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अध्ययन में दावा: ऐसे डायबिटीज रोगियों में कैंसर का खतरा अधिक, यह स्थितियां बढ़ा देती हैं जोखिम, बरतें सावधानी

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इंसुलिन और कैंसर विकसित होने का खतरा - फोटो : Pixabay
डायबिटीज वैश्विक स्तर पर बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। ब्लड शुगर का बढ़ा हुआ स्तर कई प्रकार की अन्य स्वास्थ्य जटिलताओं का भी कारण बन सकता है, यही वजह है कि जिन लोगों का ब्लड शुगर लेवल सामान्य दवाओं के माध्यम से नियंत्रित नहीं हो पाता है, उन्हें डॉक्टर्स इंसुलिन इंजेक्शन की सलाह देते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि कुछ स्थितियों में इंसुलिन का हाई डोज कैंसर जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण तक बन सकता है?

हाल ही में हुए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने हाई इंसुलिन डोज के कारण कैंसर के विकसित होने के जोखिमों के बारे में आगाह किया है।

जामा ऑन्कोलॉजी जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि टाइप-1 डायबिटीज वाले रोगियों में दैनिक हाई डोज इंसुलिन के कारण कैंसर के मामले रिपोर्ट किए गए हैं। वहीं जिन लोगों को इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या है उनमें यह खतरा और भी अधिक हो सकता है। अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि इस शोध के परिणाम के आधार पर वैश्विक स्तर पर चिकित्सकों को इंसुलिन की डोज को लेकर विचार करने की आवश्यकता है, क्योंकि जिस तरह के परिणाम देखे गए हैं वह नई चुनौतियों का कारण बन सकते हैं। आइए इस अध्ययन के बारे में विस्तार से समझते हैं।
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इंसुलिन डोज और कैंसर के जोखिम को लेकर अध्ययन - फोटो : Pixabay
 हाई डोज इंसुलिन शॉट लेने वालों में जोखिम 

अमेरिका स्थित ओहियो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि वैसे तो पारंपरिक मेटाबॉलिक कारक जैसे मोटापा, शुगर कंट्रोल (हीमोग्लोबिन A1c) और ब्लड प्रेशर नियंत्रण के तरीके तो टाइप-1 डायबिटीज वाले के रोगियों में कैंसर के कारक के तौर पर नहीं देखे गए हैं, हालांकि जिन लोगों को लंबे समय से हाई डोज वाले इंसुलिन शॉट की आवश्यकता रही है उनमें समय के साथ कैंसर विकसित होने का जोखिम हो सकता है। विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर युआनजी माओ कहते हैं, हमारे परिणामों से पता चलता है कि टाइप-1 डायबिटीज वाले रोगियों का इलाज करते समय चिकित्सकों को संभावित कैंसर के जोखिम को ध्यान में रखने की आवश्यकता है।
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इंसुलिन का हाई डोज हो सकता है नुकसानदायक - फोटो : pixabay
इंसुलिन की डोज

अध्ययन की रिपोर्ट के अनुसार दैनिक इंसुलिन की खुराक को तीन समूहों में वर्गीकृत किया जाता है। लो- 0.5 यूनिट/किलोग्राम से कम, मीडियम: 0.5 यूनिट/किलोग्राम या अधिक और हाई- प्रति दिन 0.8 यूनिट/किलोग्राम से अधिक।

शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों को लगातार हाई डोज की जरूरत लगातार हो रही है, ऐसे लोगों में कुछ प्रकार के कैंसर विकसित होने का खतरा हो सकता है। इस बारे में चिकित्सकों को विचार करने की आवश्यकता है। 

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इंसुलिन और जोखिम कारक - फोटो : Pixabay
अध्ययन में क्या पता चला?

अध्ययन करने के लिए शोधकर्ताओं की टीम ने टाइप-1 डायबिटीज वाले 1,303 रोगियों में कैंसर के तमाम जोखिम कारकों को जानने की कोशिश की। अनेक स्तर पर किए गए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि डायबिटीज रोगियों में उम्र और लिंग, दो प्रमुख फैक्टर हो सकते हैं जो समय के साथ कैंसर का कारक बनते हैं। वहीं यदि रोगी को हाई डोज की इंसुलिन दी जा रही है तो उसमें कैंसर विकसित होने का खतरा अधिक हो जाता है। विशेष रूप से, महिलाओं में इसका जोखिम अधिक देखा गया है। 
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डायबिटीज और कैंसर का खतरा - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं डॉक्टर्स?

इंसुलिन और कैंसर के खतरे के बारे में जानने के लिए हमने वरिष्ठ डायबिटोलॉजिस्ट डॉ वसीम गौहरी से संपर्क किया। डॉ वसीम कहते हैं, डेटा से पता चलता है कि डायबिटीज के शिकार लोगों में कई प्रकार के कैंसर के विकसित होने का खतरा अधिक होता है। टाइप-1 डायबिटीज (T1D) में, शरीर स्वाभावित रूप से इंसुलिन हार्मोन का उत्पादन नहीं कर पाता है, ऐसे में इस प्रकार के रोगियों को ताउम्र इंसुलिन के इंजेक्शन होती है।

इंसुलिन कोशिकाओं के उत्पादन को बढ़ाने और डेड सेल्स को कम करने के लिए जाना जाता है, कुछ स्थितियों में देखा गया है कि यह कैंसर कोशिकाओं को जन्म दे सकता है। इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने विशेषरूप से बताया है कि जिन लोगों को इंसुलिन का अधिक डोज दिया जाता है उनमें कैंसर का जोखिम 4 गुना तक अधिक हो सकती है, हालांकि इसका सैंपल साइज कम है और इसपर भविष्य में होने वाले अन्य अध्ययनों से स्थिति ज्यादा स्पष्ट हो सकेगी। फिर भी निश्चित तौर पर डायबिटीज के इलाज के दौरान इस खतरे पर ध्यान देते रहने की आवश्यकता है। 
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हाई डोज वाले इंसुलिन को लेकर बरतें सावधानी - फोटो : istock
टाइप-1 डायबिटीज और कैंसर का खतरा

टाइप-1 डायबिटीज वाले रोगियों में कैंसर के जोखिम का पता लगाने वाला यह पहला अध्ययन है। इसके पहले के शोध में वैज्ञानिकों ने पाया था कि सामान्य रूप से मधुमेह वाले रोगियों में कैंसर का खतरा अधिक होता है। इस बारे में प्रोफेसर युआनजी माओ कहते हैं, दुनियाभर में मधुमेह के कुल केस में से 10 फीसदी मामले टाइप-1 के हैं। हाल के वर्षों में ऐसे रोगियों में  पेट, लिवर, अग्न्याशय, एंडोमेट्रियम और किडनी के कैंसर के मामले बढ़ते हुए देखे गए हैं। इस तरह के जोखिम को देखते हुए यह अध्ययन विशेषतौर पर टाइप-1 वाले लोगों में कैंसर के खतरे का पता लगाने में सहायक है।


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स्रोत और संदर्भ
Daily Insulin Dose and Cancer Risk Among Patients With Type 1 Diabetes

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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