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अध्ययन में बड़ा दावा: चाय पीने से कम हो सकता है टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम, डॉक्टर्स से जानिए यह कितना लाभकारी?

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डायबिटीज के जोखिम को कैसे कम करें? - फोटो : Pixabay
डायबिटीज, वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। पिछले कुछ दशकों में भारत सहित दुनिया के कई देशों में यह स्वास्थ्य समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है। डॉक्टर्स कहते हैं, डायबिटीज को जड़ से ठीक नहीं किया जा सकता है, इसे नियंत्रण में रखने के लिए उपचार के तरीकों को प्रयोग में लाया जाता रहा है। डायबिटीज को कैसे कंट्रोल में रखा जा सकता है, इस बारे में अध्ययन कर रही शोधकर्ताओं की टीम ने बड़ा दावा किया है। आठ देशों में 10 लाख से अधिक लोगों पर किए गए शोध से पता चला है चाय पीना डायबिटीज को कंट्रोल में रखने का एक प्रभावी तरीका हो सकता है। विशेषकर यह टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

स्वीडन में इस साल (19-23 सितंबर) की यूरोपीय एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज (ईएएसडी) की वार्षिक बैठक में प्रस्तुत किए गए रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने बताया कि चाय पीने से डायबिटीज को कंट्रोल किया जा सकता है। निष्कर्ष में वैज्ञानिकों ने बताया कि ब्लैक, ग्रीन या ओलोंग टी के संयमित सेवन से मधुमेह रोगियों में लाभ देखा गया है।

अध्ययन में पाया गया कि 10 वर्षों की औसत अवधि में दिन में तीन से चार कप चाय, टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को 17 प्रतिशत तक कम करने में सहायक हो सकती है। सही तरीके से चाय पीने की आदत बनानी आपके लिए लाभकारी हो सकती है। आइए इस अध्ययन के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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चाय पीने से डायबिटीज में लाभ - फोटो : Pixabay

चाय से कम हो सकता है डायबिटीज का जोखिम

वार्षिक बैठक में शोधकर्ताओं की टीम ने बताया कि यह लंबे समय से ज्ञात है कि चाय में विभिन्न प्रकार के एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-इंफ्लामेटरी और एंटीकार्सिनोजेनिक यौगिक पाए जाते हैं जोकि शरीर के लिए कई प्रकार से लाभकारी हो सकते हैं। अध्ययन और मेटा-विश्लेषण में चाय पीने और टाइप-2 डायबिटीज के कम जोखिम के बीच संबंध पाया गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस बारे में डायबिटीज रोगियों को डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। अध्ययन के रिपोर्ट फिलहाल इस दिशा में बेहतर संकेत देते हैं।
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टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को कम कर सकती है चाय - फोटो : Pixabay
अध्ययन में क्या पता चला?

इस अध्ययन के पहले चरण में बिना टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम वाले (औसत 42 की आयु) 5,199 वयस्कों (2583 पुरुष, 2616 महिलाओं) के डेटा का अध्ययन किया गया। साल 1997 से 2009 तक इन लोगों पर नजर रखी गई। प्रतिभागियों ने भोजन और पेय की आवृत्ति, नियमित व्यायाम, धूम्रपान और शराब के सेवन जैसे जीवनशैली के कारकों के बारे में जानकारी दी। इनमें से कुल 2,379 (46%) प्रतिभागियों बताया कि वे नियमित रूप से चाय भी पाते हैं। इस शोध के अंत में विशेषज्ञों ने पाया कि 5,199 में से 522 (10%) प्रतिभागियों में टाइप-2 डायबिटीज विकसित हो गया। 

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डायबिटीज विकसित होने का जोखिम कैसे कम करें? - फोटो : Istock
दूसरे चरण का अध्ययन

अध्ययन के विश्लेषण में शोधकर्ताओं ने पाया कि उम्र, लिंग और शारीरिक निष्क्रियता जैसे बढ़ते जोखिम कारकों के समायोजन के साथ, चाय पीने वालों में समय के साथ डायबिटीज विकसित होने का खतरा कम पाया गया। अध्ययन के अगले चरण में, शोधकर्ताओं ने सितंबर 2021 तक आठ देशों के 10,76,311 प्रतिभागियों का डेटा अध्ययन किया। इस आधार पर वैज्ञानिकों की टीम ने बताया कि विभिन्न प्रकार की चाय (ग्रीन टी, ओलोंग टी और ब्लैक टी) डायबिटीज के जोखिम को कम करने वाली हो सकती है। हालांकि बस ध्यान इस बात का रखें कि इसमें एडेड शुगर को न शामिल किया जाए।
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चाय में विशेष घटक कम कर सकते हैं डायबिटीज का खतरा - फोटो : iStock
क्या कहते हैं शोधकर्ता?

चीन स्थित वुहान यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के प्रमुख और अध्ययन के लेखक शियायिंग ली कहते हैं, "हमारे परिणाम रोमांचक हैं, क्योंकि इससे पता चलता है कि  टाइप-2 डायबिटीज के विकास के जोखिम को कम करने के लिए दिन में तीन-चार कप चाय पीने से लाभ मिल सकता है। चाय में विशेष घटक जैसे कि पॉलीफेनोल्स, ब्लड शुगर के स्तर को कम करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन शरीर में इन बायोएक्टिव यौगिकों की पर्याप्त मात्रा की आवश्यकता हो सकती है। इसका मतलब यह है कि डायबिटीज से बचाव के लिए दिन में तीन से चार कप चाय पीने की आवश्यकता हो सकती है। इसपर और विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है।
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डायबिटीज को कंट्रोल में रखने के उपाय जरूरी - फोटो : iStock
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

भारतीय लोगों पर इस अध्ययन की प्रमाणिकता को जानने के लिए हमने मुंबई स्थित एंडोक्रोनोलॉजिस्ट डॉ दीपक.एम.सहाय से संपर्क किया। डॉ दीपक कहते हैं, यह लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है कि चाय की पत्तियों में मौजूद कुछ यौगिक डायबिटीज में लाभकारी हो सकते हैं। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि जिन देशों में ये अध्ययन किए गए हैं वहां चाय में चीनी मिलाकर सेवन करने की परंपरा नहीं है।

यह संभव है कि अगर बिना चीनी की चाय का सेवन किया जाए तो इससे लाभ हो सकता है। पर इस बारे में किसी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए एशियाई लोगों पर इस संबंध में और विस्तार से शोध किए जाने की आवश्यकता है।
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ग्रीन टी-ओलोंग टी हो सकती है फायदेमंद - फोटो : istock
पारंपरिक चिकित्सा में भी चाय के लाभ का वर्णन

गौरतलब है कि चीन की पारंपरिक ओलोंग टी या दुनियाभर में प्रयोग में लाई जाने वाली ग्रीन-टी को कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट्स का स्रोत पाया गया है। ये डायबिटीज में भी लाभकारी हो सकती हैं। अगर काली चाय का सेवन बिना चीनी के किया जाता है तो इससे भी लाभ मिल सकता है। 

निष्कर्ष के बावजूद, ध्यान देने की आवश्यकता है कि अध्ययन सिर्फ अवलोकन पर आधारित है और यह चाय पीने से टाइप-2 डायबिटीज को ठीक करने की प्रमाणिकता नहीं देता है। बिना डॉक्टरी सलाह के चाय की आवृत्ति न बढ़ाएं। 


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स्रोत और संदर्भ
Drinking plenty of tea may reduce the risk of developing type 2 diabetes, finds study in over a million adults


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