अवसाद को लेकर चली आ रही थ्योरी कितनी प्रभावी?
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क्या कहते हैं मनोरोग विशेषज्ञ?
डिप्रेशन में रसायन असंतुलन की थ्योरी को बेहतर तरीके से समझने के लिए हमने अपोलो हॉस्पिटल इंदौर में मनोरोग विशेषज्ञ डॉ आशुतोष सिंह से संपर्क किया। डॉ आशुतोष बताते हैं, डिप्रेशन की सेरोटोनिन थ्योरी को लेकर लंबे समय से विवाद है, इसपर पहले भी प्रश्नचिन्ह लगते रहे हैं। डिप्रेशन या कोई भी साइकियाट्रिक बीमारी केवल किसी रसायन के कम होने या बढ़ने तक ही सीमित नहीं है। सेरोटोनिन, डोपामिन और नॉरएपिनेफ्रीन के अलावा भी सैकड़ों प्रोटीन्स हैं जो सेकेंड मैसेंजर कहलाते हैं और ब्रेन न्यूरॉन्स में इनफार्मेशन रिले करते हैं। डिप्रेशन असल में कैसे होता है, इस पर अध्ययनकर्ता अभी तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सके हैं।
जहां तक बात एंटीडिप्रेसेंट दवाओं को लेकर उठे सवाल की है तो इसे प्रमाणित नहीं किया जा सकता है, क्योंकि वास्तव में इन दवाओं से लोगों को काफी लाभ मिल रहा है। किसी भी दवा का बीमारी में प्रभाव क्लीनिकल रिसर्च पर आधारित होता है जिसमें ये स्थापित होता है कि वो दावा उस बीमारी में कारगर है या नहीं, ना कि केवल थ्योरी पर। डिप्रेशन में एंटीडिप्रेसेंट को असरदार पाया गया है।