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करवा चौथ 2026: डायबिटीज-हाई बीपी की शिकार महिलाएं व्रत से पहले जान लें ये बातें, वरना बिगड़ सकती है सेहत

Wed, 28 Oct 2026 11:30 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Karwa Chauth 2026: करवा चौथ पर डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहने से ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव और डिहाइड्रेशन का खतरा हो सकता है। दवाएं खुद से बंद न करें और तबीयत बिगड़ने पर तुरंत डॉक्टरी सहायता लें।
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व्रत की सावधानियां - फोटो : Amarujala.com/AI
करवा चौथ विवाहित महिलाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। इसमें महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य के लिए व्रत रखती हैं।  कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को ये त्योहार मनाया जाता है, इस साल 29 अक्तूबर को करवा चौथ है।

करवा चौथ में ज्यादातर स्थानों पर निर्जला व्रत करने का चलन है। महिलाएं सूर्योदय से लेकर शाम को चांद निकलने तक बिना कुछ खाए-पिए रहती हैं। हालांकि डॉक्टर्स का कहना है कि जिन महिलाओं को पहले से डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है, उन्हें व्रत रखने से पहले अपनी सेहत का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

डायबिटीज के मरीजों में लंबे समय तक भूखे रहने से ब्लड शुगर लो होने (हाइपोग्लाइसीमिया) का खतरा बढ़ सकता है। वहीं, पानी न पीने से शरीर में डिहाइड्रेशन की दिक्कत हो सकती है, जिसके कारण चक्कर आने, कमजोरी और दूसरी परेशानियां हो सकती हैं। यही कारण है कि ब्लड प्रेशर के मरीजों को भी व्रत के दौरान अपनी सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

तो क्या शुगर-बीपी के मरीज ये व्रत कर सकते हैं?
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डायबिटीज में व्रत - फोटो : Adobe Stock
डायबिटीज वाले किन बातों का रखें ध्यान

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, कोई भी व्रत करने से पहले अपनी सेहत का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। डायबिटीज और बीपी के मरीजों को सेहत को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतनी चहिए। 

अमर उजाला से बातचीत में जनरल फिजिशियन डॉक्चर शेखर रंजन बताते हैं, डायबिटीज के मरीजों के लिए लंबे समय तक बिना कुछ खाए-पिए रहना जोखिम भरा हो सकता है। 
 
  • खासकर वे लोग जो इंसुलिन या ब्लड शुगर कम करने वाली कुछ दवाएं लेते हैं, उन्हें और भी अलर्ट रहना चाहिए। 
  • व्रत के दौरान शुगर के लेवल में फ्लक्चुएशन यानी इसके बहुत कम या बहुत ज्यादा होने की समस्या हो सकती है। 
  • इसलिए कोई भी व्रत करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं में भी कोई गैप नहीं किया जाना चाहिए।
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व्रत के दौरान खानपान - फोटो : Adobe Stock Photos
व्रत के दौरान कैसा होना चाहिए खान-पान

डॉक्टर आपकी स्थिति को देखते हुए फलाहार व्रत रखने की अनुमति देते हैं। इसमें सरगी में प्रोटीन और फाइबर वाली चीजें जरूर खाएं जिससे पेट भरा रहे और शुगर बढ़ने के खतरा भी न हो।
 
  • आप दूध-दही, पनीर, और लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फल खा सकती हैं। 
  • मिठाइयां, पैक्ड जूस और बहुत ज्यादा तली चीजों से बचें। 
  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार व्रत के दौरान ब्लड शुगर की नियमित जांच करें। शुगर लो होने जैसे पसीना आने, हाथ कांपने, घबराहट या चक्कर आने जैसी दिक्कतें हो रही हैं तो डॉक्टर की सलाह लें या व्रत तोड़कर तुरंत जरूरी उपचार लें।

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हाई ब्लड प्रेशर की समस्या - फोटो : Freepik.com
 हाई बीपी के मरीज किन बातों का रखें ध्यान?

हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को भी निर्जला व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। पानी की कमी से शरीर में डिहाइड्रेशन हो सकता है। इससे कमजोरी, चक्कर और कुछ लोगों में ब्लड प्रेशर से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं। सरगी और व्रत खोलते समय बहुत ज्यादा नमकीन और प्रोसेस्ड फूड खाने से बचें।
  • व्रत से पहले और बाद में पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
  • अपनी बीपी की दवा खुद से बंद न करें और न ही उसकी खुराक बदलें। इस बारे में भी डॉक्टर की सलाह ले लें।
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व्रत के दौरान होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepil.com
ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें

व्रत के दौरान बेहोशी, सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, बहुत ज्यादा कमजोरी या चक्कर आएं, तो तुरंत डॉक्टर की सहायता लें। ऐसे लक्षणों में व्रत जारी रखना सेहत के लिए ठीक नहीं है।

डायबिटीज या हाई बीपी जैसी स्थितियों में व्रत रखना या न रखना आपकी दवाओं, बीमारी की गंभीरता और स्वास्थ्य की स्थिति पर निर्भर करता है। धार्मिक आस्था के साथ अपनी सेहत को प्राथमिकता दें। करवा चौथ या दूसरे किसी भी तरह के व्रत से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: ये रूपायन में प्रकाशित कंटेट है। अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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