है जहां से नए वैरिएंट्स के उभरने का जोखिम बना हुआ है।

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जंगली और घरेलू जानवरों में भी कोरोना का जोखिम - फोटो : Pixabay
घरेलू जानवर भी हो सकते हैं संक्रमण का स्रोत

शोधकर्ताओं ने बताया कि हिरण के अलावा, वायरस के कई वैरिएंट्स जंगली और घरेलू जानवरों में भी पाए गए हैं, जिनमें कुत्ते, शेर, मिंक, चूहे, ऊदबिलाव, गोरिल्ला और बिल्लियां भी शामिल हैं। सफेद पूंछ वाले हिरणों के अलावा मिंक और घरेलू बिल्लियों से इंसानों में वायरस के संचरण का संदेह है।

शोधकर्ताओं ने कहा- इस अध्ययन के निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं क्योंकि जानवरों की आबादी कोरोना वायरस के लिए जलाशय की तरह हो सकती है, जिसमें वायरस गुप्तरूप से फैल रहा है। अगर यहां से कोई अति संक्रामक वैरिएंट उभरता है तो इससे एक बार फिर दुनियाभर में कोरोना के मामलों के बढ़ने का खतरा हो सकता है।
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कोविड-19 के जोखिमों को लेकर रहें अलर्ट - फोटो : iStock
क्या कहते हैं शोधकर्ता?

मिसौरी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और अध्ययन के लेखकों में से एक प्रोफेसर शिउ-फेंग हेनरी वान कहते हैं, हिरण, बिल्ली-कुत्ते नियमित रूप से मनुष्यों के संपर्क में रहते हैं। हमें भविष्य में कोरोना के जोखिमों के लिए इन स्रोतों को अनदेखा नहीं करना चाहिए। शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया कि हिरण, मानव भोजन अपशिष्ट, मास्क या अन्य अपशिष्ट उत्पादों से वायरस के संपर्क में आ सकते हैं।

जानवरों से इंसानों में संक्रमण और यहां से नए वैरिएंट्स के म्यूटेशन को लेकर गंभीरता से ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। चमगादड़ों के बाद अब हमारे पास हिरण भी एक जानवर है जो वायरस के संक्रमण का स्रोत हो सकता है।


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स्रोत और संदर्भ
Transmission of SARS-CoV-2 in free-ranging white-tailed deer in the United States

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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