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Covid-19: पूरे शरीर पर हो सकता है संक्रमण का असर, 84 हिस्सों में दिखे मार्कर, वीर्य की गुणवत्ता भी प्रभावित

Fri, 06 Jan 2023 01:46 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना संक्रमण का शरीर पर असर - फोटो : iStock
पिछले तीन साल से अधिक समय से वैश्विक स्तर पर कोरोना महामारी जारी है। अब तक 66.72 करोड़ से अधिक लोग इस संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। वहीं कोरोना अब तक 67 लाख से अधिक लोगों की मौत का कारण बन चुका है। महामारी की शुरुआत में माना जा रहा था कि सार्स-सीओवी-2 वायरस, ऊपरी श्वसन तंत्र को प्रभावित करने वाला संक्रमण है, हालांकि समय के साथ वायरस में हुए म्यूटेशन के साथ इसके लक्षणों और प्रकृति में बदलाव देखा जाता रहा है।

इस बीच एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया है कि कोरोनावायरस सिर्फ श्वसन तंत्र की बीमारी का कारण नहीं बनता है, इसका पूरे शरीर पर दुष्प्रभाव हो सकता है। इस खतरे को लेकर सभी को अलर्ट रहने की सलाह दी गई है।
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कई अंगों पर दिखे वायरस के दुष्प्रभावों के मार्कर - फोटो : iStock
पूरे शरीर पर हो सकता है संक्रमण का असर

कोरोना पर अब तक के सबसे व्यापक ऑटोप्सी टिशू स्टडी में, शोधकर्ताओं ने मस्तिष्क और हृदय से लेकर आंखों और पूरे शरीर पर वायरस के दुष्प्रभावों के मार्कर देखे हैं। अध्ययन के निष्कर्ष में वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि कोरोना वायरस शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित करता देखा गया है, यह सिर्फ श्वसन रोग का कारण नहीं बनता है।

इस खतरे को ध्यान में रखते हुए संक्रमण से बचाव के उपाय करते रहना सभी के लिए आवश्यक है। जिस प्रकार से नए म्यूटेटेड वैरिएंट्स की प्रकृति अधिक संक्रामक देखी जा रही है, वह और भी चिंता बढ़ाने वाली स्थिति है। आइए इस अध्ययन के बारे में आगे विस्तार से जानते हैं।
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संक्रमण से प्रभावित हो सकता है पूरा शरीर - फोटो : PTI
84 हिस्सों में दिखे मार्कर

मैरीलैंड विश्वविद्यालय के सहयोग से नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंटिस्ट्स के नेतृत्व में किए गए इस हालिया शोध में वैज्ञानिकों ने कोरोना के कारण शरीर के अलग-अलग अंगों पर होने वाले दुष्प्रभावों को जानने की कोशिश की। इसके लिए कोरोना से मरने वाले 44 मरीजों का ऑटोप्सी किया गया। अध्ययन के लिए शरीर के विभिन्न हिस्सों से मृत्यु के तुरंत बाद ऊतकों को लेकर उनकी जांच की गई।

इस शोध के दौरान पता चला कि कोरोना संक्रमण असल में श्वसन रोग तक ही सीमित नहीं है, शरीर के लगभग 84 हिस्सों में संक्रमण के कारण होने वाले दुष्प्रभाव या मार्कर के बारे में पता चला। 

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मस्तिष्क पर दिखे कोरोना के दुष्प्रभाव - फोटो : istock
इन अंगों पर देखे गए दुष्प्रभाव

इससे पहले के भी कई अध्ययनों में शरीर पर कोरोना संक्रमण के दुष्प्रभावों का पता लगाने की कोशिश की गई थी, जिसमें मस्तिष्क, पाचन अंगों पर इसके असर के बारे में बताया गया था, हालांकि यह अपने आप में पहला व्यापक अध्ययन है, जिसमें पूरे शरीर पर इसके दुष्प्रभावों के बारे में जानने के लिए अध्ययन किया गया है।

ऑटोप्सी आधारित शोध में पाया गया कि कोरोना वायरस के संक्रमण की स्थिति में वायरल आरएनए का सबसे अधिक दुष्प्रभाव वायुमार्ग और फेफड़ों के ऊतकों पर होता है। कुछ स्थितियों में मस्तिष्क, आंत, हृदय, किडनी, आंख, एडर्नल ग्लैंड्स और लिम्फ नोड्स को भी यह प्रभावित कर सकता है।
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शरीर के अलग-अलग हिस्सों में संक्रमण के इंफ्लामेटरी मार्करों का पता चला - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं शोधकर्ता?

शोधकर्ता कहते हैं, यह एक प्रकार का शॉर्ट पोस्टमार्टम इंटरवील अध्ययन है, जिसमें शरीर के अलग-अलग हिस्सों में संक्रमण के कारण इंफ्लामेटरी मार्करों के बारे में पता चलता है। जिसको लेकर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। कोरोना से बचाव बहुत आवश्यक है, भले ही इसके लक्षण हल्के दिख रहे हैं पर शरीर पर इसका असर कई प्रकार से हो सकता है। 

हालांकि इस अध्ययन के परिणाम बहुत स्पष्ट नहीं हैं क्योंकि जिन मृतकों पर शोध किया गया है, उनमें से ज्यादातर बुजुर्ग और बिना टीकाकरण वाले थे। अध्ययन के अगले चरण में वैक्सीनेटेड लोगों पर शोध किया जाना है।
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वीर्य की गुणवत्ता भी हो सकती है प्रभावित - फोटो : Pixabay
वीर्य की गुणवत्ता पर संक्रमण का असर

वहीं दूसरी तरफ अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के शोधकर्ताओं द्वारा 30 पुरुषों पर किए गए एक अन्य अध्ययन में पाया गया है कि सार्स-सीओवी-2 वायरस का संक्रमण वीर्य की गुणवत्ता पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है। एम्स पटना के शोधकर्ताओं के नेतृत्व वाली टीम ने पाया कि कोविड-19 टेस्टिकुलर टिश्यू में एंजियोटेंसिन-कनवर्टिंग एंजाइम-2 रिसेप्टर (एसीई2) के माध्यम से मल्टीऑर्गन क्षति का कारण बन सकता है।


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स्रोत और संदर्भ

SARS-CoV-2 infection and persistence in the human body and brain at autopsy

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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