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बच्चों पर न थोपें अपनी सोच, दोस्त बनकर ही रहें, कभी न कहें ये बात

Tue, 17 Sep 2019 04:40 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
हर पौधे को अलग-अलग देखभाल की जरूरत होती है। उसी तरह हर बच्चे की देखभाल भी उस बच्चे के हिसाब से ही की जा सकती है। हालांकि एक बात जो बच्चों की परवरिश में समान है वो है समझदारी। यानी बच्चों की देखभाल में समझदारी भरा बर्ताव जरूरी है। सबसे पहले तो बच्चों की जिम्मेदारी से भागना छोड़िए। माता-पिता दोनों को इस बात का ध्यान रखना होगा। सबसे पहले बच्चों को देखकर खुश होना सीखिए। अपने तमाम कामों के बीच उनकी परवरिश को प्राथमिकता दीजिए।  बच्चों की परवरिश में किन बातों का ध्यान रखें, बता रही हैं सीएमएस गोमतीनगर विस्तार की प्रिंसिपल डॉ. संगीता बनर्जी...।
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डॉ संगीता बनर्जी - फोटो : अमर उजाला
 बच्चों को अपनी सोच के मुताबिक ढालने की कोशिश न करें। ये समझने की कोशिश करें कि बच्चे क्या बनना चाहते हैं। जरूरी नहीं कि जो आप चाहें या आपने किया हो वे वही करें। उन्हें अपने हिसाब से सोचने दें। संभव है कि वह ऐसा कुछ कर जाए, जो आपने करने की कभी सोच भी न हों। अपने बच्चे पर खुद को थोपना छोड़ दें और उसका बॉस बनने की बजाय उससे गहरी दोस्ती करें। अपने को उससे ऊपर रखकर उस पर शासन न चलाएं। बल्कि खुद को उससे नीचे रखें ताकि वह आपसे आसानी से बात कर सके।

 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
हर मांग पूरी न करें
प्यार-दुलार का मतलब यह नहीं कि बच्चों की हर मांग पूरी की जाए। ऐसा करके हम उन्हें जिद्दी बना रहे हैं। उन्हें प्यार कीजिए, समझाइए और वही चीजें दें, जो उनके लिए सही हो। जब आप किसी से सचमुच प्यार करते हैं तो उसका दुलारा होने की फिक्र किए बिना आप वही करते हैं, जो उसके लिए बिलकुल सही है।
 

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प्रतीकात्मक तस्वीर
खुशनुमा माहौल बनाएं उनके लिए
कोशिश करें कि घर का माहौल हमेशा खुशनुमा बना रहे। इसके अलावा उनसे जबरदस्ती सम्मान कराने की कोशिश न करें, बल्कि उनके सामने इसके उदाहरण पेश करें ताकि वे खुद दूसरों को सम्मान देना सीखें। साथ ही उनको सॉरी की अहमियत भी बताएं खुद की गलती पर सॉरी बोलकर।

 
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प्रतीकात्मक तस्वीर
कभी न कहें, अब तुम बड़े हो गए हो
कई बार ऐसा होता है कि हमें जब बच्चे की कोई गतिविधि नहीं समझ आती तो हम कहते हैं कि तुम बड़े हो गए हो, यह कहना छोड़िए। उसे बच्चे की तरह बर्ताव करने दें। आखिर इतनी क्या जल्दी है उसके बड़े होने की। उसे अपने हिसाब से बड़ा होने दें। उसे खेलने-कूदने दें, बहुत ज्यादा सिखाने की कोशिश न करें। दरअसल बच्चे सहज रूप से आध्यात्मिक होते हैं। उनके लिए ऐसा माहौल बनाइए उनके जीवन में बाहरी दखलंदाजी न करें। न ही उनके जबरदस्ती आध्यात्मिक होने पर जोर दे।

अपने व्यक्तित्व को आकर्षक बनाएं
बच्चे हमेशा आकर्षक व्यक्तित्व की ओर आकर्षित होते हैं। माता-पिता बच्चों के हीरो होते हैं। खुद को उनके समक्ष एक परफेक्ट पर्सनालिटी के रूप में पेश करना होगा। इसका सबसे बड़ा असर यह होगा कि बच्चे अपने माता-पिता के इर्द-गिर्द ही रहेंगे और दूसरे के प्रभाव में कम आएंगे। यह बेहतर परवरिश और उन्हें स्वत: नियंत्रण की प्रेरणा देगा।
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