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Cancer Risk: माता-पिता में कैंसर के खतरे को लेकर रहें सावधान, अध्ययन में बड़ा खुलासा

Tue, 25 Jun 2024 01:05 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कैंसर का बढ़ता खतरा - फोटो : istock
कैंसर का जोखिम वैश्विक स्तर पर सभी उम्र के लोगों में देखा जा रहा है। इसे मृत्यु के प्रमुख कारणों में से भी एक माना जाता रहा है। शोधकर्ता बताते हैं, लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के कारण कैंसर का खतरा किसी को भी हो सकता है, हालांकि कुछ खास आयुवर्ग वालों में इसका जोखिम अधिक देखा जा रहा है।

कैंसर के जोखिमों को लेकर हाल ही में किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि बेबी बूमर्स की तुलना में जेन एक्स वाले लोगों में कैंसर होने का खतरा अधिक हो सकता है। जेन एक्स 1965-1980 के बीच पैदा हुए लोग और बेबी बूमर्स सन् 1946-1964 के बीच पैदा हुए लोगों को कहा जाता है।

जामा ओपन नेटवर्क में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया, 60 से 80 की उम्र वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। इस आयुवर्ग वालों में कैंसर का खतरा अधिक देखा जा रहा है। नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने 1992 से 2018 तक अमेरिका में घातक कैंसर से पीड़ित 3.8 मिलियन (38 लाख) लोगों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड की जांच की। इसमें पाया गया है कि जेनरेशन एक्स में कैंसर की दर अन्य आयु वालों की तुलना में काफी अधिक है।
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बढ़ रहे हैं कैंसर के मामले - फोटो : istock
60-70 आयु वालों में कैंसर का खतरा

कैंसर के बढ़ते जोखिमों का पता लगाने के लिए शोधकर्ताओं की टीम ने कंप्यूटर मॉडलिंग का इस्तेमाल किया। कई स्तर पर किए गए अध्ययनों में पाया गया है कि जब 2025 से जनरेशन एक्स के लोग 60-70 साल के हो जाएंगे, तो उनमें बेबी बूमर्स सहित पिछली पीढ़ियों की तुलना में आक्रामक कैंसर होने का खतरा अधिक हो सकता है।

येल विश्वविद्यालय में क्लिनिकल और ट्रांसलेशनल रिसर्च के निदेशक एफ. पेरी विल्सन ने कहा, हमारे पास एक ऐसी पीढ़ी है जिसके माता-पिता में कैंसर की दर अधिक देखी जा रही है। कई वजहें हैं जो कैंसर के खतरे को बढ़ा रही हैं जिसको लेकर सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।
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किडनी कैंसर के जोखिम कारक - फोटो : istock
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

शोधकर्ताओं ने कहा, कैंसर के खतरे को कम करने के लिए कई तरह के पहल किए गए। धूम्रपान छोड़ने के लिए अभियान के साथ कोलन, रेक्टल और स्तन कैंसर के लिए स्क्रीनिंग परीक्षणों में वृद्धि जैसे प्रयासों के बावजूद कैंसर की दर अधिक देखी जा रही है। अध्ययन के मुताबिक मोटापा, गतिहीन जीवनशैली इस आयुवर्ग में उच्च कैंसर दर का प्रमुख कारण हो सकती है।

जेन एक्स वाले पुरुषों और महिलाओं में थायरॉयड कैंसर, किडनी कैंसर और ल्यूकेमिया कैंसर के मामले सबसे अधिक रिपोर्ट किए जा रहे हैं। वहीं इस आयु वर्ग की महिलाओं में गर्भाशय, अग्नाशय और ओवेरियन कैंसर के मामले अधिक देखे गए हैं।


 

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कैंसर - फोटो : istock
उम्र बढ़ने के साथ बढ़ जाता है कैंसर का खतरा

शोधकर्ताओं ने बताया, कई अध्ययन रिपोर्ट्स में जेन एक्स और युवा लोगों में कोलोरेक्टल कैंसर में वृद्धि की खबरें सामने आती रही हैं। हालांकि इससे बड़ी चिंता एक बड़ी आबादी के माता-पिता में बढ़ता जोखिम भी है। प्रोफेसर विल्सन ने कहा, इस पेपर में महत्वपूर्ण बात यह समझना है कि बढ़ती उम्र कैंसर का एक प्रमुख जोखिम कारक है। आज का 50 वर्षीय व्यक्ति 1980 में 50 वर्ष की आयु वाले व्यक्ति की तुलना में संभावित रूप से कार्सिनोजेन्स के अधिक संपर्क में देखा जा रहा है।
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कैंसर का समय पर निदान जरूरी - फोटो : istock
समय पर निदान जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, जेनरेशन एक्स में कैंसर के जोखिमों को तो कम नहीं किया जा सकता है, लेकिन समय पर इसका निदान हो जाए तो रोग के गंभीर रूप लेने का जोखिम जरूर कम किया जा सकता है। खान-पान और लाइफस्टाइल को ठीक रखना कैंसर की रिकवरी में भी सहायक है। हम वैश्विक स्तर पर कैंसर के बढ़ते जोखिमों की चपेट में हैं। 



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स्रोत और संदर्भ
Gen X Projected to Experience Greater Increases in Cancer Incidence than Previous Generations

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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