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Covid-19 Study: कोविड संक्रमितों में फेफड़ों से संबंधित इस जानलेवा समस्या का खतरा दोगुना, वैज्ञानिकों ने किया अलर्ट

Sun, 29 May 2022 02:28 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोविड-19 और फेफड़ों की समस्या - फोटो : iStock
कोरोना महामारी वैश्विक स्तर पर पिछले दो साल से अधिक समय गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनी हुई है। संक्रमितों में कई तरह की जटिलताएं देखने को मिल रही हैं, इसमें से कई जानलेवा भी हो सकती हैं। मौजूदा समय में लोगों के लिए चिंता बढ़ा रहे ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमितों में वैसे तो गंभीर रोग के मामले काफी कम देखे जा रहे हैं, हालांकि इसके कारण भी कुछ स्थितियों में दिक्कतें बढ़ने का खतरा बना हुआ है।

कोरोना वायरस को मुख्यरूप से श्वसन से संबंधित संक्रमण के रूप में जाना जाता रहा है, हालांकि समय के साथ सामने आ रहे इसके नए वैरिएंट्स के कारण शरीर के अन्य अंगों पर भी इसके गंभीर असर देखने को मिल रहे हैं।

हाल ही में कोरोना के खतरे को लेकर किए गए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बड़ा दावा किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना से संक्रमित रह चुके लोगों में कई ऐसी गंभीर जटिलताएं देखी जा रही हैं जिनपर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है। हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि कोविड-19 का शिकार रह चुके लोगों में फेफड़ों में रक्त के थक्के विकसित होने का खतरा अधिक देखा जा रहा है। आइए इस अध्ययन के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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फेफड़ों में रक्त का थक्का - फोटो : pixabay
फेफड़ों में रक्त का थक्का बनने का खतरा 

यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार कोरोना संक्रमित रह चुके लोगों के फेफड़ों में रक्त के थक्के बनने का खतरा अधिक देखा जा रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह समस्या न सिर्फ संक्रमण के समय बल्कि संक्रमण से ठीक होने के बाद लॉन्ग कोविड के रूप में भी बनी रह सकती है।

रक्त के थक्के बनने से फेफड़ों को पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं मिल पाता है जिससे उसका सामान्य कार्य प्रभावित हो सकता है। इस खतरे को लेकर विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
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कोविड-19 संक्रमितों में फेफड़ों से संबंधित दिक्कतें - फोटो : iStock
अध्ययन में क्या पता चला?

इस अध्ययन के लिए मार्च 2020 से नवंबर 2021 के बीच कोरोना संक्रमण के शिकार रह चुके 350,000 से अधिक वयस्कों के डेटा का विश्लेषण किया गया। संक्रमण के बाद 30 दिनों से लेकर एक साल तक इन लोगों पर विशेष निगरानी रखी गई।

शोधकर्ताओं ने पाया कि  18 से 64 वर्ष की आयु वाले पांच में से एक व्यक्ति में पल्मोनरी इंबोलिज्म की समस्या देखी गई। यह स्थिति फेफड़े की धमनी में रक्त का थक्का बनने को संदर्भित करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की स्थितियां दीर्घकालिक समस्याओं को जन्म दे सकती है और कुछ स्थितियों में इनके जानलेवा होने का भी खतरा हो सकता है। 

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फेफड़ों की समस्याएं - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं शोधकर्ता?

सीडीसी में कोविड-19 इमरजेंसी रिस्पांस टीम के सदस्य और अध्ययन के लेखकों में से एक लारा बुल-ओटरसन कहते हैं, संक्रमण के दौरान और लॉन्ग कोविड दोनों ही स्थितियों में कुछ संक्रमितों में पल्मोनरी इंबोलिज्म जैसी गंभीर दिक्कतें देखने को मिल रही हैं। कोविड-19 की गंभीरता और बीमारी की अवधि मरीजों की स्वास्थ्य देखभाल की जरूरतों को प्रभावित कर सकती है। इस तरह के खतरे को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों को विशेष सतर्कता दिखाने की आवश्यकता है, जिससे शुरुआत में ही इन स्थितियों का निदान करके गंभीर रोग के खतरे को कम किया जा सके।
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फेफड़े की समस्या को लेकर बरतें सावधानी - फोटो : pixabay
अध्ययन का निष्कर्ष

अध्ययन के निष्कर्ष में शोधकर्ताओं ने बताया कि रक्त के थक्के बनने के मामले डेल्टा जैसे वैरिएंट्स के संक्रमण की स्थिति में ज्यादा देखे गए हैं। हालांकि ओमिक्रॉन के कारण इसका कितना जोखिम है, इसपर शोध जारी है। हम लिंग और भौगोलिक क्षेत्र के डेटा के साथ टीकाकरण की स्थिति के आधार पर भी इस समस्या के बारे में जानने के लिए अध्ययन कर रहे हैं। फिलहाल संक्रमितों और चिकित्सक, दोनों को बीमारी के फॉलोअप के दौरान इन खतरों की गंभीरता से जांच जरूर करनी चाहिए। 


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स्रोत और संदर्भ
Post–COVID Conditions Among Adult COVID-19 Survivors Aged 18–64 and ≥65 Years — United States, March 2020–November 2021

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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