सपने क्यों आते हैं, किन सपनों के क्या मतलब हो सकते हैं? इस बारे में आपने लोगों से अलग-अलग तरह की बातें सुनी होंगी। हालांकि विज्ञान का, सपनों को लेकर तर्क अलग है। वैज्ञानिकों का मानना है कि सपने असल में रैंडम ख्याल होते हैं। एक्टिवेशन सिंथेसिस मॉडल के आधार पर वैज्ञानिकों का कहना है कि सपने, हमारे दिमाग की गतिविधि को समझने का तरीका हो सकते हैं। हमारा दिमाग एमिग्डाला और हिप्पोकैम्पस जैसे मस्तिष्क के हिस्सों से सिग्नल लेता है और उनकी व्याख्या करने की कोशिश करता है, जिसके परिणामस्वरूप सपने आते हैं।
सपने कई प्रकार के हो सकते हैं। नाइटमेयर्स जिसे डरावने सपने के तौर पर भी जाना जाता है, यह दिमाग की स्थिति के बारे में समझने में भी मदद कर सकते हैं। क्या आपको भी अक्सर रात में डरावने सपने परेशान करते हैं? इस बारे में अध्ययन कर रही शोधकर्ताओं की टीम ने एक बड़ा खुलासा किया है।
शोधकर्ताओं ने अध्ययन की रिपोर्ट के आधार पर निष्कर्ष निकाला है कि मध्यम आयु वर्ग के लोग जिन्हें नियमित रूप से बुरे सपने आते हैं, उनमें यह उम्र बढ़ने पर डेमेंशिया होने के अधिक खतरे का संकेतक भी हो सकता है। यानी कि अगर आपको अक्सर रात में डरावने सपने आते रहते हैं तो यह आपके भविष्य में डेमेंशिया के शिकार होने के जोखिम को काफी बढ़ा देता है। आइए इस बारे में विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं।