फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Diabetes: डायबिटीज रोगियों में किडनी-आंखों की समस्याओं का कम होगा खतरा, वैज्ञानिकों ने खोज लिया 'कारगर उपाय'

Sat, 10 Feb 2024 08:15 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
डायबिटीज की समस्या और इसके जोखिम - फोटो : istock
डायबिटीज वैश्विक स्तर पर बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में से है। आंकड़ों से पता चलता है कि 20-79 वर्ष के लगभग 537 मिलियन (53.7 करोड़) से अधिक वयस्कों को मधुमेह की समस्या हो सकती है, यानी लगभग हर 10 में से एक व्यक्ति मधुमेह के साथ जी रहा है। यह संख्या 2030 तक 64.3 करोड़ और 2045 तक 78.3 करोड़ तक बढ़ने का अनुमान है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डायबिटीज गंभीर क्रोनिक समस्या तो है ही साथ ही इसके कारण शरीर के कई अन्य अंगों पर भी नकारात्मक असर होने का खतरा हो सकता है। डॉक्टर कहते हैं, यदि आपका भी ब्लड शुगर लेवल अक्सर बढ़ा रहता है तो इसके कारण शरीर में कई और भी प्रकार की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। डायबिटीज की स्थिति के कारण आंखों, किडनी, लिवर, हार्ट पर नकारात्मक असर हो सकता है।

इन जोखिमों से बचाव के लिए विशेषज्ञों ने एक खास दवा की खोज की है, जो डायबिटीज की जटिलताओं को कम करने में मददगार हो सकती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि ये दवा मधुमेह रोगियों के लिए अत्यंत लाभकारी हो सकती है।
विज्ञापन

2 of 5
ब्लड शुगर बढ़ने की समस्या - फोटो : istock
मधुमेह की जटिलताओं को कम करने में लाभ
 
जर्नल कार्डियोवस्कुलर डायबेटोलॉजी में प्रकाशित रिपोर्ट्स से पता चलता है शोधकर्ताओं ने एक नई अवरोधक दवा की पहचान की है जिससे मधुमेह की दो जटिलताओं- आंखों और किडनी को होने वाली क्षति को रोकने में मदद मिल सकती है। अब तक चूहों पर किए गए शोध में इस दवा के विशेष लाभ देखे गए हैं, इंसानों पर अध्ययन शुरुआती चरणों में हैं।

अध्ययनकर्ता बताते हैं, डायबिटीज को मैनेज करने के स्थिति में थोड़ी सी भी लापरवाही के कारण कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है, ये शरीर की छोटी रक्त वाहिकाओं या माइक्रोवैस्कुलचर को प्रभावित करती है। इन स्थितियों को रोकने में इस दवा से लाभ मिलने के संकेत हैं।
विज्ञापन

3 of 5
डायबिटीज में किडनी रोगों का खतरा - फोटो : Pixabay
डायबिटीज में आंखों और किडनी की समस्या

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डायबिटीज रोगियों में दो प्रकार की माइक्रोवैस्कुलर जटिलताएं सबसे आम हैं।
  • डायबिटिक रेटिनोपैथी (डीआर, जो मधुमेह रोगियों में दृष्टि हानि और अंधापन का प्रमुख कारण है।
  • डायबिटिक किडनी डिजीज (डीकेडी), जिसके परिणामस्वरूप किडनी फेल हो सकती है।

डॉक्टर कहते हैं, डीआर और डीकेडी के लक्षणों के लिए उपचार उपलब्ध हैं, लेकिन वर्तमान में इन जटिलताओं को रोकने के लिए कुछ भी नहीं है। इस संबंध में ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने जो दवा खोजी है वह आंख और किडनी दोनों की जटिलताओं को रोक सकती है। अध्ययन के वरिष्ठ लेखक रेबेका फोस्टर कहते हैं, अध्ययन के परिणाम काफी रोमांचक हैं हमने डायबिटीज रोगियों की गंभीर जटिलताओं को कम करने के लिए दवा की पहचान की है।

4 of 5
हेपरानेज अवरोधक दवाओं से मिल सकता है लाभ - फोटो : istock
हेपरानेज अवरोधक दवाओं से मिल सकता है लाभ

विशेषज्ञ कहते हैं, डायबिटीज रोगियों में होने वाली किडनी और आंखों की समस्याओं में पाया गया है कि इन विकारों में ग्लोमेरुलस (रक्त को फिल्टर करने वाली छोटी वाहिकाओं का नेटवर्क) में होने वाली समस्याओं को हेपरानेज अवरोधक ड्रग के माध्यम से कम किया जा सकता है। ये न सिर्फ ब्लड शुगर बढ़ने के कारण आंखों को होने वाली क्षति से बचा सकती है साथ ही किडनी की समस्याओं को कम करने में भी इससे लाभ मिलने के संकेत हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
डायबिटीज और इसके कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : istock
क्या कहते हैं शोधकर्ता?

अध्ययन के निष्कर्ष से पता चता है कि मधुमेह रोगियों में माइक्रोवास्कुलर जटिलताओं के खतरे को कम करने के लिए हेपरानेज अवरोधक का उपयोग लाभप्रद हो सकती है। अध्ययन की लेखिका मोनिका गेमेज कहती हैं, वर्तमान में हम इस अवरोधक ड्रग के नैदानिक उपयोग में आगे बढ़ाने के लिए अनुसंधान कर रहे हैं। अगर ये सफल रहता है और इंसानों में इसके अच्छे परिणाम सामने आते हैं तो डायबिटीज रोगियों के उपचार की दिशा में बड़ी कामयाबी मिल सकती है।



--------------
स्रोत और संदर्भ
Heparanase inhibition as a systemic approach to protect the endothelial glycocalyx and prevent microvascular complications in diabetes

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें