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बड़ी चिंता: हर साल स्ट्रोक से मौत के डराने वाले आंकड़े, विशेषज्ञों ने इन सात जोखिम कारकों को बताया जिम्मेदार

Sat, 20 May 2023 12:57 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बढ़ रहे हैं स्ट्रोक के मामले - फोटो : Pixabay
इस्केमिक स्ट्रोक को लेकर हाल ही में जारी किए गए वैश्विक आंकड़े डराने वाले है। रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में जहां साल 1990 में इससे मरने वालों की संख्या औसत 20 लाख थी, वह साल 2019 में बढ़कर 3 मिलियन (30 लाख) से अधिक हो गई। इतना ही नहीं विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि 2030 तक इसके बढ़कर 50 लाख होने  की आशंका है। चीन के शंघाई स्थित टोंगजी यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों कहा, "इस्केमिक स्ट्रोक की बढ़ती वैश्विक मृत्यु दर और इसमें और वृद्धि की आशंका चिंता का विषय है, लेकिन ये बेहतर है कि हम इसमें रोकथाम के प्रयास कर सकते हैं।

इस्केमिक स्ट्रोक मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह में रुकावट के कारण होने वाली दिक्कत है और यह स्ट्रोक का सबसे आम प्रकार है। शोधकर्ताओं ने कहा, सभी लोगों को इसके बारे में जागरूक रहते हुए बचाव के उपाय करते रहना चाहिए। जिस तरह से लोगों की लाइफस्टाइल खराब होती जा रही है, यह जानलेवा समस्या साल-दर साल बढ़ती देखी जा रही है।
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इस्केमिक स्ट्रोक का बढ़ता जोखिम - फोटो : Istock
स्ट्रोक के जोखिम कारक

जर्नल न्यूरोलॉजी में प्रकाशित इस शोध में वैज्ञानिकों ने बताया कि जीवनशैली के कई कारक जैसे धूम्रपान और सोडियम की अधिकता वाले आहार के साथ-साथ उच्च रक्तचाप और बॉडी मास इंडेक्स का बढ़ना इसके प्रमुख जोखिम कारकों में से है। अगर हम इन सभी पर गंभीरता से ध्यान दे लें और सिर्फ लाइफस्टाइल को ही ठीक कर लें तो स्ट्रोक के खतरे को कम किया जा सकता है।

आश्चर्यजनक रूप से युवा आबादी भी इसका शिकार हो रही है।
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इस्केमिक स्ट्रोक से होने वाले मौतों के बढ़े आंकड़े - फोटो : istock
क्या कहता है अध्ययन

अध्ययन के लिए, शोधकर्ताओं ने 1990-2019 के ग्लोबल हेल्थ डेटा एक्सचेंज का विश्लेषण किया। जैसे-जैसे दुनिया की आबादी बढ़ी, इस्केमिक स्ट्रोक से होने वाली मौतों की वैश्विक संख्या 1990 में 2.04 मिलियन से बढ़कर 2019 में 3.29 मिलियन हो गई। हालांकि, स्ट्रोक की दर 1990 में प्रति एक लाख लोगों पर 66 स्ट्रोक से घटकर 2019 में 44 रह गई है। 

प्रमुख शोधकर्ता लिजे  जिओंग कहते हैं, "स्ट्रोक दर में इस कमी का मतलब है कि दुनिया भर में स्ट्रोक की संख्या में वृद्धि मुख्य रूप से जनसंख्या में वृद्धि और उम्र बढ़ने के कारण है। समय के साथ लोगों की लाइफस्टाइल भी काफी बिगड़ती देखी गई है। 

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उच्च रक्तचाप और स्ट्रोक का खतरा - फोटो : Pixabay
ये हैं सात जोखिम कारक

शोधकर्ताओं ने पाया कि धूम्रपान सहित आहार में सोडियम की अधिकता, उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, किडनी की समस्या, बढ़ा हुआ शुगर लेवल और हाई बीएमआई ये सात जोखिम कारक हैं जो स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा रहे हैं। शोधकर्ताओं ने डेटाबेस के विश्लेषण के आधार पर कहा कि साल 2020-2030 के बीच स्ट्रोक से मौतों की संख्या और भी बढ़ सकती है, अगर हम सभी ने इन जोखिम कारकों को कंट्रोल नहीं किया। 
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फाइबर वाली चीजों के सेवन के लाभ - फोटो : istock
आहार में बढ़ाइए फाइबर की मात्रा

वहीं एक अन्य अध्ययन में वैज्ञानिकों की टीम ने बताया कि आहार में फाइबर की मात्रा को बढ़ाकर भी स्ट्रोक के जोखिमों को कम किया जा सकता है। आहार में 7 ग्राम फाइबर को शामिल करके आप स्ट्रोक का जोखिम 7% तक कम कर सकते हैं। आपको एक दिन में लगभग 25 ग्राम फाइबर लेना चाहिए। इसे स्ट्रोक के जोखिम कारकों को कम करने वाला पाया गया है।



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स्रोत और संदर्भ
Global Trends in Mortality and Burden of Stroke Attributable to Lead Exposure From 1990 to 2019

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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