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Health Alert: 30 की आयु के बाद बढ़ जाता है कई बीमारियों का खतरा, समय रहते करा लें जांच ताकि बिगड़ने न पाए बात

Tue, 24 Dec 2024 07:37 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अगर आपकी उम्र 30 साल के आसपास है तो आपको कुछ जांच अवश्य करा लेनी चाहिए। पिछले 10 साल के आंकड़े देखें तो पता चलता है कि कम उम्र के लोगों में भी कई प्रकार की क्रोनिक बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। 
आइए जानते हैं कि आपके लिए कौन से जांच जरूरी हैं।
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30 की उम्र के बाद कौन से जांच जरूरी - फोटो : Freepik.com
लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के कारण कई प्रकार की गंभीर बीमारियों का खतरा वैश्विक स्तर पर बढ़ता जा रहा है। पिछले 10 साल के आंकड़े देखें तो पता चलता है कि कम उम्र के लोगों में भी कई प्रकार की क्रोनिक बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। कम उम्र में बीमारियों का बढ़ना जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाली समस्या हो सकती है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ किशोरावस्था से ही सेहत का ख्याल रखने की सलाह देते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पहले से ही सावधानियां बरतनी जरूरी हैं ताकि भविष्य में किसी गंभीर खतरे से सुरक्षित रहा जा सके। उम्र तो बढ़नी है, उम्र बढ़ेगी तो रोग-प्रतिरोधक क्षमता घटेगी, शरीर कमजोर होगा, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ने लगेगा। चिकित्सक कहते हैं कि इसके लिए समय-समय पर जांच कराते रहना और पोषण का ध्यान रखना आवश्यक हो जाता है।
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30 की उम्र के बाद बीमारियों का खतरा - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

आजकल भाग-दौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास खुद के लिए भी समय नहीं है। महिलाएं घर और परिवार की जिम्मेदारियों की वजह से सेहत को नजरअंदाज करती हैं, तो पुरुष ऑफिस के कामकाज की वजह से सेहत को लेकर लापरवाह देखे जाते हैं। हालांकि अगर आपकी उम्र 30 साल के आसपास है तो आपको कुछ जांच अवश्य करा लेनी चाहिए। 

सफदरजंग अस्पताल दिल्ली में कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के निदेशक डॉ. जुगल किशोर कहते हैं, उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों और हड्डियों के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर होने लगती है। इसके अलावा वजन बढ़ना, मधुमेह होने का जोखिम, हृदय संबंधी समस्याएं, उच्च रक्तचाप, तनाव-अवसाद का खतरा भी हो सकता है। इनसे बचे रहने के लिए प्रतिदिन व्यायाम, योग और मेडिटेशन करते रहें। चिकित्सक के परामर्श के अनुसार हर छह महीने या एक साल में पूरा हेल्थ चेकअप जरूर कराएं।

आइए जानते हैं कि आपके लिए कौन-कौन से टेस्ट जरूरी हैं?
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डायबिटीज की समस्या - फोटो : Freepik.com
ब्लड शुगर की कराते रहें जांच

चाहे आपमें मधुमेह के लक्षण न दिख रहे हों या परिवार में पहले किसी को कभी मधुमेह की समस्या न हुई हो, फिर भी आपको 30 की आयु के बाद फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज टेस्ट, रैंडम प्लाज्मा ग्लूकोज टेस्ट, पोस्टप्रैंडियल ब्लड शुगर टेस्ट, एचबीए1सी जैसी जांचें करा लेनी चाहिए। इसके अलावा अगर आपके माता-पिता में किसी को शुगर की समस्या रही हो तो आप अपने जोखिमों को लेकर और भी सावधानी बरतें। 

ब्लड प्रेशर की जांच

उच्च रक्तचाप नियंत्रित न होने पर हार्ट अटैक और स्ट्रोक का कारण बन सकता है। इसलिए आप घर पर ही ब्लड प्रेशर मॉनिटर लाकर अपनी जांच कर सकते हैं।

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हड्डियों की समस्या - फोटो : Freepik.com
हड्डियों के लिए टेस्ट

ऑस्टियोपोरोसिस होने पर हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए आप डुअल-एनर्जी एक्स-रे एब्जॉर्पटियोमेट्री स्कैन करा लें। इससे हड्डियों में कमजोरी, विटामिन डी की कमी और बोन डेंसिटी का पता लग सकता है।

थायरॉयड

थायरॉयड ग्रंथि में गड़बड़ी की वजह से अंडर एक्टिव थायरॉइड या हाइपोथायरायडिज्म हो सकता है। यह ग्रंथि हार्मोन टी-3, टी-4 और टीएसएच का स्राव करती है, जो शरीर के चयापचय को नियंत्रित करने का काम करती है। इनमें से कोई भी परिवर्तन शरीर में गंभीर परिवर्तन उत्पन्न कर सकता है।
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खून की जांच - फोटो : Freepik.com
कंप्लीट ब्लड काउंट

इस जांच की मदद से रक्त में मौजूद रेड ब्लड सेल्स, व्हाइट ब्लड सेल्स, हीमोग्लोबिन, प्लेटलेट्स आदि की संख्या पता चलता है। स्वस्थ रहने के लिए इनका संतुलित मात्रा में होना बहुत जरूरी है।

कैंसर का ध्यान

हर साल ब्रेस्ट स्क्रीनिंग कराने से  महिलाओं में शुरुआती स्टेज में गांठ बनने से रोकने में मदद मिलती है। महिलाएं साल में एक बार पैप स्मीयर और मैमोग्राम करा सकती हैं। पुरुष प्रोस्टेट से जुड़ी समस्याओं के लिए डिजिटल रेक्टल एग्जामिनेशन और प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजन करा सकते हैं। लंग कैंसर के लिए एक्स-रे, कोलोरेक्टल कैंसर के लिए सालाना मल की जांच जरूरी है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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