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अध्ययन में दावा: हवा के माध्यम से फैल रहा है कोरोना, जानें क्या हैं इसके मायने और कैसे करें बचाव?

Sun, 18 Apr 2021 01:02 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला
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हवा से फैल रहा है कोरोना वायरस - फोटो : pixabey
कोराना वायरस के तेजी से बढ़ते मामलों ने दुनियाभर की चिकित्सा व्यवस्था पर दोबारा से दबाव बढ़ा दिया है। भारत में कोरोना के दूसरे वेब को पहले की तुलना में अधिक शक्तिशाली माना जा रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक संक्रमित व्यक्ति के खांसने और छींकने से निकलने वाली ड्रॉपलेट्स के माध्यम से इस वायरस का प्रसार होता है, हालांकि एक नए अध्ययन ने लोगों की चिंता को और बढ़ा दिया है। 'द लैंसेट' जर्नल में प्रकाशित एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक सार्स-सीओवी-2 वायरस हवा के माध्यम से भी फैल सकता है। अध्ययन से जुड़े एक विशेषज्ञ का कहना है कि वायरस के एयरबोर्न ट्रांसमिशन यानी हवा के माध्यम से फैलने के पुख्ता सबूत प्राप्त हुए हैं। आइए इस अध्ययन से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
यूके, यूएसए और कनाडा के छह विशेषज्ञों सहित पर्यावरण विज्ञान में अनुसंधान के लिए सहकारी संस्थान के अधिकारी जोस-लुइस जिमेनेज़ कहते हैं कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि वायरस का प्रसार हवा के माध्यम से हो रहा है। इस बात के कोई प्रमाण नहीं हैं कि बड़े ड्रॉपलेट्स से ही कोरोना वायरस का प्रसार होता है। 
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फाइल फोटो - फोटो : PTI
जोस-लुइस जिमेनेज़ ने अध्ययन के आधार पर संबंधित संस्थाओं को आगाह किया है। उन्होंने कहा है कि चूंकि वायरस के हवा के माध्यम से प्रसारित होने के संकेत मिले हैं ऐेसे में यह जरूरी है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियां इस बारे में गौर करें। वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर इसकी जांच करके इसके प्रसार के रोकने की दिशा में भी काम करने की जरूरत है। 

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कोरोना वायरस (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के ट्रिश ग्रीनहाल के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम ने प्रकाशित शोध की समीक्षा की है। विशेषज्ञों ने अपनी लिस्ट में स्कैगिट चॉयर जैसे आउटब्रेक को टॉप पर रखा है। इसमें एक व्यक्ति के माध्यम से करीब 53 लोगों को संक्रमित पाया गया। विशेषज्ञों ने बताया है कि इस इंवेट में ऐसा भी नहीं था कि सभी लोगों के क्लोज कॉटैक्ट में आने से संक्रमण फैला हो, ऐसे में माना जा सकता है कि यह संक्रमण हवा के माध्यम से फैला।
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कोरोना वायरस - फोटो : iStock
साइलेंट ट्रांसमिशन की चर्चा
विशेषज्ञों ने साइलेंट ट्रांसमिशन का भी जिक्र किया है। अध्ययन में बताया गया है कि कोरोना के कुल मामलों में से 40 फीसदी लोगों में इसका संक्रमण ऐसे लोगों के माध्यम से देखा गया है जो एसिम्टोमैटिक रहे हों। इस आधार पर विशेषज्ञों ने बताया कि साइलेंट ट्रांसमिशन को दुनिया में कोरोना के फैलने का मुख्य कारण माना जा सकता है।
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कोरोना से संक्रमितों से दूरी बनाकर रखें - फोटो : getty images
इसके विपरीत शोधकर्ताओं की टीम को ऐसे सबूत कम या न के बराबर मिले हैं जिनके माध्यम से कहा जा सके कि वायरस, खांसने और छींकने से निकलने वाली बड़ी ड्रॉपलेट्स के माध्यम से आसानी से फैलता है। शोधकर्ताओं ने इस बारे में संस्थाओं को विशेष रूप से ध्यान देने की बात कही है। 
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हवा मे फैल रहा है संक्रमण - फोटो : PTI
हवा के माध्यम से होने वाले प्रसार को कैसे रोकें?
इस अध्ययन के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किन उपायों द्वारा हवा के माध्यम से होने वाले संक्रमण को रोका जा सकता है? इस बारे में विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई संक्रामक वायरस मुख्य रूप हवा के माध्यम से फैल रहा है तो यह किसी संक्रामक व्यक्ति के बोलने, चिल्लाने, गाने या छींकने के दौरान निकलने वाले ड्रॉपलेट्स के कारण हवा में मौजूद हो सकता है।

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कमरे में वेंटिलेशन बनाकर रखे। - फोटो : PTI
इस तरह के वातावरण में सांस लेने से यह वायरस दूसरे व्यक्तियों तक पहुंच सकता है। ऐसे में  वेंटिलेशन, वायु को फिल्टर करने वाले उपकरणों आदि के उपयोग के साथ घर के भीतर की  भीड़ को कम करने के साथ मास्क के उपयोग और लोगों से सोशल डिस्टेंसिग बनाकर हवा से फैलने वाले संक्रमण से स्वयं को सुरक्षित किया जा सकता है। 
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दुनियाभर के विशेषज्ञों को हवा के माध्यम से संक्रमण को लेकर चेताया - फोटो : iStock
कैलिफोर्निया के सैन डिएगो विश्वविद्यालय में प्रोफसर औप अध्ययन के सह-लेखक किम्बर्ली प्रथार कहते हैं कि यह काफी आश्चर्यजनक है कि अभी भी सवाल उठ रहे हैं कि यह वायरस हवा के माध्यम से फैल रहा है या नहीं? एक बार जब हमें पता चल जाता है कि यह वायरस हवा के माध्यम से फैल सकता है तो अब इसके उपायों के बारे में सोचने की जरूरत है। दुनिया के तमाम देशों को अब इस बारे में तेजी से सोचने और इस तरह के प्रसार को रोकने की आवश्यकता है।


स्रोत और संदर्भ: 
Ten scientific reasons in support of airborne transmission of SARS-CoV-2
https://www.thelancet.com/journals/lancet/article/PIIS0140-6736(21)00869-2/fulltext

अस्वीकरण नोट:  यह लेख द लैंसेट जर्नल में प्रकाशित स्टडी के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण हों अथवा आप किसी रोग से ग्रसित हों तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। 
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