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Health Tips: स्ट्रेस और एंग्जायटी से पाना चाहते हैं छुटकारा? दिनचर्या में करें ये तीन आसान बदलाव, मिलेगा फायदा

Tue, 29 Jul 2025 06:26 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

स्ट्रेस और एंग्जायटी एक ऐसी समस्या है जिससे बहुत से लोग परेशान रहते हैं। वैसे तो इसको मैनेज करने के कई उपाय हैं, लेकिन आज हम आपको कुछ ऐसे उपाय के बारे में बताएंगे जो बहुत सरल हैं और उसे आसानी से अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है। आइए जानते हैं।
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मानसिक तनाव - फोटो : Freepik.com
Stress Management Tips: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक तनाव लगभग हर व्यक्ति की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। काम का दबाव, सामाजिक अपेक्षाएं, रिश्तों की उलझनें और भविष्य की अनिश्चितताएं लगातार हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही हैं। स्ट्रेस और एंग्जायटी का नकारात्मक प्रभाव न सिर्फ आपके दिमाग पर पड़ता है बल्कि इससे आपके शारीरिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है, जैसे नींद की कमी, पाचन संबंधी समस्याएं, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली और लगातार थकान।

विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे में आप अपनी दिनचर्या में कुछ छोटे और आसान बदलाव करके स्ट्रेस और एंग्जायटी से छुटकारा पा सकते हैं। आइए इस लेख में ऐसे ही तीन ऐसे ही तीन महत्वपूर्ण बदलावों के बारे में जानते हैं, जिन्हें अपनाकर आप मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकते हैं और बेहतर जीवन बिता सकते हैं।
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दौड़ना - फोटो : Adobe Stock
नियमित व्यायाम और शारीरिक गतिविधि
स्ट्रेस कम करने का पहला आसान बदलाव है नियमित व्यायाम। रोजाना 20-30 मिनट की ब्रिस्क वॉकिंग, योग या स्ट्रेचिंग तनाव को कम करती है। व्यायाम से एंडॉर्फिन हार्मोन रिलीज होता है, जो मूड को बेहतर बनाता है। योग में प्राणायाम और मेडिटेशन, जैसे अनुलोम-विलोम, मन को शांत करते हैं। घर पर हल्की एरोबिक्स या डांस भी एंग्जायटी को कम करने में मदद करता है।

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स्वस्थ आहार का करें सेवन - फोटो : Freepik.com
संतुलित आहार और हाइड्रेशन
दूसरा बदलाव है संतुलित आहार अपनाना। ओमेगा-3 युक्त खाद्य पदार्थ, जैसे मछली, अखरोट और अलसी के बीज, मस्तिष्क स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं। विटामिन बी और मैग्नीशियम से भरपूर खाद्य, जैसे हरी सब्जियां, केला और बादाम, तनाव को कम करते हैं। चीनी और कैफीन का अधिक सेवन एंग्जायटी को बढ़ा सकता है, इसलिए इनका सेवन सीमित करें। रोजाना 2-3 लीटर पानी पीना डिहाइड्रेशन से बचाता है, जो स्ट्रेस को नियंत्रित करता है।

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माइंडफुलनेस - फोटो : Adobe Stock
माइंडफुलनेस
तीसरा बदलाव है माइंडफुलनेस और अच्छी नींद की लेना। माइंडफुलनेस मेडिटेशन, जैसे 5-10 मिनट की गहरी सांस लेने की तकनीक मानसिक तनाव को कम करती है। सोने से पहले स्क्रीन टाइम (मोबाइल, टीवी) कम करें, क्योंकि नीली रोशनी नींद को बाधित करती है। रोजाना 7-8 घंटे की गहरी नींद तनाव को कम करती है और मस्तिष्क को रिचार्ज करती है। सोने से पहले गुनगुना पानी पीना या किताब पढ़ना नींद में सुधार करता है।
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जर्नलिंग - फोटो : Adobe Stock
जर्नलिंग: भावनाओं को कागज पर लिखें
अपनी भावनाओं और विचारों को किसी डायरी या नोटबुक में लिखना, यानी जर्नलिंग, तनाव और चिंता को कम करने का एक बेहतरीन तरीका है। जब आप अपने मन की बातों को लिखते हैं, तो वे व्यवस्थित होने लगती हैं और आपको अपनी भावनाओं को समझने में मदद मिलती है। यह नकारात्मक विचारों को दूर करने, समस्याएं सुलझाने में मदद करता है। रोजाना बस 10-15 मिनट लिखने से आप मानसिक रूप से बहुत शांत और हल्का महसूस करेंगे।

इसके अलावा दोस्तों और परिवार से बात करना और शौक में समय बिताना भी मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। यदि स्ट्रेस या एंग्जायटी गंभीर हो, जैसे लगातार चिंता, अनिद्रा या पैनिक अटैक, तो मनोचिकित्सक या काउंसलर से संपर्क करें। नियमित स्वास्थ्य जांच और स्वस्थ दिनचर्या अपनाकर मानसिक शांति और खुशहाल जीवन व्यतीत जा सकता है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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