प्रोफेसर अनिल कुमार के नेतृत्व में डॉक्टर विकास कुमार और सर्जरी की टीम
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डॉक्टरों ने की काफी चुनौतीपूर्ण सर्जरी
अमर उजाला से बातचीत में डॉ विकास बताते हैं, इस बच्ची की सर्जरी हमारे लिए कई मामलों में चुनौतीपूर्ण थी। हमारा पहला लक्ष्य सर्जरी करके जटिलताओं को दूर करना और बच्ची की जान बचाना था। सामान्यतौर पर इस स्थिति में मस्तिष्क के भीतर सीएसएफ (csf /पानी) ज्यादा हो जाने के कारण माथे का आकार बढ़ता चला जाता है। इस केस में चूंकि बच्ची दो साल से इसी समस्या से जूझ रही है ऐसे में एक तरफ सोते-सोते सिर का एक हिस्सा चिपटा भी हो गया था।
कॉग्नेटिव हाइड्रोसेफ्लस में समय पर सर्जरी न हो पाने के कारण ब्रेन सिकुड़ता चला जाता है और उसका विकास सही तरीके से नहीं हो पाता है। इस सर्जरी में ऐसी कई प्रकार की चुनौतियां थी, जिनको हमारी टीम ने ठीक करने का प्रयास किया है।
डॉक्टर विकास बताते हैं, माथे का आकार बहुत बड़ा हो जाने के कारण इसके ऑपरेशन में बहुत कठिनाइयां थी, इसमें जान जाने, माथे से पानी लीक करने, छाती में संक्रमण का खतरा था, हालांकि हमारी टीम ने लंबे ऑपरेशन के बाद जटिलताओं को काफी कम करने का प्रयास किया है। बच्ची के सिर का आकार चूंकि काफी बड़ा हो गया था, ऐसे में इसके सामान्य होने में तो समय लग सकता है, हालांकि ऑपरेशन के बाद की रिपोर्ट के आधार पर कहा जा सकता है कि बच्ची की जटिलताओं को कम कर दिया गया है। फिलहाल वह डॉक्टरों की निगरानी में है और स्वस्थ है।