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Mental Health: क्या है बायपोलर डिसऑर्डर जिससे परेशान व्यक्ति ने कर डाली इच्छामृत्यु का मांग, बयां किया दर्द

Sat, 22 Mar 2025 03:57 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आखिर बायपोलर डिसऑर्डर होता क्या है? जिसने किसी नवयुवक को इतना परेशान कर दिया है कि अब उसे जीने के बजाय जान देना अधिक आसान लग रहा है? सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में  जोसेफ ने बताया कि बायपोलर के साथ जीना काफी कष्टकारी है।
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बायपोलर डिसऑर्डर की समस्या - फोटो : Freepik.com
मेंटल हेल्थ की समस्याएं दुनियाभर में तेजी से बढ़ती जा रही हैं। विशेषज्ञ बताते हैं, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य एक दूसरे के पूरक होते हैं, इनमें से किसी एक में भी होने वाली समस्या का असर संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाला हो सकता है। मानसिक स्वास्थ्य और इसके कारण होने वाली दिक्कतों का एक हालिया मामला काफी चौंकाने वाला है। ब्रिटिश-घानाई कलाकार जोसेफ अवुआ-डार्को (28 वर्ष) ने मानसिक स्वास्थ्य समस्या से परेशान होकर इच्छामृत्यु की मांग की है।

जोसेफ अवुआ-डार्को नामक एक युवक ने मानसिक स्वास्थ्य के साथ अपने संघर्ष की कहानी को सोशल मीडिया पर साझा किया है। वह बायपोलर डिसऑर्डर से परेशान है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में  जोसेफ ने बताया कि बायपोलर के साथ जीना काफी कष्टकारी है इसलिए मैं कानूनी रूप से अपना जीवन समाप्त करना चाहता हूं।

इच्छामृत्यु की कानूनी मंजूरी के लिए वह नीदरलैंड्स चले गए हैं और इसपर फैसले का इंतजार कर रहे हैं, माना जा रहा है कि इसमें अभी भी चार साल तक का समय लग सकता है। 
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पीड़ित जोसेफ अवुआ-डार्को - फोटो : instagram/okuntakinte
सोशल मीडिया पर बयां किया दर्द

जोसेफ ने एक इंस्टाग्राम वीडियो में कहा, "मैं बायपोलर से पीड़ित हूं और कानूनी रूप से अपना जीवन समाप्त करने के लिए नीदरलैंड आ गया हूं। उन्होंने कहा कि वह हर दिन "गंभीर दर्द" में जी रहे हैं, जिसके कारण उन्होंने चिकित्सकीय सहायता से मृत्यु का विकल्प चुना। नीदरलैंड में इच्छामृत्यु विशेषज्ञ केंद्र के साथ आधिकारिक अनुरोध दायर करने से पहले उन्होंने इस निर्णय पर पांच साल तक विचार किया।

उन्होंने कहा, "मैं यह नहीं कह रहा हूं कि जीवन जीने लायक नहीं है। मैं यह कह रहा हूं कि मेरा मानसिक बोझ पूरी तरह से असहनीय हो गया है।
 
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बायपोलर डिसऑर्डर के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Freepik.com
बायपोलर डिसऑर्डर क्या है?

अब सवाल उठता है कि आखिर बायपोलर डिसऑर्डर होता क्या है? जिसने किसी नवयुवक को इतना परेशान कर दिया है कि अब उसे जीने के बजाय जान देना अधिक आसान लग रहा है?

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ के अनुसार, बायपोलर डिसऑर्डर एक 'मैनिक डिप्रेसिव इलनेस' है जिसमें रोगी को उसकी मनोदशा और शरीर में ऊर्जा के स्तर में अत्यधिक परिवर्तन महसूस होता रहता है। इसमें बहुत तेजी से भावनात्मक उतार-चढ़ाव होता रहता है जिन्हें उन्माद या हाइपोमेनिया भी कहा जाता है।

इसमें कभी बहुत अधिक उदासी या निराश महसूस हो सकती है, रोगी दैनिक गतिविधियों में रुचि या आनंद खो सकता है। जब मूड उन्माद या हाइपोमेनिया में बदल जाता है, तो आप बहुत उत्साहित और ऊर्जा से भरे या असामान्य रूप से चिड़चिड़ा महसूस कर सकते हैं। ये मूड स्विंग नींद, ऊर्जा के स्तर, दैनिक गतिविधि, निर्णय और व्यवहार के साथ और स्पष्ट रूप से सोचने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। बाइपोलर मानसिक स्वास्थ्य की एक गंभीर स्थिति है। 

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बायपोलर डिसऑर्डर में क्या दिक्कतें होती हैं? - फोटो : Freepik.com
बाइपोलर डिसऑर्डर में क्या दिक्कतें होती हैं?

बाइपोलर डिसऑर्डर कई प्रकार की दिक्कतें बढ़ाने वाला हो सकता है। ज्यादातर लोग इसके कारण सामान्य से ज्यादा सक्रिय, ऊर्जावान या उत्तेजित महसूस कर सकते हैं। 
  • रोगी असामान्य रूप से बातूनी हो सकता हैं और तेजी से बात करने लगता है।
  • रोगी कभी कभार बहुत दुखी और आनंद की गहरी कमी महसूस कर सकता है।
  • मनोविकृत्ति के कारण सामान्य रूप से काम कर पाना और चीजों को बेहतर तरीके से डील करना कठिन हो सकता है।
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बाइपोलर डिसऑर्डर से कैसे बचाव किया जाए? - फोटो : freepik.com
बाइपोलर डिसऑर्डर हो जाए तो क्या करें?

बाइपोलर डिसऑर्डर के शिकार लोगों के मस्तिष्क में कुछ प्रकार के परिवर्तन देखे जाते हैं। जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को ये दिक्कत रही हो उनकी अगली पीढ़ियों में इस समस्या के होने का खतरा अधिक हो सकता है।

अध्ययनों से पता चलता है कि इस विकार से बचने के लिए कोई पुख्ता तरीका ज्ञात नहीं है। हालांकि जिन लोगों को ये दिक्कत हो जाती है उन्हें मेंटल हेल्थ असेसमेंट के साथ लक्षणों को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है। अगर आपको या किसी जानकार व्यक्ति में इसके लक्षण दिख रहे हैं तो उन्हें डॉक्टर के पास जरूर ले जाएं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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