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Study: मस्तिष्क को गंभीर क्षति पहुंचाने वाले कारकों का चल गया पता, इस आदत से सबसे ज्यादा खतरा

Tue, 09 Apr 2024 09:10 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मस्तिष्क को होने वाली समस्याएं - फोटो : Pixabay
मस्तिष्क से संबंधित कई तरह की बीमारियों का खतरा वैश्विक स्तर पर बढ़ता देखा जा रहा है। लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के अलावा कई प्रकार के पर्यावरणीय कारक भी इसके जिम्मेदार माने जाते रहे हैं। मस्तिष्क पूरे शरीर का मास्टरमाइंड है, ऐसे में इसमें होने वाली किसी भी तरह की दिक्कत का असर संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाला हो सकता है। 

मस्तिष्क में होने वाली बीमारियां कई प्रकार की हो सकती हैं, ब्रेन ट्यूमर और डिमेंशिया-अल्जाइमर की समस्या को गंभीर समस्याकारक माना जाता है। कई प्रकार के जोखिम कारक मस्तिष्क की बीमारियों को बढ़ाने वाले हो सकते हैं।

ब्रेन की बढ़ती समस्याओं के क्या कारण हो सकते हैं? इस बारे में नेचर कम्युनिकेशंस जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने विस्तृत जानकारी साझा की है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया, उम्र के साथ ब्रेन की दिक्कतें तो बढ़ती ही हैं, इसके अलावा कुछ प्रकार के पर्यावरणीय कारकों के चलते भी मस्तिष्क से संबंधित रोगों का खतरा हो सकता है। इसके लिए जिन कारकों के जिम्मेदार माना गया है उनमें डायबिटीज, शराब का सेवन और प्रदूषण का बढ़ता स्तर प्रमुख है।
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ब्रेन की समस्याएं - फोटो : istock
बढ़ रहा है डिमेंशिया का खतरा

अध्ययनकर्ताओं ने बताया, डिमेंशिया का खतरा कुछ दशकों पहले तक 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में देखा जाता था, हालांकि समय के साथ 50 की आयु वाले लोगों को भी इसका शिकार पाया जा रहा है। डिमेंशिया में सोचने, याददाश्त की शक्ति कमजोर होने के अलावा व्यक्तित्व और मूड में भी बदलाव आने लगता है।

जिन लोगों में डायबिटीज का खतरा रहा है, अल्कोहल का सेवन करते हैं या फिर प्रदूषण वाली जगहों पर रहते हैं उनमें मस्तिष्क से संबंधित विकारों को अधिक देखा जाता रहा है।
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ब्रेन को होने वाली समस्याएं - फोटो : istock
मस्तिष्क विकारों के लिए 15 कारकों को पाया गया जिम्मेदार

दुनियाभर में बढ़ते डिमेंशिया के खतरे और इसके कारकों को समझने के लिए शोधकर्ताओं ने अध्ययन किया। इसमें 15 प्रमुख कारकों के बारे में पता चलता है जिससे न सिर्फ मस्तिष्क को क्षति पहुंचती है साथ ही न्यूरोलॉजिकल विकारों का भी खतरा बढ़ जाता है।

अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि अगर लाइफस्टाइल में बदलाव कर लिया जाए तो मस्तिष्क से संबंधित विकारों के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। जिन जोखिम कारकों को मस्तिष्क की समस्याओं के लिए जिम्मेदार पाया गया है उनमें ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, वजन की समस्या, शराब और धूम्रपान, डिप्रेसिव मूड, इंफ्लामेशन, प्रदूषण, सुनने की समस्या, नींद विकार, शरीरिक सक्रियता की कमी को प्रमुख माना गया है। 

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मधुमेह की समस्याओं के बारे में जानिए - फोटो : istock
डायबिटीज की समस्या भी बढ़ा देती है खतरा

इसके अलावा अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि जिन लोगों को डायबिटीज की दिक्कत है उनमें भी मस्तिष्क की समस्याओं विशेषतौर पर अल्जाइमर रोग और डिमेंशिया होने का जोखिम अधिक हो सकता है। अध्ययनों में पाया गया है कि बढ़े हुए शुगर का लेवल मस्तिष्क के उस हिस्से (हिप्पोकैम्पस) को क्षति पहुंचाने लगता है जो याददाश्त के लिए आवश्यक मानी जाती है। 

कभी-कभी, अग्न्याशय से एमाइलिन नामक हार्मोन का अत्यधिक स्राव भी न्यूरॉन्स पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं जिसके कारण भी मस्तिष्क से संबंधित विकारों का जोखिम बढ़ जाता है।
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शराब से दूरी बनाना जरूरी - फोटो : iStock
लाइफस्टाइल में सुधार करना जरूरी

अध्ययनकर्ता बताते हैं- मस्तिष्क को स्वस्थ रखने और डिमेंशिया जैसी बीमारियों से बचाव के लिए लाइफस्टाइल में सुधार करना जरूरी है। इसके लिए सबसे आवश्यक है कि आप शराब का सेवन कम कर दें। अल्कोहल के कारण न्यूरोडीजेनेरेशन का खतरा बढ़ जाता है। शराब पीने से मस्तिष्क के विभिन्न हिस्सों के बीच संकेतों को संचारित करने वाले फ्ल्यूड की मात्रा में भी कमी आ जाती है। शराब के सेवन से दूरी बनाने के अलावा प्रदूषकों से बचाव करना, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखना भी मस्तिष्क की सेहत को ठीक रखने के लिए बहुत जरूरी है। 



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स्रोत और संदर्भ
The effects of genetic and modifiable risk factors on brain regions vulnerable to ageing and disease

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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