माइक्रोप्लास्टिक के खतरे को लेकर वैज्ञानिकों की राय
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क्या कहते हैं वैज्ञानिक?
अमर उजाला से बातचीत में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में वैज्ञानिक, असिस्टेंट प्रोफेसर (पर्यावरण विभाग) डॉ कृपाराम बताते हैं, माइक्रोप्लास्टिक्स प्रकृति में अत्यधिक विषैले होते हैं और इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि ये रासायनिक रूप से निष्क्रिय होते हैं। एक बार शरीर में प्रवेश करने के बाद इसे निकालना बहुत मुश्किल हो जाता है। इस स्थित में शरीर में माइक्रोप्लास्टिक्स का संचय हो सकता है, जो बहुत खतरनाक है। माइक्रोप्लास्टिक्स के साथ एक खतरा यह भी है कि इसे अब बचाव करना भी कठिन होता जा रहा है। बहुत सी दैनिक खाने योग्य चीजों जैसे टेबल नमक, बोतलबंद पानी, प्लास्टिक टीबैग और प्लास्टिक के रसोई उपकरण के माध्यम से ये शरीर में प्रवेश कर सकते हैं।
जिस प्रकार से इस अध्ययन में स्तन के दूध में माइक्रोप्लास्टिक पाए जाने की बात सामने आई है यह काफी आश्चर्यजनक होने के साथ बड़ी चिंता का कारण भी है। आगे के शोध में इसके विस्तृत आयाम समझने के मिलेंगे, फिलहाल यह संकेत है कि पर्यावरण के साथ हो रहा खिलवाड़ अब गंभीर रूप लेकर सामने आ रहा है।