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Covid-19: डरा रहे हैं कोरोना के बढ़ते केस, अब नवजात भी सुरक्षित नहीं, अध्ययन में इस खतरे को लेकर अलर्ट

Thu, 30 Jun 2022 02:22 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नवजात में कोरोना संक्रमण का खतरा - फोटो : iStock
देश में पिछले एक महीने से कोरोना संक्रमण के मामले में लगातार उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। बुधवार को पिछले चार महीने में पहली बार एक दिन में सबसे ज्यादा लोगों में संक्रमण की पुष्टी की गई, इस दौरान 18,819 लोगों को संक्रमण का शिकार पाया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना के नए वैरिएंट्स ने सभी लोगों में संक्रमण के जोखिम को बढ़ा दिया है, इस खतरे को समझते हुए इससे बचाव को लेकर सावधानी बरतते रहना बहुत आवश्यक है। ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट्स को बढ़ते संक्रमण के प्रमुख कारक के तौर पर देखा जा रहा है, इन्हें अध्ययनों में अति संक्रामक वैरिएंट्स के तौर पर वर्गीकृत किया गया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, फिलहाल कोरोना के संक्रमण से किसी को भी सुरक्षित नहीं माना जाता सकता है। भले ही आपने वैक्सीनेशन करा लिया है फिर भी संक्रमण से बचे रहने के लिए सभी लोगों को कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन करते रहना चाहिए।

अब तक के अध्ययनों में बताया जाता रहा है कि बच्चों में संक्रमण का खतरा कम होता है, हालांकि एक हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया है कि नवजात बच्चे भी संक्रमण का शिकार हो सकते हैं, कैसे, आइए जानते हैं?
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नवजात शिशु में कोरोना का जोखिम - फोटो : Pixabay
मां से बच्चों में संक्रमण का जोखिम

महाराष्ट्र में किए गए इस अध्ययन में डॉक्टर्स ने पाया कि अगर मां, कोरोना से संक्रमित है तो उससे नवजात शिशुओं में भी वायरस का संचरण हो सकता है, इतना ही नहीं अगर गर्भावस्था के दौरान महिला संक्रमित रही है तो बच्चा संक्रमण के साथ भी जन्म ले सकता है।

पुणे में 304 नवजात शिशुओं (301 माताओं से) पर किए गए इस शोध में विशेषज्ञों ने पाया कि 15 में से एक बच्चे को मां से कोविड-19 का संक्रमण हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस जोखिम को लेकर सभी को अलर्ट रहने की आवश्यकता है। 
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बच्चों में कोरोना संक्रमण को लेकर अध्ययन - फोटो : iStock
अध्ययन में क्या पता चला?

पुणे के बीजे मेडिकल कॉलेज और ससून जनरल हॉस्पिटल तथा मुंबई के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन रिप्रोडक्टिव हेल्थ के विशेषज्ञों ने यह अध्ययन किया। जून 2020 से दिसंबर 2021 तक किए गए अध्ययन में विशेषज्ञों ने पाया कि कोविड-19 संक्रमित रहे 20 में से छह शिशुओं में कोरोना के गंभीर लक्षण विकसित हुए और लंबे समय तक इन्हें आईसीयू में रखने की जरूरत पड़ी, हालांकि किसी भी बच्चे की मौत नहीं हुई।

अब तक माना जाता आ रहा था कि बच्चों में कोरोना संक्रमण का खतरा कम होता है, हालांकि इस अध्ययन में कई तरह की नई और हैरतअंगेज बातें पता चली हैं। 

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कोरोना के जोखिम को लेकर अध्ययन - फोटो : pixabay
एसिम्टोमैटिक मां से भी हो सकता है संक्रमण

माताओं से नवजात शिशुओं में कोविड संचरण के अध्ययन में पाया गया कि भले ही मां में संक्रमण के एसिम्टोमैटिक लक्षण हों, फिर भी उनसे नवजातों में संक्रमण प्रसारित हो सकता है। अध्ययन में संक्रमित पाए गए शिशुओं में से, चार का जन्म एसिम्टोमैटिक लक्षण वाली माता से हुआ था।

बीजे गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज की प्रमुख शोधकर्ता डॉ आरती किनिकर कहती है, फिलहाल अच्छी बात यह है कि संक्रमण से ठीक हो चुके बच्चों (गंभीर लोगों सहित) के फॉलो-अप से पता चलता है कि वे सभी अब स्वस्थ हैं।
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संक्रमण के दौरान स्तनपान कितना सुरक्षित? - फोटो : istock
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

इस अध्ययन के बारे में बीजे मेडिकल कॉलेज और ससून जनरल हॉस्पिटल के डीन  डॉ विनायक काले कहते हैं, मां से बच्चों में संक्रमण के जोखिम को लेकर महामारी की शुरुआत से ही चर्चा की जाती रही है, इस अध्ययन से काफी कुछ स्पष्ट होता है। हमने पाया कि मां अगर कोविड के सभी प्रोटोकॉल का पालन करती रहती है तो बच्चों में संक्रमण के खतरे को रोका जा सकता है। कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन करते हुए स्तनपान कराने को भी सुरक्षित पाया गया है हालंकि इस दौरान मास्क पहनना आवश्यक है। कोरोना के खतरे से बचाव को लेकर सभी लोगों को लगातार ध्यान देते रहने की आवश्यकता है। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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