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Study: अगर आपको ड्राई आइज की समस्या है तो यह डिप्रेशन का भी बढ़ा सकती है खतरा, जानिए इन दोनों का संबंध

Mon, 19 Jun 2023 06:02 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ड्राई आइज की समस्याएं - फोटो : iStock
ड्राई आइज यानी कि आंखों में सूखापन की समस्या होना काफी सामान्य है। हमारी आंखों में नमी के बनाए रखने के लिए आंसू का उत्पादन होता रहता है, हालांकि इस समस्या में आंसू कम या बिल्कुल भी नहीं बनते हैं, लिहाजा आंखों में सूखापन बढ़ जाता है जिससे लालिमा, दर्द, जलन और चीजों को देखने में भी दिक्कतें होने लग जाती हैं। हर साल वैश्विक स्तर पर लाखों लोगों में ड्राई आइज की समस्या का निदान होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, खराब लाइफस्टाइल विशेषकर मोबाइल-लैपटॉप जैसी स्क्रीन पर अधिक समय बिताने वाले लोगों में इसका खतरा अधिक हो सकता है। 

इस बीच अध्ययनकर्ताओं ने बताया है कि ड्राई आइज की इस समस्या को सिर्फ आंखों की दिक्कत तक ही सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। अगर यह लंबे समय से बनी हुई है तो आपको डिप्रेशन जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का भी खतरा हो सकता है। अगर आपको भी आंखों में इस तरह की दिक्कतें रहती हैं तो किसी डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
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मानसिक स्वास्थ्य की समस्या - फोटो : istock
ड्राई आइज और डिप्रेशन का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया जिन लोगों में ड्राई आइज की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, उनमें लो मूड की समस्या अधिक देखी जाती है। इस आधार पर किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि ड्राई आइज, रोगियों में अवसाद के जोखिमों को भी बढ़ाने वाली हो सकती है। आंखों की यह समस्या मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकती है।  

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि वैश्विक स्तर पर 30-40 फीसदी लोगों को ड्राई आइज की समस्या हो सकती है। यह समस्या तब होती है जब आपके कॉर्निया को कवर करने के लिए पर्याप्त आँसू नहीं होते हैं।
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मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं - फोटो : istock
अध्ययन में क्या पता चला?

ड्राई आइज के कारण डिप्रेशन होने का जोखिम पहले के अध्ययनों में भी स्पष्ट हो चुका है। इस नए शोध में इसकी बारीकी को समझने का प्रयास किया गया है। शोधकर्ताओं ने नए अध्ययन में पाया गया कि सर्वेक्षण में शामिल 401 लोगों में से 36.7% को ड्राई आइज और 23.7% को अवसाद-तनाव या स्ट्रेस की समस्या थी। अध्ययन में पाया गया कि जिन रोगियों में अवसाद का निदान किया गया है उनमें ड्राई आइज के अधिक गंभीर लक्षण थे।

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आंखो की समस्याएं - फोटो : istock
दोनों समस्याएं एक दूसरे से संबंधित

शोधकर्ताओं ने पाया कि ड्राई आइज की दिक्कत आपके जीवन के दैनिक आनंद में बाधा डाल सकती है, जिससे डिप्रेशन के लक्षण और भी बिगड़ने का खतरा रहता है। पिट्सबर्ग स्कूल ऑफ मेडिसिन विश्वविद्यालय में नेत्र विज्ञान के प्रोफेसर दीपिंदर कहते हैं, क्या ड्राई आइज रोग अवसाद का कारण बनती है या अवसाद के कारण ड्राई आइज की समस्या होती है, यह फिलहाल उसी तरह है कि पहले मुर्गी आई या अंडा?
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मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं शोधकर्ता?

मोंटेफियोर हेल्थ सिस्टम में मनोचिकित्सक प्रो. हॉवर्ड एल. फॉर्मन कहते हैं, अवसाद केवल 'दिमाग तक ही सीमित नहीं है। ड्राई आइज की समस्या किस प्रकार से डिप्रेशन के जोखिम को बढ़ाने वाली हो सकती है, इसे फिलहाल अभी समझने की कोशिश की जा रही है, फिलहाल अब तक पाया गया है कि इंफ्लामेशन इसका एक कारण हो सकता है। आंख की सतह पर सूजन अवसाद के उच्च जोखिम का कारण बन सकती है। 

शोधकर्ताओं का मानना है कि एंटीडिप्रेसेंट जो आपके सिस्टम में सेरोटोनिन को बढ़ाते हैं और अवसाद के लक्षणों को कम करते हैं, इसके कारण भी शरीर में सूजन बढ़ सकती हैं, जो बदले में ड्राई आइज के लक्षणों को खराब कर सकती है। 


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स्रोत और संदर्भ
Prevalence of Depression Among People With Dry Eye Disease

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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